गृह मंत्री अमित शाह ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके यह संकेत दे दिया है कि राज्य में भाजपा सरकार बनाने जा रही है. उन्होंने कहा है कि जिस तरह की रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग हुई है, इसका साफ संकेत है कि मतदाताओं ने परिवर्तन के पक्ष में वोट दिया है.
अमित शाह ने आज उसी तरह का प्रेस कॉन्फ्रेंस किया है, जिस तरह से रिजल्ट के बाद सरकार बनाने वाला राजनीतिक दल करता है. अमित शाह ने तो यह भी संकेत दे दिया है कि बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा. अमित शाह का अंदाज कुछ ऐसा ही है जैसे कोई व्यक्ति ओवर कॉन्फिडेंस का शिकार होकर हवा में तैरता नजर आता है.
हालांकि अमित शाह का यह कैलकुलेशन 2011 के विधानसभा चुनाव पर आधारित लगता है. जब सिंगूर आंदोलन का झटका वाम मोर्चा सहन नहीं कर सका. तब उस समय परिवर्तन के लिए चुनाव हुआ था. विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक वोटिंग हुई थी. इसका प्रतिशत 84 था. 34 साल शासन करने वाला लेफ्ट हवा में उड़ गया और ममता बनर्जी की मां माटी मानुष की सरकार राज्य में बनी.
अमित शाह और पीएम मोदी को लगता है कि 2026 में भी परिवर्तन के लिए मतदान हुआ है. इसलिए मतदान का अब तक का सारा रिकॉर्ड टूटा है. पर इसमें सच्चाई कितनी है? क्या परिवर्तन के लिए रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग हुआ है?
इसको समझने की जरूरत है. पहली बार बंगाल विधानसभा का चुनाव SIR की पृष्ठभूमि में हुआ है. इसलिए मतदान का प्रतिशत बढ़ना लाजिमी था. प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में हजारों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट हटाए गए. ऐसे में मतदान का प्रतिशत तो बढना ही था.
विशेषज्ञ मानते हैं कि मतदाताओं को डर था कि अगर उन्होंने मतदान नहीं किया तो वोटर लिस्ट से उनका नाम कट सकता है. एक अन्य कारण प्रवासी लोगों का रहा, जिनका नाम SIR की वजह से वोटर लिस्ट में नहीं था. उन्होंने सोचा कि अगर उन्होंने मतदान नहीं किया तो उनका भी नाम वोटर लिस्ट से कट सकता है. पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल भी इससे सहमत हैं.
पश्चिम बंगाल हो या देश का कोई अन्य राज्य, आमतौर पर ज्यादा मतदान से परिवर्तन की उम्मीद लगाई जाती है. परंतु हर बार ऐसा नहीं होता है. वैसे पश्चिम बंगाल में चुनाव और मतदान के प्रति लोगों का विशेष रुझान रहता है. हर बार यहां मतदान का एक नया रिकॉर्ड बनता है.
1996 के विधानसभा चुनाव में 83% मतदान हुआ था जो उस समय पूरे देश के हिसाब से सर्वाधिक था. हालांकि 2001 में मतदान के प्रतिशत में थोड़ी गिरावट आई थी. यह प्रतिशत 75 था. लेकिन 2006 के बाद फिर से मतदान प्रतिशत बढ़ना शुरू हुआ और बुद्धदेव भट्टाचार्य सरकार बनने तक 80% पहुंच गया था. 2011 में 84%, 2016 में 82% और 2021 में लगभग 82%.
पहली बार अब तक के मतदान के सारे रिकॉर्ड टूटे हैं. इसको राजनीतिक दल जैसे भाजपा और टीएमसी अपने-अपने अंदाज से देख रहे हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रिकॉर्ड तोड़ मतदान को अपने पक्ष में मान रही है, तो भारतीय जनता पार्टी बदलाव की बात करती है. हालांकि राजनीतिक दलों को भी सच्चाई का पता है. पर यह उनकी रणनीति का एक हिस्सा होता है, जिसमें सच्चाई को परे रखकर एक मिथक या बाह्य आंडबर खड़ा किया जाता है.
क्योंकि 29 अप्रैल को अंतिम चरण की वोटिंग है. इसलिए मतदाताओं में भरोसा बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों के नेता इस तरह की बात करते हैं. बहरहाल रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग का पूरा सच तो 4 तारीख को ही पता चलेगा कि भाजपा के लिए नवान्न का दरवाजा खुलता है या फिर टीएमसी पहले की तरह सत्ता में बनी रहती है?

