18 जून से बंगाल विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है, जो काफी हंगामेदार रहने का अनुमान लगाया जा रहा है. क्योंकि इस बजट सत्र में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए गुट को भाजपा ने मान्यता दे दी है. जो भी हो, भारतीय जनता पार्टी की सरकार के लिए बंगाल का बजट काफी महत्वपूर्ण है.
अगले 1 साल के लिए भाजपा सरकार किन मुद्दों पर ज्यादा फोकस करने वाली है और उसके लिए बजट क्या होगा, यह भी पता चलेगा. इसके साथ ही नई भाजपा सरकार बंगाल के विकास और उन्नति के लिए कौन सी दिशा तय करती है, यह भी बजट सत्र में पता चल जाएगा.
20 जून को बंगाल की भाजपा सरकार बंगाल दिवस मना रही है. उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंगाल आ रहे हैं, जहां वह भाजपा नेताओं के साथ मिलकर भाजपा सरकार के अगले 1 साल के लिए बंगाल के विकास और सामाजिक सुरक्षा मुद्दे पर विचार विमर्श करेंगे. वह बंगाल बजट को लेकर आवश्यक परामर्श भी कर सकते हैं. प्रधानमंत्री बंगाल दिवस के बाद 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कोलकाता में ही मनाएंगे और बंगाल की जनता को संदेश दे सकते हैं.
सूत्र बता रहे हैं कि बंगाल की महिलाएं अन्नपूर्णा भंडार को लेकर प्रधानमंत्री से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन दे सकती हैं तथा उनकी गारंटी की बात को याद दिला सकती हैं, जब उन्होंने चुनाव में बंगाल की महिलाओं से अन्नपूर्णा भंडार योजना के तहत ₹3000 प्रत्येक महिला के खाते में ट्रांसफर करने का वायदा किया था. जो अब तक उन्हें नसीब नहीं हो सका है. 18 जून से शुरू होने वाले बजट सत्र में चर्चा के बाद 22 जून को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बंगाल सरकार का पूर्ण बजट पेश किया जाएगा.
बजट पेश करने से पहले भारतीय जनता पार्टी की सरकार विरोधी दलों के नेताओं के साथ एक बैठक करना चाहेगी. इस बैठक में सत्र की कार्यवाही और एजेंडे पर एक मिला जुला रूख तैयार किया जाएगा. चुनाव के क्रम में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने बंगाल की जनता से कई वादे किए थे.
इनमें राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता, महिलाओं के लिए मासिक भत्ता अन्नपूर्णा भंडार, युवाओं के लिए युवा शक्ति भंडार, आयुष्मान कार्ड इत्यादि विभिन्न मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार अगले 5 सालों के लिए क्या दृष्टिकोण अपनाती है, यह भी पता चल जाएगा.
सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि बजट सत्र के दौरान बंगाल सरकार कई मह्त्वपूर्ण विधेयक सामने ला सकती है. इसी बजट सत्र में यह भी पता चलेगा कि पिछली बंगाल सरकार में बंगाल का आर्थिक कोष अगले 5 सालों के आर्थिक विकास का कितना भार वहन कर सकता है.
अगर राज्य का आर्थिक हालात अनुकूल नहीं होगा तो पेश किया जाने वाला बजट राज्य की जनता की कई कल्याणकारी योजनाओं पर भी ग्रहण लगा सकता है या फिर राज्य सरकार इसके लिए धन की व्यवस्था करने के लिए बैंकों से लोन ले सकती है.

