September 10, 2026
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ममता बनर्जी राजनीतिक ‘धमाका’ कर सकती हैं! नंदीग्राम या रेजीनगर से चुनाव लड़ने की अटकलें!

बंगाल के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों ममता बनर्जी के नंदीग्राम अथवा रेजिनगर से उपचुनाव लड़ने की चर्चा हो रही है. दरअसल ममता बनर्जी समर्थक गुट चाहता है कि ममता बनर्जी नंदीग्राम या रेजिनगर से उपचुनाव लड़े और जीत हासिल करके पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता बनकर भाजपा को तगड़ी चुनौती दे सके.ममता बनर्जी खेमे के नेताओं का मानना है कि अगर ममता बनर्जी को 5 साल बाद बंगाल की सत्ता में लौटना है तो उसकी तैयारी अभी से ही करनी होगी और सक्रिय राजनीति में रहकर सुबेंदु अधिकारी का विरोध करते हुए बंगाल की जनता को भरोसे में लेना होगा.

ममता बनर्जी के करीबी नेता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ममता बनर्जी को उपचुनाव लड़ना चाहिए. लेकिन ममता बनर्जी ने अभी अपना स्टैंड साफ नहीं किया है. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ममता बनर्जी 12 सितंबर के बाद ही अपनी भावी रणनीति की घोषणा कर सकती है. दरअसल 12 सितंबर को निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी समर्थक तृणमूल और रीतव्रत बनर्जी समर्थक तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को दिल्ली में तलब किया है. उसी दिन इस बात का फैसला हो जाएगा कि तृणमूल कांग्रेस के जोड़ा चिन्ह पर ममता बनर्जी अथवा रीतबरत बनर्जी गुट में से किसका अधिकार होता है.

अगर तृणमूल का जोड़ा चिन्ह ममता बनर्जी के पास जाता है तो इस बात की पूरी संभावना है कि ममता बनर्जी उपचुनाव के जरिए सक्रिय राजनीति में लौटने की घोषणा कर सकती है. आपको बता दें कि नंदीग्राम व रेजिनगर में 6 अक्टूबर को चुनाव होने वाले हैं. यह भी हो सकता है कि चुनाव आयोग दोनों गुटों में से किसी को भी यह चिन्ह ना देकर दोनों को अलग-अलग चिन्ह दे. इस बीच रितव्रत बनर्जी गुट ने कहा है कि अगर ममता बनर्जी बीजेपी के खिलाफ उम्मीदवार के रूप में स्वयं मैदान में उतरती है तो ऋतवरत बनर्जी गुट अपना उम्मीदवार नहीं देगा.

बीजेपी और खासकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लिए नंदीग्राम और रेजी नगर सीट का उपचुनाव काफी महत्वपूर्ण है. इन सीटों पर बीजेपी की जीत से शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक कैरियर को एक नई उड़ान मिलेगी. इसके साथ ही मुख्यमंत्री के रूप में उनकी लोकप्रियता भी साबित होगी. इन दोनों ही सीटों पर जीत के लिए भाजपा काफी जोर लगा रही है. केवल यह दो सीटे ही नहीं, बल्कि पूजा के बाद सिलीगुड़ी, कोलकाता तथा पूरे प्रदेश में कई निकाय चुनाव भी होने वाले हैं, जिनमें अपना ‘छत्रप’ बनाने के लिए भाजपा ने संगठन के स्तर पर प्रयास तेज कर दिया है.

इसे ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने 263 सदस्यों वाली जंबो कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है. इसमें प्रदेश भाजपा के सभी दिग्गज नेता, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार इत्यादि को शामिल किया गया है. भाजपा की नई कार्यकारिणी का ऐलान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने किया है. उन्होंने उपचुनाव से लेकर पूजा के बाद होने वाले निकाय चुनाव में भी भाजपा की संभावित प्रचंड जीत को ध्यान में रखते हुए भाजपा के जिम्मेदार नेताओं और अधिकारियों का चयन किया है

भाजपा प्रदेश कमेटी में केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार, शांतनु ठाकुर, राजकमल पाठक, श्याम चंद घोष, अभिजीत दास, सुवेंदु अधिकारी, उनके पिता शिशिर अधिकारी, तापस राय,जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, निशित प्रमाणिक कूचबिहार के अलावा सिलीगुड़ी का दायित्व पूर्ण रूप से शंकर घोष को दिया गया है. भाजपा की नई कार्यकारिणी नंदीग्राम तथा रेजिनगर से चुनाव जीतने की रणनीति बनाएगी. भाजपा के नेता दोनों ही सीटों पर अपनी जीत के विश्वास से भरे हुए हैं.शायद इसीलिए वह कहते हैं कि भाजपा के लिए यह महत्वपूर्ण नहीं है कि उसके मुकाबले ममता बनर्जी खड़ी होती हैं या नहीं. नंदीग्राम मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की गृहनगर सीट है. उनके पिता शिशिर अधिकारी का भी इस क्षेत्र में दबदबा है.

अगर विधानसभा चुनाव 2021 के परिणाम को देखें तो पता चलता है कि नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी शुभेंदु अधिकारी को कडी टक्कर दे चुकी है. हालांकि उस समय वह चुनाव हार गई थी.पर सुवेंदु अधिकारी की जीत का मार्जिन कोई ज्यादा नहीं था. मात्र 1956 वोटो से उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था. 2026 में सुबेंदु अधिकारी ने टीएमसी उम्मीदवार को लगभग 10000 वोटो से हराया.

कुछ लोग यह भी कहते हैं कि अगर नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी दोबारा चुनाव हारती हैं तो उनकी लोकप्रियता के साथ-साथ उनकी राजनीति भी हाशिए पर जा सकती है. इसलिए उन्हें कोई रिस्क नहीं उठाना चाहिए. उनके लिए अच्छा रहेगा कि वह रेजिनगर सीट से उपचुनाव लड़े. रेजी नगर मुर्शिदाबाद जिले में आता है. यहां लगभग 65% मुस्लिम आबादी है. आमतौर पर माना जाता है कि मुस्लिम ममता बनर्जी के परंपरागत वोटर होते हैं.

हालांकि एक मुश्किल यह भी है कि रेजी नगर सीट जो हुमायूं कबीर की सीट है, यहां से उन्होंने इस्तीफा देकर अपने बेटे को मैदान में उतारा है. हुमायूं कबीर ने भी दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों ही सीटों पर जीत दर्ज की थी. अब नियम के अनुसार उन्हें एक सीट से तो त्यागपत्र देना ही था .अगर हुमायूं कबीर का फैक्टर यहां काम नहीं करता है तो ममता बनर्जी यहां से चुनाव लड़कर जीत दर्ज कर सकती है. परंतु यह सब भविष्य के गर्भ में है.

राजनीति में कब क्या हो जाए, किसी को पता नहीं होता. लिहाजा अगले 12 सितंबर के बाद यह तय हो जाएगा कि इन उपचुनावों के जरिए ममता बनर्जी की भावी राजनीतिक योजना क्या है. हालांकि 2026 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट से चुनाव नहीं लड़ा था, लेकिन उन्होंने नंदीग्राम में अपना जो उम्मीदवार उतारा था, उसने भी सुबेंदु अधिकारी को कड़ी टक्कर दी थी. इसलिए इस बात की ज्यादा संभावना है कि अगर 2 दिन बाद चुनाव आयोग की तरफ से ममता बनर्जी के पक्ष में हरी झंडी मिल जाती है तो ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर सकती है. बहरहाल ममता बनर्जी 12 सितंबर के बाद ही अपनी भावी रणनीति का ऐलान कर सकती है.

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