घड़ी की सुइयां टिक टिक करती जा रही है. राजनीतिक दलों को बेसब्री से इंतजार है. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कभी भी राज्य में चुनाव की घोषणा कर सकते हैं. आज कोलकाता में मुख्य चुनाव आयुक्त और उनकी टीम के साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक और उत्पन्न हालात बयां कर रहे हैं कि बस कुछ ही समय में यहां चुनाव की घोषणा की जा सकती है. चु
चुनाव आयोग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग राज्य में चुनाव आयोग के कार्यों से संतुष्ट है. आयोग के साथ बैठक में 7 दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. प्रतिनिधियों ने अपनी बात आयोग के समक्ष रखी है. चुनाव आयोग ने सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार का फैसला लेने का आश्वासन दिया है.इस बैठक में टीएमसी, बीजेपी, सीपीएम, कांग्रेस, फॉरवर्ड ब्लॉक, आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय जन पार्टी के नेता उपस्थित थे. आयोग की ओर से राजनीतिक दलों को आश्वस्त किया गया है कि राज्य में मतदान निष्पक्ष और न्याय संगत होगा.
तैयारियां पूरी की जा चुकी है. जैसे चावल पका है या कच्चा, चावल का एक दाना ही बता देता है. ठीक उसी प्रकार से पश्चिम बंगाल में चुनाव की घोषणा से पूर्व चावल के दाने यानी प्रदेश की स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है. भारतीय चुनाव आयोग की पूरी टीम की विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ कोलकाता में बैठक और चुनाव पर विचार विमर्श के बाद चुनाव आयोग अब ज्यादा समय तक चुनाव की घोषणा को टाल नहीं सकता है. कभी भी चुनाव की घोषणा कर सकता है.
आज कोलकाता में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के द्वारा राज्य में एक बार अथवा एक से अधिक बार में चुनाव कराए जाने को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त से चर्चा हुई. चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के नेताओं की बात ध्यान से सुनी. वाम मोर्चा नेताओं की ओर से राज्य में एक बार में ही चुनाव कराये जाने की मांग की जा रही है. टीएमसी के नेता भी चाहते हैं कि अधिक से अधिक दो चरणों में चुनाव संपन्न हो सके. भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी राज्य में ज्यादा से ज्यादा तीन चरणों में चुनाव संपन्न कराए जाने की मांग की जा रही है.
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने मांग की है कि हर मतदान केंद्र पर केंद्रीय बलों की तैनाती, वेब कास्टिंग और मतदाताओं की पहचान की सख्त सत्यापन की व्यवस्था हो. चुनाव आयोग के साथ बैठक में तृणमूल कांग्रेस की ओर से फिरहाद हाकिम और चंद्रमा भट्टाचार्य ने अपना पक्ष रखा. चुनाव आयोग ने राज्य में चुनाव कराए जाने लायक हालत है या नहीं इसकी समीक्षा कर ली है चुनाव आयोग ने 24 केंद्रीय तथा राज्य की सुरक्षा एजेंटीयों के साथ बैठक कर इसका सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है
चुनाव आयुक्त के साथ बैठक में भाग लेते हुए माकपा और कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने राज्य की कानून व्यवस्था पर चिंता जताई. भारतीय जनता पार्टी की ओर से पहले से ही मांग की जा रही है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाकर चुनाव कराया जाए ताकि ममता बनर्जी की सरकार कोई गड़बड़ी नहीं कर सके. उधर तृणमूल कांग्रेस के नेता भारतीय चुनाव आयोग की टीम का पुरजोर विरोध कर रहे हैं.
बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने पहुंची चुनाव आयोग की टीम को आज सुबह उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ममता बनर्जी के इलाके कालीघाट में भारी विरोध का सामना करना पड़ा. उन्हें काले झंडे दिखाए गए.
यह वाक्या उस समय हुआ जब ज्ञानेश कुमार राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के साथ कालीघाट मंदिर में पूजा करने गये थे. उनके आगमन से पहले ही टीएमसी प्रदर्शनकारी मंदिर के बाहर जमा हो गये. जैसे ही मुख्य चुनाव आयुक्त मंदिर से बाहर निकले, प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाकर गो बैक के नारे लगाए. चुनाव आयोग की टीम मैं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं.
चुनाव आयोग की टीम के साथ बैठक में भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि मंडल ने टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध दिए गए विवादित बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी उंगली काट ली जाएगी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था. इसको लेकर भाजपा आक्रामक है और ज्ञानेश कुमार से इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग कर रही है.

