सिलीगुड़ी समेत पूरे राज्य में जिस तरह से चुनाव रिजल्ट के लिए लोग सांसे थम कर मतगणना के दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, ठीक उसी तरह से आम से लेकर खास तक, नेता से लेकर उद्योगपति तक, कारोबारी से लेकर जनता तक… सभी की एक ही जुबानी चर्चा है, एक ही बात के लिए धड़कन बढी है कि बंगाल में बीजेपी सरकार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? लेकिन अब ज्यादा इंतजार करने की जरूरत नहीं है. मुख्यमंत्री का फैसला बस कुछ ही देर में हो रहा है.
भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी जिन्होंने भवानीपुर में ममता बनर्जी को उनके ही गृह क्षेत्र में हराया है और राज्य में दो विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की है, दिल्ली रवाना हो चुके हैं. उनके साथ भाजपा नेता अग्निमित्र पाॅल भी गई है. दोनों भाजपा नेता अमित शाह के आवास पर उनसे मुलाकात करेंगे. सूत्रों ने बताया है कि इन दोनों ही नेताओं को अमित शाह ने ही अपने आवास पर बुलाया है. ममता बनर्जी को चुनाव में पटखनी देने के बाद शुभेंदु अधिकारी को राज्य का अगला मुख्यमंत्री माना जा रहा है. पर जमीनी हकीकत क्या है.
इस बीच 9 मई को राज्य में नई भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण भी होने जा रहा है. मुख्यमंत्री और अन्य भाजपा विधायकों तथा मंत्रियों का उस दिन शपथ ग्रहण होगा. यह बात भाजपा नेता शमिक भट्टाचार्य ने बताई है. नई सरकार के लिए 9 मई की तारीख इसलिए चुनी गई है, क्योंकि उस दिन रविंद्र जयंती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविंद्र नाथ टैगोर की विचारधारा के साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अपना आदर्श मानते हैं.
उनके विचार के हिसाब से ही नई सरकार के शपथ ग्रहण के लिए 9 मई का दिन निर्धारित किया गया है. रविंद्र जयंती के दिन भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण को बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक बदलाव के संगम के रूप में देखा जा रहा है. बंगाल में चुनाव प्रचार के क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार रविंद्र नाथ टैगोर को याद किया था. उन्होंने अपनी एक रैली में कहा था कि बंगाल में भय मुक्त व मस्तक ऊंचा रहने वाली सरकार, भाजपा की सरकार होगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल के लोगों से वादा किया था कि जब भाजपा की नई सरकार शपथ लेगी, तो उस शपथ ग्रहण समारोह में वह भी भाग लेंगे. इसलिए 9 मई को आयोजित होने वाली भाजपा की सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री के अलावा भाजपा के दिग्गज नेता, केंद्रीय नेता और देश में सभी भाजपा शासित, एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, आदि शामिल हो सकते हैं.
बंगाल में भाजपा सरकार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, मुख्यमंत्री के चुनाव की जिम्मेवारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमित शाह को सौंप दी है. बंगाल भाजपा विधायक दल की बैठक से पूर्व अमित शाह ने सुवेंदु अधिकारी, अग्निमित्र पॉल और दूसरे भाजपा नेताओं को दिल्ली में अपने आवास पर बुलाया है, जहां अमित शाह के साथ उनकी एक बैठक हो सकती है. इस बैठक में नई सरकार का फॉर्मूला भी सेट किया जाएगा. इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा.
वैसे जानकार मानते हैं कि अमित शाह के सबसे ज्यादा करीबी नेताओं में सुवेंदु अधिकारी ही है. अमित शाह के कहने पर ही सुबेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के अलावा भवानीपुर विधानसभा सीट से भी ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा था और इस चुनाव में 15000 से भी ज्यादा मतों के अंतर से सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को शिकस्त दी थी. सूत्रों ने बताया कि राज्य में भाजपा विधायक दल की बैठक मात्र एक औपचारिक बैठक होगी. मुख्यमंत्री का चुनाव तो दिल्ली में ही हो जाएगा.
शुभेंदु अधिकारी, अग्निमित्र पाॅल और राज्य के दूसरे शीर्ष भाजपा नेता दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं. बंगाल के साथ ही असम में नए मुख्यमंत्री के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक और उप पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है. बंगाल के लिए अमित शाह मुख्य पर्यवेक्षक जबकि उड़ीसा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी उप पर्यवेक्षक होंगे. असम के मुख्यमंत्री के चुनाव के लिए जेपी नड्डा को यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है.
सूत्रों ने बताया कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने बंगाल के अगले मुख्यमंत्री का लगभग फैसला कर लिया है. लेकिन कोई भी सार्वजनिक घोषणा से पूर्व केंद्रीय नेतृत्व राज्य के भाजपा नेताओं और विधायकों की राय लेना चाहता है, ताकि राज्य में बनने वाली भाजपा की नई सरकार नई चुनौतियों और नए बदलाव के साथ सामंजस्य स्थापित कर सके. इसके लिए सर्वसम्मति से भाजपा विधायकों में ही एक नेता का चुनाव जरूरी है.
अब देखना है कि इस कसौटी पर कौन विधायक खरा उतरता है. राजनीतिक जानकार और विश्लेषक मानते हैं कि शुभेंदु अधिकारी का पलड़ा सबसे ज्यादा भारी है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा जाता है कि वह हर बार कोई ना कोई चमत्कारिक और अविश्वसनीय फैसला कर दिखाते हैं. इसलिए जब तक नए मुख्यमंत्री की सार्वजनिक घोषणा नहीं हो जाती, तब तक कोई भी कयास लगाना या संभावना व्यक्त करना आसान नहीं है.

