पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने राज्य में स्कूल शिक्षकों के द्वारा निजी ट्यूशन बंद करने का फैसला किया गया है. सरकार के इस फैसले को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं.कुछ अभिभावकों का मानना है कि बंगाल सरकार का यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया फैसला है.
इससे बच्चों का शैक्षणिक भविष्य खराब होगा, तो वहीं सिलीगुड़ी के कुछ अभिभावक यह मानते हैं कि बंगाल सरकार का यह फैसला बच्चों के शैक्षणिक अवलंबन का मार्ग प्रशस्त करेगा. बच्चों का अध्ययन में रुचि बढ़ेगी. सेल्फ स्टडी तथा अध्ययन में एकाग्रता बढ़ेगी. इस तरह से अभिभावकों की मिली जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है. लेकिन अभिभावक सरकार के इस फैसले की टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं. उनका मानना है कि सरकार इस फैसले को लागू करने में जल्दबाजी न दिखाए.
सिलीगुड़ी में ‘सीधे शंकर’ नामक एक कार्यक्रम सिलीगुड़ी के मंत्री शंकर घोष नियमित रूप से चला रहे हैं. यह कार्यक्रम कुछ उसी तरह से है, जैसे पूर्व में सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देव टॉक टू मेयर शनिवार को करते रहे थे. शंकर घोष के इसी कार्यक्रम में सिलीगुड़ी के कई अभिभावकों ने स्कूल शिक्षकों द्वारा निजी ट्यूशन पर रोक लगाने के सरकारी फैसले पर चिंता दिखाई गई.
अभिभावकों ने कहा कि सरकार का मकसद भले ही सही हो, लेकिन बोर्ड परीक्षाओं के ठीक पहले इस तरह का फैसला छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को खतरे में डाल सकता है. उन्होंने मंत्री शंकर घोष से कहा कि सरकार इस नियम को तत्काल लागू न करके कम से कम 6 महीने का समय बच्चों को दे ताकि छात्र और अभिभावक नई व्यवस्था के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें.
सिलीगुड़ी के अभिभावकों का बयान और उनका तर्क अपनी जगह पर सही है. वर्तमान समय में बच्चे स्कूल की शिक्षा पर कम ज्यादातर ट्यूशन पर आश्रित रह गए हैं. स्कूलों में शिक्षकों के पास बच्चों पर ध्यान देने के लिए ज्यादा समय नहीं होता है. ऐसे में उनका शैक्षणिक सुधार और विकास ट्यूटर ही अच्छी तरह से कर पाते हैं. बच्चों की यह मानसिकता बन गई है. पिछले एक दशक में अध्ययन और अध्यापन की यह प्रवृत्ति बच्चों के मस्तिष्क में स्थाई रूप से अंकित हो गई है.
और जब ऐसी मानसिकता हो तो कोई भी विपरीत अथवा अचानक फैसला बच्चों को परेशान कर सकता है. इसे वे सहजता से आत्म सात नहीं कर सकते हैं. अचानक उन्हें ट्यूशन से दूर कर दिया जाए तो उनकी शैक्षिक तैयारी पर काफी फर्क पड़ेगा. वह इसे आसानी से हजम नहीं कर सकेंगे. इस स्थिति में बच्चे मानसिक रूप से कुंठित हो सकते हैं या पढ़ाई से उनका ध्यान भटक सकता है. इसलिए कोई भी संबंधित निर्णय लेने से पहले अभिभावक और बच्चों को समय देने की जरूरत है.
यही कारण है कि केवल सिलीगुड़ी में ही नहीं बल्कि बंगाल के विभिन्न जिलों और शहरों में अभिभावकों द्वारा सरकार के फैसले पर चिंता जताई जा रही है और मांग की जा रही है कि सरकार यह फैसला तुरंत लागू न करे. हाल ही में इस मामले को लेकर अभिभावकों का एक प्रतिनिधि मंडल केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री एवं बालूरघाट के सांसद सुकांत मजूमदार से मिला था. उन्होंने मांग की थी कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र के दौरान छात्रों की ट्यूशन व्यवस्था अचानक बंद ना की जाए.
अभिभावकों का तर्क है कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 6-7 महीने बीत चुके हैं. ऐसे समय में अगर चार-पांच महीना के लिए ट्यूशन बंद हो जाती है तो माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को गंभीर शैक्षणिक नुकसान हो सकता है. उनका परीक्षा फल खराब हो सकता है.अभिभावकों का यह भी कहना था कि छात्र लंबे समय से निर्धारित शिक्षकों के मार्गदर्शन में पढ़ाई कर रहे हैं. परीक्षा से पहले इस निरंतरता के टूटने से उनकी तैयारी प्रभावित होगी. अभिभावकों ने केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है. इस पूरे विषय को लेकर आपकी क्या प्रतिक्रिया है, हमें जरूर अवगत कराएं.

