October 26, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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सिलीगुड़ी में ऐसे कितने मां-बाप हैं, जो अपने ही घर में ‘कैदी’ से भी बदतर जीवन गुजारते हैं?

एक मां-बाप घर निर्माण से लेकर बच्चों को पढ़ाने-लिखाने तथा उनका भविष्य संवारने तक बड़ी जिम्मेवारी निभाते हैं. वे अपने बच्चों पर दुख का एक कतरा तक बर्दाश्त नहीं करते हैं. खुद भूखे रह कर संतान का पेट भरते हैं. कहीं ना कहीं उन्हें उम्मीद रहती है कि एक दिन उनकी संतान बुढ़ापे की लाठी बनेगी! इसके अलावा उन्होंने यह कल्पना में भी सोचा नहीं होता कि उनकी संतान उन्हें घर में कैदी से भी बदतर जीवन गुजारने पर मजबूर कर देगी.

सिलीगुड़ी में ऐसे अभागे मां-बाप की तादाद कम नहीं है. बहुत से वृद्ध मां बाप वृद्धाश्रम में जीवन गुजार रहे हैं तो अनेक मां-बाप ऐसे भी हैं जो अपने ही बेटे बहू के उत्पीड़न और शोषण के शिकार हैं और अपने ही घर में कैदी से भी बदतर जीवन गुजार रहे हैं. समाज में इनकी कहानी इसलिए प्रकाश में नहीं आती, क्योंकि उन्हें घर से बाहर निकलने ही नहीं दिया जाता है. ऐसे अभागे मां-बाप के लिए यही कहा जा सकता है कि वक्त ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा.

वक्त बड़ा बलवान होता है. वक्त के आगे किसी का ना चला है और ना कभी चलेगा.यह कोई नहीं जानता कि भविष्य में आपका वक्त कैसा होगा? केवल एक परिकल्पना कर ली जाती है. कुछ हद तक उसकी तैयारी भी होती है. लेकिन वक्त अपने हिसाब से काम करता है. वक्त के ऊपर कोई नहीं होता. सिलीगुड़ी में वक्त के मारे ऐसे अभागे मां-बाप की समय समय पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानियां सामने आती रहती हैं.

अब ऐसी ही एक अभागी मां की झकझोर देने वाली कहानी सामने आई है. यह घटना सिलीगुड़ी के शांति नगर की है, जहां कथित तौर पर घर के बेटे और बहू ने मिलकर अपनी बुजुर्ग मां को घर के सबसे गंदे कमरे में बंद करके रखा और उन्हें भोजन और पानी तक नहीं दिया. अगर किसी ने लीगल एड फोरम तक यह खबर नहीं पहुंचाई होती तो अभागी मां तड़प तड़प कर मर गई होती.

जैसे ही दार्जिलिंग जिला लीगल एड फोरम को इस अभागी मां के बारे में जानकारी मिली, बिना वक्त गंवाए फोरम के सदस्य मौके पर पहुंच गए और उन्होंने बंद कमरे का दरवाजा खोलकर उस मां को कमरे से आजाद करवाया, जो कथित तौर पर अपने बेटे बहू की यातना और जुल्म की शिकार थी.

मां की हालत काफी खराब थी और वह भूख और प्यास से कमर से दोहरी हो गई थी. कमरे से निकलते ही मां ने भोजन और पानी मांगा. इसी से यह कल्पना की जा सकती है कि वह कमरे में किस हाल में पड़ी थी. आरोप है कि बेटे बहू ने उसे पूजा से पहले से भी घर में बंद करके रखा था. आशीधर पुलिस चौकी और स्थानीय लोगों के बयान के अनुसार महिला को तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता थी. इसलिए पुलिस ने बीमार मां को तत्काल ही सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया.

सिलीगुड़ी में ऐसे अभागे मां-बाप की अनेक कहानियां हैं, जिन्होंने अपने खून पसीने की गाढी कमाई से मकान तैयार किया, सोचा था कि बेटे बहू, पोते पोतियों के साथ खुशगवार जिंदगी बिताएंगे, लेकिन वक्त ने उन्हें या तो वृद्धाश्रम में पहुंचा दिया है या फिर वे अपने ही घर में कैदी से भी बदतर जीवन गुजार रहे हैं. यह उनके कर्मों का दोष है या संस्कारों का, यह तो बहस का विषय है, परंतु ऐसी घटनाएं विचलित करने वाली होती हैं!

शांति नगर मामले में मिली जानकारी के अनुसार दार्जिलिंग जिला लीगल एड फोरम ने एक कडा कदम उठाया है और महिला के बेटे और बहू के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है. अगर आपकी नजर में ऐसे ‘सताए’ मां-बाप हैं, तो उनकी सूचना सामाजिक संगठनों और पुलिस तक जरूर पहुंचाएं. आप हमें भी सूचना साझा कर सकते हैं. यह घटना दर्शाती है कि इंसान संवेदन शून्य होता जा रहा है. रिश्ते दम तोड़ रहे हैं. अगर ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज किया जाता रहा तो आगे का समय और भी ज्यादा भयावह होने वाला है!

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