आज पश्चिम बंगाल में एस आई आर की पहली पूरक सूची जारी कर दी गई है. सूची में 10 लाख लोगों के नाम काट दिए गए हैं. सूची प्रकाशित होने के बाद राज्य भर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, ताकि लोग हिंसक ना बने. खासकर संवेदनशील इलाकों में पुलिस और केंद्रीय बल विशेष निगरानी रख रहे हैं. कहीं से किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं है.
मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 60 लाख विचाराधीन मामलों में 27 लाख 30 हजार मामलों का निपटारा शुक्रवार को ही हो गया था . राज्य चुनाव आयोग इस पर और ज्यादा समय लेना नहीं चाहता है. इसलिए आज यह पूरक सूची जारी कर दी गई है.
जो लोग 2021 अथवा पहले के विधानसभा चुनाव में अपनी पसंदीदा सरकार चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे थे, इस बार वे वोट नहीं डाल सकेंगे. ऐसे लोगों की तादाद इस सूची के अनुसार लगभग 10 लाख है. ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची से क्यों हटाए गए हैं, इसका कारण भी स्पष्ट हो गया है. जिला चुनाव अधिकारियों के पास से उनकी हार्ड कॉपी संबंधित मतदान केन्द्र में लगा दी जाएगी.
भारतीय चुनाव आयोग और बंगाल के सीईओ कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर इस सूची को देखा जा सकेगा. इसमें दो श्रेणियां हैं. पहली श्रेणी में जिनके नाम अंतिम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं और दूसरी श्रेणी में उनके नाम हैं, जिनके नाम काटे गए हैं. ऐसे लोगों से अपील की गई है कि वह ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन न्याय अधिकरण में सुनवाई के लिए स्वतंत्र हैं.
इस बीच राज्य में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त कर दिए गए हैं. राज्य पुलिस और केंद्रीय बल लगातार गश्त कर रहे हैं. चुनाव आयोग के निर्देश पर राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पूरे क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं. विभिन्न थानों के मातहतों को निर्देश दे रहे हैं. निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव के लिए सभी तरह के कदम उठाए जा रहे हैं.
बंगाल चुनाव का रक्त रंजित इतिहास रहा है.वाममोर्चा शासन काल से लेकर तृणमूल कांग्रेस शासन तक जब-जब यहां चुनाव हुए, हिंसा की आग लगातार उग्र देखी गई इस बार के चुनाव में हिंसा रोकने के लिए चुनाव आयोग ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है. लगभग 700 केंद्रीय सुरक्षा बल कंपनियां तैनात रहेगी. 500 कंपनियों को कानून व्यवस्था तथा 200 कंपनियों को स्ट्रांग रूम की सुरक्षा का दायित्व सौंपा गया है.
चुनाव आयोग की ओर से शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन और रोबोट जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जाने वाला है. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 500 कंपनियों मे सीआरपीएफ की 200, बीएसएफ की 150, सीआईएफ 50, आईटीबीपी की 50 और SSB की 50 कंपनियां शामिल की गई है. चुनाव आयोग को आशंका है कि मतदान के बाद राज्य में हिंसा हो सकती है. इसलिए उसे देखते हुए ही सुरक्षा रणनीति तैयार की जा रही है.
केंद्रीय बल विशेष तकनीक से युक्त होंगे. चुनाव के दौरान 2 लाख वेबकाम इस्तेमाल किए जाने वाले हैं. पिछली बार 2021 के विधानसभा चुनाव में 13 सबसे ज्यादा ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें से 90% मामले 2 मई से 5 मई के बीच हुआ था. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 5 मई 2021 को तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. तब तक कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के पास थी. चुनाव आयोग के अधिकारी हिंसा की आशंका वाले इलाकों की पहचान कर रहे हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में बलों की तैनाती की योजना बना रहे हैं.
आपको बता दें कि केंद्रीय बलों की 480 कंपनियां पहले से ही प्रदेश में मौजूद हैं. एक हफ्ते के अंदर 300 और कंपनियां यहां तैनात होने वाली है. इनमें सीआरपीएफ की 125 और बीएसएफ की 100 कंपनियां शामिल है. 10 अप्रैल 2026 तक यहां 600 और कंपनियां पहुंचने वाली है. इसके अलावा बिहार, मध्य प्रदेश और यूपी की राज्य सशस्त्र पुलिस से 300 अतिरिक्त कंपनियां आने वाली है.
