March 9, 2026
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बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाकर चुनाव कराने की उठ रही मांग!

There is a demand to impose President's rule in Bengal and hold elections.

बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अपमान के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी सफाई में जो कुछ भी कहा हो, लेकिन यह किसी के गले नहीं उतर रहा है कि राष्ट्रपति के बंगाल दौरे पर राज्य की मुख्यमंत्री उनका स्वागत करने के लिए मौजूद न हों. भारतीय जनता पार्टी का तंज है कि ममता बनर्जी को राष्ट्रपति के स्वागत से ज्यादा धरना प्रदर्शन जरूरी था. इस बारे में गौतम देव तथा टीएमसी के दूसरे नेता भी सफाई दे चुके हैं. लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि बंगाल की धरती पर राष्ट्रपति का अपमान हुआ है.

भारतीय जनता पार्टी ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया है. सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष और बीजेपी के दूसरे नेता अपने तरीके से इसका विरोध कर रहे हैं. राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाया जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि राज्य की पुलिस टीएमसी के कार्यकर्ता की तरह कार्य कर रही है. जगह-जगह भाजपा की परिवर्तन यात्रा की बाइक रैली को भी रोका जा रहा है. भाजपा का यह भी आरोप है.

आज राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी मीडिया से बातचीत में राष्ट्रपति के अपमान वाले मुद्दे पर टीएमसी पर जोरदार हमला बोला और कहा कि टीएमसी के इशारे पर चलने वाले सिलीगुड़ी के प्रशासनिक अधिकारियों खासकर S.P, दार्जिलिंग के डीएम और पुलिस कमिश्नर को तुरंत निलंबित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि टीएमसी ने राष्ट्रपति का अपमान करके संविधान की हत्या की है.

यह मुद्दा इतना बड़ा बन चुका है कि उम्मीद की जा रही है कि कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके जरिए टीएमसी पर बड़ा हमला कर सकते हैं. माकपा और कांग्रेस की ओर से भी चुनाव आयोग के साथ बैठक में राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं. इन सबके बीच दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट के उस बयां की भी चर्चा शुरू हो गई है, जहां उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाकर चुनाव कराने की मांग की है.

राजू बिष्ट का यह बयान तो शनिवार को ही आ गया था, जब उन्होंने गोसाईपुर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा था. उन्होंने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा था कि मौजूदा स्थितियों में राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराना संभव नहीं है. अत: राज्य में पहले राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए. उसके बाद यहां चुनाव कराए जाएं. उन्होंने यह भी कहा था कि वह दिल्ली में राष्ट्रपति से मुलाकात करके राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति की जानकारी देंगे और इस संबंध में उनसे अनुरोध करेंगे.

राजू बिष्ट का यह बयान धीरे-धीरे भाजपा खेमे में चर्चा का विषय बनता जा रहा है. राज्य के दूसरे विपक्षी दल भी मानते हैं कि ममता बनर्जी का धरना प्रदर्शन ठीक नहीं है और संविधान के अनुसार उन्हें राष्ट्रपति के कार्यक्रम में मौजूद रहना चाहिए था. ना कि धरना का विषय बताकर इससे किनारा कर लेना चाहिए. भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने ममता बनर्जी के इस अड़ियल रवैये की तीव्र आलोचना की है. केंद्र सरकार ने मुख्य राज्य सचिव को जवाब देने को कहा भी है.

उत्तर बंगाल में जनजातीय लोगों की एक विशाल आबादी है. सूत्र बता रहे हैं कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अपमान के मुद्दे को जनजातीय लोगों ने एक बड़ा विषय बना लिया है और इस मुद्दे को लेकर वे आंदोलन कर सकते हैं. मुख्यमंत्री ने अपनी सफाई में कहा है कि उनके लिए राज्य के सभी धर्म और वर्ग के लोग समान हैं, जिनके अधिकार की वह लड़ाई लड़ने के लिए चुनाव आयोग के खिलाफ धरना दे रही है. अगर राष्ट्रपति का अपमान हुआ है तो इसके लिए ना तो उनकी पार्टी और ना ही वह स्वयं जिम्मेदार हैं.

हालात धीरे धीरे विषम होते जा रहे हैं. इन्हीं हालातो को देखते हुए राजू बिष्ट ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाकर चुनाव कराने की मांग की है. हालांकि प्रदेश भाजपा के बड़े नेताओं की ओर से अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. पर वह भी मानते हैं कि अगर ऐसा होता तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की बड़ी गुंजाइश थी. लेकिन राजू बिष्ट और भाजपा के दूसरे नेता भी अच्छी तरह समझते हैं कि राज्य में राष्ट्रपति शासन किन स्थितियों में लगाया जाता है और ऐसी स्थिति अभी यहां नहीं आई है.

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