August 13, 2026
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बंगाल में 3 लाख सरकारी कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है!

पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार के अधीन नौकरी करने वाले अस्थाई या ठेका कर्मचारियों के लिए एक बहुत ही बुरी खबर है. सूत्रों की माने तो उनकी नौकरी कभी भी जा सकती है. क्योंकि उनके पास नौकरी है. लेकिन वैध दस्तावेज नहीं है. एक शब्द में कहे तो एस आई आर लिस्ट में उनका नाम कट चुका है. अब ऐसे लोगों को नौकरी से निकाले जाने की रणनीति बनाई जा रही है.

सिलीगुड़ी में भी सिलीगुड़ी नगर निगम, पंचायत, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के दफ्तरों, आदि में काम करने वाले अस्थाई या ठेका कर्मचारी खौफ के साए में जी रहे हैं. उन्हें हर पल नौकरी में असुरक्षा और अनिश्चितता दिख रही है. घर हो या कार्यस्थल सब जगह उनके चेहरे लटके हुए हैं. कल क्या होगा, किसी को पता नहीं लेकिन अगर उनकी नौकरी चली गई तो क्या होगा! उनके बच्चों की पढ़ाई लिखाई से लेकर भरण पोषण और दैनिक क्रियाविधि कैसे चलेगी, यह सोच सोच कर वे परेशान है.

उन्हें इन मुश्किलातों से निकलने का कोई तरीका नजर नहीं आ रहा है. दरअसल ये वे लोग हैं जो अस्थाई या ठेके के स्तर पर सरकारी नौकरी कर रहे हैं. इनकी संख्या लाखों में है लेकिन कम से कम 3 लाख 30 हजार राज्य के अस्थाई तथा ठेका कर्मचारियों की नौकरी जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है. यह वे कर्मचारी हैं जिनका नाम मतदाता सूची से कट चुका है. जब एस आई आर लिस्ट में नाम ना हो तो वे राज्य के नागरिक कैसे हो सकते हैं! ऐसे में नौकरी में असुरक्षा साफ दिख रही है.

हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से इस तरह की कोई जानकारी नहीं दी गई है. पर चर्चा है कि इन सरकारी कर्मचारियों के पास ना तो कोई वैध दस्तावेज है और ना ही मतदाता पहचान पत्र. जो कागजात थे, जांच के बाद फर्जी पाए गए हैं. इन सरकारी कर्मचारियों का वेरिफिकेशन चल रहा है. ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि अगर उन्होंने वेरिफिकेशन के दौरान कोई सटीक साक्ष्य या दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया तो नियम के अनुसार सरकार उन्हें नौकरी से निकाल सकती है.

ऐसे सरकारी कर्मचारियों के पास अब कोई विकल्प नहीं बच गया है. यही कारण है कि इनके द्वारा भविष्य में आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है. पिछले कुछ दिनों से मजदूर यूनियन तथा यूनियन के प्रतिनिधियों के द्वारा एक भूमिका बनाई जा रही है. सूत्र बता रहे हैं कि यूनियन प्रतिनिधियों के द्वारा बंगाल सरकार से मांग की जाएगी कि इन अस्थाई सरकारी कर्मचारियों को उनकी नौकरी से न हटाया जए क्योंकि इससे उनका परिवार और भविष्य दोनों तबाह हो जाएगा.

सिलीगुड़ी से लेकर कोलकाता तक प्रदर्शन हो रहे हैं. यूनियन प्रतिनिधियों के द्वारा कहा जा रहा है कि अगर सरकार ने उनके मुद्दे पर सहानुभूति पूर्वक विचार नहीं किया तो संबंधित क्षेत्रों में जरूरी सरकारी सेवाएं और परियोजनाओं में भारी रुकावट आ सकती है. इस तरह से पूरे राज्य में विकास की गति प्रभावित होगी. सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार सरकार एस आई आर लिस्ट से हटाए नाम पर किसी तरह की सहानुभूति रखना नहीं चाहती है.

इस स्थिति में उनकी नौकरी जा सकती है. यूनियन के प्रतिनिधि भावी रणनीति पर विचार कर रहे हैं कि अगर ऐसा होता है तो उस समय यूनियन का रूख क्या होगा! ऐसे अस्थाई सरकारी कर्मचारियों के पक्ष में टीएमसी खड़ी हुई है. टीएमसी उनकी रोजी-रोटी को लेकर राजनीति और सहानुभूति दोनों तरह से समाज में एक वातावरण बनाना चाहती है. टीएमसी विधायक कुणाल घोष कहते हैं कि यह मुद्दा वाकई एक संवेदनशील है. उनका कहना है कि जो 3 लाख कर्मचारी सरकार की विभिन्न योजनाओं में अपनी सेवा दे रहे हैं, इसमें बेचारे का क्या दोष है. इसलिए उन्हें बिना गलती की सजा नहीं देनी चाहिए.

टीएमसी की ओर से सरकार को धमकी दी जा रही है कि अगर राज्य सरकार के इन अस्थाई व ठेका कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर खतरा उत्पन्न होता है, तो इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी. समस्या यह है कि टीएमसी के शासनकाल में इन कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थी. आरोप लगा था कि सरकार में उनकी नियुक्ति में काफी भ्रष्टाचार हुआ था. मौजूदा भाजपा सरकार ऐसे ही अस्थाई सरकारी कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है. उन्हें अपनी नौकरी बचाए रखने के लिए उचित तरीके से बंगाल की नागरिकता का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा जो संभव नहीं दिखता है

उधर मजदूर इकाई ने भी राज्य प्रशासन से निवेदन किया है कि प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी सिर्फ इस आधार पर नहीं जानी चाहिए कि वह बंगाल के नागरिक नहीं है. उनके मामले में मानवीय पक्ष भी महत्वपूर्ण है. जब तक उनकी नागरिकता साबित नहीं हो जाती है, तब तक उन्हें नौकरी से नहीं हटाया जाना चाहिए.उधर मजदूर संगठनों ने सरकार से अपील की है कि ऐसे अस्थाई कर्मचारियों के दस्तावेज संबंधी एकत्र करने की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए.

उधर भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर किसी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है. भाजपा विधायक सजल घोष कहते हैं कि यह भला कैसे हो सकता है कि इन कर्मचारियों के पास कोई कागजात नहीं हो और वे नौकरी करते रहें. उन्हें फर्जी कागजात जुटाने के लिए अधिक समय नहीं दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर उनकी नौकरी जाती है तो जाए. क्योंकि एक गैर भारतीय बंगाल में नौकरी नहीं कर सकता है. यह बीजेपी के सिद्धांत में भी नहीं है. सजल घोष ने कहा कि भले ही सरकारी काम रुक जाए, लेकिन उनका जाना ही बंगाल के हित में है.

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