आज पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया. काफी समय से इसकी प्रतीक्षा की जा रही थी. मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सुवेंदु अधिकारी दिल्ली गए थे और वहां उन्होंने प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री से इस संबंध में विचार विमर्श भी किया था.
शुभेंदु अधिकारी के मंत्रिमंडल में पहली बार उत्तर बंगाल का दबदबा देखा जा रहा है. अगर पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो आजादी के बाद से संभवत: यह पहला मौका है जब उत्तर बंगाल से एक साथ कई विधायकों को राज्य या कैबिनेट मंत्री के तौर पर जगह दी गई है. इससे पहले टीएमसी या सीपीएम सरकार में उत्तर बंगाल से इतने मंत्री नहीं बनाए गए थे.
आज लोक भवन में सुबह लगभग 10:50 पर राष्ट्रीय गान जन गण मन के साथ ही शपथ ग्रहण कार्यक्रम शुरू हुआ. राज्यपाल ने 35 मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई . उत्तर बंगाल से एक-एक करके मंत्री शपथ ले रहे थे और सिलीगुड़ी तथा उत्तर बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश और खुशी देखी जा रही थी. जब शंकर घोष को पूर्ण मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई तो सिलीगुड़ी में भाजपा कार्यकर्ता खुशी में झूम उठे.
आज के मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही राज्य में मंत्रियों की कुल संख्या 41 हो गई है. राज्य में 4 मई को मतगणना हुई और भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ. 9 मई को शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बंगाल में भाजपा सरकार का गठन हुआ. सुबेंदु अधिकारी के साथ ही अग्निमित्र पाॅल, निशिथ प्रमाणिक, दिलीप घोष, अशोक कीर्तनीया और खुदीराम टुडू ने मंत्री पद संभाला था.
राज्य में बनी भाजपा सरकार में उन विधायकों को इनाम दिया गया है जिन्होंने ममता बनर्जी के किले को उखाड़ फेंकने के लिए एडी चोटी का जोर लगा दिया था. अगर मंत्रिमंडल विस्तार का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि अधिकारी की कैबिनेट में उत्तर बंगाल के अलावा मतुआ और दलित समुदायों को प्राथमिकता दी गई है.
शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट में कैबिनेट स्तर के मंत्रियों की सूची इस प्रकार है. दीपक बर्मन, तापस राय, डॉक्टर शंकर घोष, मनोज कुमार उरांव, अर्जुन सिंह, स्वप्न दास गुप्ता, गौरी शंकर घोष,कल्याण चक्रवर्ती, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, शार्दुल मुखर्जी, अजय पोद्दार, अनूप कुमार दास, दूध कुमार मंडल, कुल 13 कैबिनेट स्तर के मंत्री हो गए हैं.
जबकि राज्य स्तर के मंत्रियों में स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री डॉ इंद्रनील खान, राजेश महतो और मालती राभा राय हैं. शेष राज्य मंत्रियों में जुएल मुर्मू, हरे कृष्णा बेरा, आनंद मय बर्मन, अशोक डिंडा, नदिया चांद बावड़ी, विशाल लामा ,शांतनु प्रमाणिक, मौमिता विश्वास मिश्रा, पूर्णिमा चक्रवर्ती, उमेश राय,कौशिक चौधरी, दिवाकर घराती ,भास्कर भट्टाचार्य, कलिता माझी, अमिय किस्कु ,गार्गी दास घोष, दीपांकर जाना, विराज विश्वास, सुमन सरकार के नाम शामिल है.
शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल और चाय बागान मे संतुलित और पूर्ण विकास के लिए कटिबद्धता व्यक्त की है. इसका प्रमाण उत्तर बंगाल के मंत्रियों को मंत्रिमंडल में अधिक से अधिक जगह देकर देने की कोशिश की गई है. सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष पहली बार कैबिनेट स्तर के मंत्री बने हैं.
इसके अलावा माटीगाड़ा नक्सलबाड़ी के विधायक आनंदमय बर्मन, विशाल लामा, मालती राभा राय, निशिथ प्रमाणिक आदि को मंत्रिमंडल में जगह देकर सुबेंदु अधिकारी की सरकार ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भाजपा को हमेशा से साथ देने वाली उत्तर बंगाल की जनता ही इस राज्य की मुख्य नीति निर्धारण प्रक्रिया का केंद्र बनने जा रही है.
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि शुभेंदु अधिकारी के मंत्रिमंडल को विकास प्रक्रियाओं से संतुलित करने के लिए महुआ और दलित कार्ड को प्रमुखता दी गई है. अशोक कीर्तनीया को पहले ही मंत्रिमंडल में जगह मिल चुकी है. आज कलिता मांझी, दिवाकर और नदिया चंद्र बावली जैसे चेहरों को शामिल कर भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि वह उनके हैं.
सुवेंदु अधिकारी की कैबिनेट में उन चेहरों को प्रमुखता दी गई है जो किसी न किसी तरह से ममता बनर्जी की सरकार में प्रताड़ित या अपमानित किए गए थे. इनमें अर्जुन सिंह आदि नेता भी शामिल है. जिन्हें कैबिनेट स्तर का मंत्री बनाया गया है. आज मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ ही शुभेंदु अधिकारी की सरकार के सामने कई चुनौतियां भी शुरू हो गई हैं. मुफ्त की रेवड़ी को जारी रखने के साथ ही राज्य का भारी घाटा और कर्ज को संतुलित करने के लिए सरकार को एक ठोस विकल्प की तलाश करनी होगी.
भाजपा सरकार ने आज से राज्य में महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा भी शुरू कर दी है. यह सेवा कब तक जारी रहती है, यह तो पता नहीं लेकिन इसका राज्य परिवहन निगम के राजस्व पर भारी असर पड़ सकता है. कुल मिलाकर शुभेंदु अधिकारी के मंत्रिमंडल में उत्तर बंगाल और पहाड़ के विकास के निर्धारित मॉडल को पूरा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा मंत्रियों को जिम्मेदारी दी गई है. अगर एक शब्द में कहा जाए तो पहली बार राज्य कैबिनेट में उत्तर बंगाल के मंत्रियों का दबदबा रहेगा, जिसका प्रभाव कानून एवं प्रशासनिक व्यवस्था तथा सरकारी योजनाओं के संचालन में देखा जा सकेगा.

