अगर आपसे कोई यह सवाल करता है कि सबसे ज्यादा भरोसेमंद सरकार की कौन सी वित्तीय संस्था है? तो निश्चित रूप से आपका जवाब पोस्ट ऑफिस या बैंक होगा. लेकिन जब बैंक ही ग्राहक का भरोसा तोड़ने लगे, तब ग्राहक इंसाफ के लिए क्या करे? किसके पास जाए? कुछ इसी तरह का हैरान कर देने वाला सिलीगुड़ी का मामला है, जो आपके होश उड़ा देगा!
सिलीगुड़ी में एक बैंक से जुड़ा है यह मामला, जो सुर्खियों में है. सिलीगुड़ी के रामेश्वर ने एक बैंक के कॉमन सर्विस प्वाइंट में अपना बचत खाता खुलवाया था. रामेश्वर के बाद शंभू दयाल, प्रभु और जगन्नाथ ने भी अपना खाता खुलवाया और अपनी बचत के पैसे जमा करने शुरू कर दिए. रामेश्वर का एक लड़का मुंबई में रहता है. उसने मकान बनाने के लिए अपने पिता रामेश्वर के सीएसपी अकाउंट में लगभग 2 लाख रुपए कुछ भी समय पहले ट्रांसफर कराए थे.
भक्ति नगर इलाके में रामेश्वर रहते थे. उन्होंने एक जमीन ले रखी थी और अब उस पर मकान बनवाना चाहते थे. बाप बेटे दोनों ही कमा रहे थे. बेटा मुंबई में मजदूरी कर रहा था. जबकि रामेश्वर सिलीगुड़ी में छोटे-मोटे काम करके गुजर बसर कर रहे थे. खाने कमाने के बाद जो पैसा बचता, रामेश्वर अपने खाते में जमा कर दिया करते थे. उन्हें मकान में काम लगाने के लिए पैसों की जरूरत थी. वह सीएसपी चले गए और वहां से लगभग 50 हजार रुपए उठाकर घर आ गए.
रामेश्वर ने घर पर हिसाब जोड़ा. अभी भी उनके अकाउंट में उनके हिसाब से 210000 रुपए होने चाहिए थे. कुछ लोगों से उन्होंने सुन रखा था कि सीएसपी वाले हिसाब का गड़बड़ झाला करते हैं. वह अगले दिन पासबुक लेकर सीसीपी काउंटर पर पहुंचे. उन्होंने खाता चेक करवाया तो पता चला कि उनके खाते में मात्र 10000 रू.ही बचे थे.
रामेश्वर का दिमाग भिन्ना गया. उसने तुरंत ही सीएसपी काउंटर क्लर्क से पूछा कि उसके खाते में 2 लाख से ज्यादा रकम होनी चाहिए जबकि मात्र 10000 ही क्यों? इसके बाद रामेश्वर कर्मचारी से जोर-जोर से बहस करने लगे. धीरे-धीरे सीएसपी के अन्य खाता धारकों को भी इस गड़बड़ झाले का पता चला तो वह भी सीएसपी पहुंच गए और हंगामा करने लगे. उनके साथ भी इसी तरह का कांड हुआ था. वे काफी समय से CSP का चक्कर लगा रहे थे.
उनके साथ भी रामेश्वर जैसी कहानी दोहराई गई थी. खून पसीने की अपनी गाढी कमाई की वापसी के लिए यह लोग काफी समय से संघर्ष कर रहे थे. बैंक और सीसीपी की मिली भगत का आरोप लगाया जा रहा था. यहां तक कि उन लोगों ने जिनके बैंक खाते में ज्यादा हेर फेर की गई थी और उनकी जानकारी के बगैर हजारों रुपए निकाले गए थे, बैंक के साथ-साथ, शासन अधिकारी व पुलिस थाने में भी शिकायत दर्ज कराई थी. लेकिन कहीं से भी उन्हें सहयोग नहीं मिल रहा था.
सीएसपी के लोग भी गोल-गोल जवाब दे रहे थे. पीड़ित व्यक्ति या खाताधारक सभी इसी उम्मीद में थे कि एक दिन उनका पैसा वापस मिल जाएगा. लेकिन इस उम्मीद में उनके 6 माह से ज्यादा हो गए थे. उनका पैसा वापस नहीं मिला था. उस दिन जब बैंक में रामेश्वर और सीसीपी के अधिकारी के बीच गर्मागर्मी शुरू हो गई , तो जिनके जिनके पैसे डूबे थे, वे सभी खाताधारक सीएसपी काउंटर पर पहुंचकर हंगामा करने लगे. किसी के ₹10000 हिसाब में गड़बड़ थे, तो किसी के 20000, किसी के 50000 तो किसी के डेढ़ लाख रुपए गड़बड़ किए गए थे. उस दिन वे सभी रामेश्वर के साथ मिलकर हंगामे में शामिल हो गए थे.
एक अनुमान के अनुसार सीसीपी के करीब 96 ग्राहकों के बैंक खाते से एक करोड़ ₹20 हजार गबन किए गए थे. जाहिर बात थी कि सीएसपी के अधिकारियों की मिली भगत के बगैर यह संभव नहीं हो सकता था. हंगामा बढते देखकर एनजेपी थाने से पुलिसव मौके पर पहुंची और किसी तरह से ग्राहकों तथा सीएसपी प्रबंधन के बीच मामला शांत करवाया. उस दिन तो ग्राहक शांत हो गए. लेकिन अगले दिन इस घटना का एक नया मोड सामने आ गया.
ग्राहकों ने बताया कि जब वे अपने पैसे के लिए सीएसपी प्रबंधन से मिलने पहुंचे तो पता चला कि वह गायब थे. इस तरह से जिन-जिन कर्मचारियों पर ग्राहकों ने आरोप लगाया था, उन सभी को बैंक से निकाल दिया गया था. वह सभी सीएसपी से बाहर हो चुके थे. कोई रास्ता ना देखकर सीसीपी के सभी भुक्तभोगी ग्राहक बैंक की शाखा में पहुंच गए और हंगामा करना शुरू कर दिया. जब सीएसपी के महिला खाताधारकों को जानकारी हुई तो वे भी बैंक शाखा के कार्यालय के सामने पहुंचकर प्रदर्शन करने लगी.
उन्होंने पुलिस की भी एक नहीं सुनी और ग्राहकों के गबन किए गए पैसे और भ्रष्टाचार को लेकर हंगामा शुरू कर दिया. इनमें से पीड़ित महिलाएं भी शामिल थी. उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 4 वर्ष पहले जब बैंक का सीएसपी काउंटर खोला गया था, तब उन्होंने सीएसपी का काफी सहयोग किया था. उस समय से वे पैसे जमा कर रहे थे. उन्होंने बैंक पर भरोसा किया था. लेकिन कर्मचारियों ने उनका भरोसा तोड़ दिया. बड़ी मुश्किल से पुलिस के अधिकारियों ने मामला शांत करवाया और पीड़ित पक्ष को आश्वासन दिया कि उनके साथ न्याय किया जाएगा.
यह पूरा मामला सिलीगुड़ी के भक्ति नगर थाना अंतर्गत बाजार इलाके में स्थित एक बैंक के सीएसपी का है. लगभग 4 साल पहले बैंक के द्वारा CSP काउंटर खोला गया था, जहां इलाके के सैकडो लोगों ने अपना खाता खुलवाया था. आरंभ में तो सब कुछ ठीक-ठाक रहा. बाद में जैसा कि ग्राहकों ने शिकायत की है, उनके खाते में जमा कराई गई रकम के साथ गोलमाल शुरू हुआ. आरंभ में तो अधिकारियों के द्वारा उन्हें गोल-गोल जवाब देकर शांत कर दिया गया लेकिन जब धीरे-धीरे गवन का यह मामला करोड़ों तक पहुंच गया तो बैंक के ग्राहक आपे से बाहर होते चले गए.
बहरहाल पुलिस ने इस पूरे मामले को देखना शुरू कर दिया है. ग्राहकों की शिकायत दर्ज कर ली गई है. शाखा बैंक के अधिकारी से भी पूछताछ की जा रही है. उधर प्रदर्शनकारी खाताधारक और पीड़ित महिलाओं ने मांग की है कि अगर उनके साथ न्याय नहीं किया गया या उनके पैसे नहीं लौटाए गए तो वे भविष्य में बड़े आंदोलन करने पर बाध्य हो जाएंगे. बहरहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन में जुट गई है.
ग्राहकों को समय दिया गया है. सिलीगुड़ी में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है. पहले भी ऐसा हुआ था और देश भर के अनेक सीएसपी में ऐसा होता रहा है. इसका यह मतलब नहीं है कि CSP भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है. कुछ अधिकारियों या कर्मचारी के कारण पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ जाता है. अब देखना होगा कि पुलिस जांच में सच क्या सामने आता है!
