सिलीगुड़ी, 2 जून: उत्तर बंगाल के बंद पड़े चाय बागानों को पुनर्जीवित करने तथा चाय श्रमिकों के कल्याण के लिए अब ‘असम मॉडल’ अपनाने पर सहमति बनी है। यह निर्णय सोमवार को उत्तरकन्या में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया।
बैठक में चाय उद्योग से जुड़े अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने कहा कि असम में लागू सफल श्रमिक कल्याण और न्यूनतम मजदूरी व्यवस्था का अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए टी बोर्ड की एक प्रतिनिधि टीम जल्द ही असम का दौरा करेगी और वहां की व्यवस्थाओं का विस्तृत अध्ययन करेगी।
बैठक में चाय श्रमिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से चाय श्रमिकों के लिए आवंटित 312 करोड़ रुपये की राशि को आगामी 9 महीनों के भीतर खर्च करने का सख्त निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा श्रमिकों के बकाया बोनस, भविष्य निधि (PF) और ग्रेच्युटी का भुगतान शीघ्र पूरा करने पर भी जोर दिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि श्रमिकों के लंबित वित्तीय लाभों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा।
बैठक में दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्टा ने भी श्रमिकों के बकाया भुगतान को जल्द से जल्द सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उन्होंने चाय बागानों में लागू ‘टी टूरिज्म’ नीति के प्रभावों की पुनः समीक्षा करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
इसके साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि श्रमिकों को केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने और आगामी दुर्गा पूजा से पहले बोनस भुगतान सुनिश्चित करने के लिए विशेष पहल की जाएगी।
उत्तरकन्या की इस बैठक को उत्तर बंगाल के चाय उद्योग और श्रमिक कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

