अगर आप अपनी बाइक में तेल भराने जा रहे हैं और अचानक ही आपको यह पता चलता है कि पेट्रोल या डीजल की कीमत में ₹25 से लेकर 28 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो गई है, तो निश्चित रूप से आपका दिमाग घूम जाएगा.
क्या ऐसा होने वाला है? इस समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से एक खबर वायरल हो रही है कि 29 अप्रैल को बंगाल में दूसरे चरण के चुनाव के बाद डीजल और पेट्रोल की कीमत में भारी इजाफा होने वाला है. यह बढ़ोतरी ₹25 से लेकर ₹28 प्रति लीटर तक हो सकती है.
सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही यह खबर इस आधार पर है कि कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां पेट्रोल पर लगभग ₹20 प्रति लीटर और डीजल पर लगभग ₹100 प्रति लीटर का नुकसान उठा रही हैं. ऐसे में यह संभावना है कि सरकार बंगाल में चुनाव के बाद सार्वजनिक तेल कंपनियों को डीजल और पेट्रोल की मूल्य वृद्धि की अनुमति दे सकती है.
कुछ समाचार पत्रों और मीडिया चैनल पर यह खबर फैलाई जा रही है कि चुनाव के बाद डीजल और पेट्रोल की कीमत बढ़ने वाली है. वास्तव में कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटी की एक रिपोर्ट कुछ समय पहले प्रकाशित हुई थी.
इस रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि बंगाल और दूसरे राज्यों में चुनाव के बाद कच्चे तेल की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल रहने के आधार पर ₹25 से लेकर ₹28 प्रति लीटर तेल का मूल्य बढ़ाया जा सकता है. इस रिपोर्ट को सोशल मीडिया और दूसरे चैनलों ने तेल में मूल्य वृद्धि की बात स्वीकार की.
इसमें कोई शक नहीं है कि ईरान अमेरिका युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि हुई है. कच्चे तेल का भाव लगभग रोज ही नए रिकॉर्ड बना रहा है. ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां ज्यादा समय तक नुकसान नहीं उठा सकती हैं.
हालांकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पेट्रोल और डीजल के मूल्य में वृद्धि का उसका कोई इरादा नहीं है सरकार ने संकेत दिया है कि फिलहाल डीजल और पेट्रोल के खुदरा मूल्य में कोई वृद्धि नहीं होगी.
पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से स्पष्टीकरण आया है कि मीडिया चैनलों पर चलाई जा रही ऐसी खबरें भ्रामक है. सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें चलाई जा रही है कि 29 अप्रैल के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमत में ₹25 से लेकर 28 रुपए तक की बढ़ोतरी हो सकती है. इसका दावा भी किया जा रहा है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने ऐसी खबरों को निराधार बताया है.
पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है. और ना ही विचाराधीन है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया गया है.

