सिलीगुड़ी कॉरिडोर उत्तर पूर्वी राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है. इन राज्यों में अरुणाचल प्रदेश भी एक राज्य है, जहां सीमा के निकट चीन का दबदबा बढता जा रहा है. चीन एक सुनियोजित साजिश के तहत अरुणाचल प्रदेश से लगी LAC के पास तिब्बतियों को बसा रहा है.
एक रिपोर्ट के अनुसार चीन के लगभग 70% से ज्यादा सीमावर्ती गांव भारत के उत्तर पूर्वी सेक्टर में लाइन ऑफ कंट्रोल के करीब स्थित हैं. इनमें से 90% गांव अकेले अरुणाचल प्रदेश के सामने हैं. ये गांव और बस्तियां केवल नागरिक आबादी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी आड़ में चीन खुफिया निगरानी, उन्नत संचार और सैन्य रसद के केंद्र तैयार कर रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन की साजिश सिलीगुड़ी गलियारा को अस्थिर करना है ताकि चीन भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों में अपना प्रभाव स्थापित कर सके.
इसके विपरीत भारत की तैयारी कम नजर आती है. यह सच है कि भारत ने 2014 के बाद अपनी उत्तर सीमा पर सड़कों, सुरंगों और पुलों का जाल जरूर बिछाया है, लेकिन उत्तर पूर्वी राज्यों जैसे अरुणाचल, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल और लद्दाख जैसे सीमांत राज्यों के साथ मिलकर भारतीय गांवों को भी लाइन ऑफ कंट्रोल के और करीब बसाने की उसकी योजना अभी परवान नहीं चढ़ी है. अगर ऐसा होता है तो चीन को भारत आंख में आंख डालकर जवाब दे सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार चीन की साजिश विवादित सीमा को एक साधारण चीनी प्रांतीय सीमा जैसा दिखाना है ताकि आने वाले दशकों में अरुणाचल प्रदेश में एक सुनियोजित घुसपैठ को बढ़ावा दिया जा सके. विशेषज्ञों के अनुसार चीन इसकी आड़ में सिलीगुड़ी गलियारा को अस्थिर करना चाहता है ताकि भारत के उत्तर पूर्वी राज्य अस्त व्यस्त हालत में आ सकें.
ITBP चीफ शत्रुजीत सिंह कपूर के खुलासे के बाद भारत की चिंता बढ़ गई है. भारत ने इसका कड़ा विरोध किया है. भारत ने कहा है कि जिस तरह से चीन की ओर से गतिविधियां चलाई जा रही है, उससे LAC पर स्थितियां बिगड़ सकती हैं. हालांकि सीमा पर स्थिति बिगड़ने के संकेत के बीच आज चीन की ओर से भी एक आधिकारिक बयान जारी किया गया है. इसे एक राहत के रूप में भी देखा जा सकता है.
चीन की ओर से कहा गया है कि भारत और चीन के बीच समझौते के अनुरूप ही उसके सैनिक अरुणाचल की सीमा से लगे अपने क्षेत्र में पेट्रोलिंग करते हैं. इसमें कोई गलत नहीं है. यह एक सामान्य प्रक्रिया है. 2 दिन पहले अरुणाचल प्रदेश में लाइन ऑफ कंट्रोल पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच टकराव की नौबत उसी तरह से आ गई थी, जैसे जुलाई महीने में भी आई थी.
मालूम हो कि आइटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने 22 अक्टूबर 2026 को राजस्थान के अलवर में आयोजित एक समारोह में जवानों को संबोधित करते हुए कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में कई जगह भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनातनी बढी है और यह अब तक जारी है. इसके बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया था. अब चीन का भी स्पष्टीकरण सामने आ गया है.
आखिर अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीनी सैनिकों के बीच आए दिन तनातनी क्यों बनी रहती है? क्यों चीन पर आरोप लगाया जाता है कि उसने अरुणाचल प्रदेश की अधिकांश भूमि पर कब्जा कर रखा है? दरअसल भारत और चीन के बीच लगभग 3488 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ कंट्रोल है.इसमें अरुणाचल प्रदेश में लाइन ऑफ कंट्रोल की लंबाई लगभग 1126 किलोमीटर है.
भारत और चीन के बीच अभी भी लाइन ऑफ कंट्रोल का पूरा सीमांकन नहीं हुआ है. जिसके कारण दोनों देश सीमा को लेकर अलग-अलग दावे करते हैं और यही कारण है कि भारत और चीन के सैनिक लाइन ऑफ कंट्रोल को लेकर आमने-सामने आ जाते हैं, जहां टकराव एक सामान्य घटना है.
