सिलीगुड़ी के टिकियापाड़ा के पास, बाबूपाड़ा के सामने से गुजरती या फिर लायंस क्लब नेत्रालय के सामने से गुजरती या उसके आगे सूर्यसेन पार्क से गुजरने वाली सड़कें तो छोड़िए, उत्तर, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण कम से कम आधी सिलीगुड़ी की संपर्क या सहायक सड़कों का बुरा हाल है. तीनबती मोड़ से रेलवे हॉस्पिटल जाने वाली सड़क हो या फिर चंपासारी के निकटवर्ती मार्ग, सब जगह पिछली बरसात ने संपर्क सड़कों का कचूमर निकाल रखा है.
इन सड़कों की अवस्था इतनी खराब है कि बरसात में यहां पानी जमने लगता है. इसी पानी में जब यहां से कोई वाहन गुजरता है तो दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है. लोग बताते हैं कि कई बार दुर्घटना होते-होते बची है. एक बार तो एक स्कूल बस दुर्घटनाग्रस्त होते-होते बची. स्थानीय लोगों की शिकायत है कि पार्षद से बताने जाओ तो वे कहते हैं कि उनके हाथ में अब कुछ नहीं है. सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड भंग हो चुका है. ऐसे में SMC को एक अधिकारी चला रहे हैं.
इस समय सिलीगुड़ी की लगभग आधा दर्जन सड़कें मानो सिलीगुड़ी नगर निगम से फरियाद कर रही हैं. वे कह रही हैं कि उनके हाल पर तरस खाओ. उन्हें बचा लो. जब टीएमसी का बोर्ड था तो पूर्व मेयर गौतम देव के प्रयास से आंशिक तौर पर सड़कों का कायाकल्प जरूर किया गया था. लेकिन पिछली बरसात में डामर व तारकोल गायब हो चुके है. बजरी और मिट्टी भी अपनी जगह से हटने लगी है. बड़े-बड़े होल पड़ गए हैं, जो एक बड़ी दुर्घटना को न्यौता दे रहे हैं.
काफी समय से सिलीगुड़ी की सड़कों का कायाकल्प नहीं किया गया है. सिलीगुड़ी की पहली बरसात में ही कई सड़कें जर्जर हो चुकी हैं. सबसे बुरा हाल उन सडकों का है, जो बाजार क्षेत्र से होकर गुजरती हैं. ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों की तो बात ही छोड़िए, शहरी बस्ती क्षेत्र की सड़कों का भी बुरा हाल है. अगर आप हाशमी चौक से वाहन द्वारा एनजेपी की ओर जाते हैं तो ओवर ब्रिज पार करने के साथ ही टिकियापाड़ा शुरू हो जाता है. यहां सड़क पर पर बड़े-बड़े गड्ढे नजर आएंगे. कई बार गड्ढों में गाड़ियां फंस जाती है. दुर्घटना का भी डर बना रहता है.
सिलीगुड़ी की पिछली भारी बरसात में शहर के अधिकांश निचले इलाकों की सड़कों पर पानी जम गया था. कई जगह तो बड़े गड्ढे बन गये थे कि टोटो या छोटे वाहन पलटते नजर आए थे. सोशल मीडिया और दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनकी तस्वीर भी आपने देखी थी. फिलहाल सिलीगुड़ी में गर्मी पड़ रही है और दो-तीन दिनों से बरसात भी थमी है. लेकिन कब बरसात शुरू हो जाए, कहा नहीं जा सकता है. जब पहली बरसात में ही सिलीगुड़ी की अधिकांश सड़कों का कचूमर निकल चुका हो, अभी तो पूरी बरसात बाकी है.
इलाके के लोगों की चिंता स्वाभाविक है. लेकिन ये लोग इन सड़कों की मरम्मति या कायाकल्प के लिए जाएं तो कहां जाएं? नगर निगम बोर्ड भंग हो चुका है. बोर्ड का मुखिया तो जरूर है लेकिन उनके पास सीमित क्षमता है. सिलीगुड़ी के अधिकांश पार्षद टीएमसी के थे जो अब मैदान छोड़कर जा चुके हैं या फिर अपनी तरह से अपना जीवन बिता रहे हैं. उन्हें जनता या सड़कों के कायाकल्प से कोई लेना-देना नहीं है.
उधर मौसम विभाग लगातार चेतावनी दे रहा है. जबकि प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. अगर समय रहते सिलीगुड़ी नगर निगम प्रशासन ने सिलीगुड़ी की बदहाल होती सड़कों की फरियाद नहीं सुनी तो किसी दिन सड़कों पर कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है. सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड भंग होने के बाद स्थानीय विधायक और उनके प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है.
अगर वर्धमान रोड फ्लाईओवर का काम पूरा हो गया हो, फीता और तमाम ताम झाम शेष हो चुके हो तो, तो स्थानीय सिलीगुड़ी प्रशासन, विधायक ,प्रतिनिधि आदि को अविलंब सिलीगुड़ी की खस्ता होती सड़कों को बचाने के लिए जुट जाना चाहिए. अभी तो संपर्क सड़कों का बुरा हाल है. लेकिन अगली बरसात तक सिलीगुड़ी की मुख्य सड़कों पर भी बड़े-बड़े गड्ढे नजर आए तो आश्चर्य नहीं होगा. इसलिए प्रशासन को देर नहीं करना चाहिए और संबंधित विभाग को इन सड़कों के पुनरुद्धार के लिए काम शुरू कर देना चाहिए .

