29 अप्रैल को बंगाल की 142 सीटों पर चुनाव होना है. दूसरे और अंतिम चरण का चुनाव बीजेपी और टीएमसी दोनों के लिए खासा महत्वपूर्ण है. क्योंकि 29 अप्रैल के चुनाव में जो भी दल बाजी मारेगा, सत्ता का सिंहासन उसी का होगा.
भाजपा के लिए पहले चरण का चुनाव उतना मुश्किल नहीं था, जितना कि दूसरे चरण का चुनाव कठिन है. दूसरी तरफ टीएमसी के लिए पहले चरण का चुनाव कठिन जरूर था. लेकिन अंतिम चरण का चुनाव कठिन नहीं है. क्योंकि अंतिम चरण के चुनाव उन क्षेत्रों में हो रहे हैं, जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है . मुस्लिम फैक्टर आमतौर पर ममता बनर्जी और टीएमसी के साथ रहता है.
जिन 142 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं उनमें से अधिकांश इलाके बांग्लादेश की सीमा से सटे हुए हैं. कोलकाता में भी चुनाव हो रहा है. ये सभी इलाके टीएमसी का गढ माने जाते हैं.
टीएमसी के गढ़ में भाजपा की सेंधमारी आसान नहीं है. ममता बनर्जी ने अपना किला बचाए रखने के लिए सभी तरह की तैयारी कर रखी है. बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि टीएमसी के इस मजबूत किले को किस तरह से भेद सकेगी?
इसमें कोई दो राय नहीं है कि बंगाल की गद्दी पर वही दल राज करेगा, जो अंतिम चरण के चुनाव में बादशाहत हासिल करेगा. तृणमूल कांग्रेस ने सभी 142 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, तो भारतीय जनता पार्टी 141 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.
जिन विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव होना है उनमें कोलकाता की सभी सीटें. इसके अलावा उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, नदिया, पूर्वी और पश्चिमी मेदिनीपुर जिले की सीटें हैं.
2021 के चुनाव में टीएमसी को 123 सीटों पर भारी सफलता मिली थी. बीजेपी को सिर्फ 18 सीटें मिली थी. इस बार क्या होगा? क्या बीजेपी के लिए अपनी सीटों में बढ़ोतरी करने का फार्मूला मिल गया है?
भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस पिछले 5 सालों से इन इलाकों में पसीना बहा रहे हैं. दिल्ली के ज्यादातर नेता इन्हीं क्षेत्रों में दौरा कर रहे हैं. प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने इन क्षेत्रों में कई जनसभाएं भी की है. उन्होंने घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बनाया है.
बांग्लादेश से सटे होने के कारण इन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी अत्यधिक है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार हिंदू इलाके आपसी फूट के शिकार हैं या फिर दबाव में मतदान करते हैं. जानकार मानते हैं कि उनका वोट बंट जाता है और यह टीएमसी की जीत का प्रमुख कारण होता है.
लेकिन क्या इस बार ऐसा होगा? यहां ध्रुवीकरण का बीजेपी को कितना फायदा मिलेगा और टीएमसी को कितना लाभ दिला पाएगा? राजनीतिक विशेषकों के अनुसार पहले के मुकाबले स्थिति थोड़ी बदली जरूर है. भारतीय जनता पार्टी पहले ही कह चुकी है कि बांग्लादेश से आने वाले हिंदुओं को नागरिकता दी जाएगी.
इन इलाकों में और भी बहुत से मुद्दे हैं. जैसे बेरोजगारी, गरीबी, उद्योग धंधों का नष्ट होना, नदिया जिले की अधिकांश सीटें बांग्लादेश की सीमा से लगना, यहां ज्यादातर महिलाएं लक्ष्मी भंडार जैसी राज्य सरकार की योजना का लाभ उठा रही हैं, जो उनके लिए राहत की बात है. दूसरी तरफ बीजेपी के पास भविष्य की योजना के अलावा वर्तमान में कुछ नहीं है.
राजनीतिक विशेषकों के अनुसार बीजेपी 29 अप्रैल के चुनाव में कितनी सीटें जीत पाएगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि यहां ध्रुवीकरण कितना ज्यादा है.
