कोलकाता के तिलजला में बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ रविवार को हुए विरोध प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें तीन पुलिस वाले घायल हों गए. इसके अलावा कई वाहनों को नुकसान भी पहुंचा है.पुलिस ने 20 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है. पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार बुलडोजर और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ एक्शन में है. सूत्र बता रहे हैं कि सिलीगुड़ी समेत पूरे बंगाल में बुलडोजर एक्शन शुरू हो सकता है. र
रविवार को राजू बिष्ट ने इसका संकेत दे दिया है. उन्होंने कहा था कि अवैध अतिक्रमण चाहे किसी चीज का भी हो, जैसे होटल, दुकान, मकान, कहीं भी अवैध अतिक्रमण होने पर लोग स्वयं ही तोड़ दें. अन्यथा बुलडोजर ऑपरेशन से उसका नामोनिशान मिटा दिया जाएगा. कोलकाता में कई इलाकों में ऑपरेशन बुलडोजर शुरू हो चुका है. अपनी पार्टी के बिखराव की संभावना से जूझ रही ममता बनर्जी पहली बार दमदार आवाज में कह रही है कि बंगाल में डरा कर और धमकाकर राज नहीं किया जा सकता है. उनका इशारा ऑपरेशन बुलडोजर की ओर है.
ममता बनर्जी ने कहा है कि किसी राज्य की असली प्रगति इस बात से तय होती है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है. ना कि इस बात से कि वह कितनी तेजी से लोगों को उजाड़ सकता है. ममता बनर्जी ने कहा कि हावड़ा स्टेशन इलाके में बड़े पैमाने पर चलाए गए अतिक्रमण अभियान, तिलजला और पार्क सर्कस में भडके आक्रोश तथा सड़क पर उतरते लोगों का गुस्सा यह दिखाता है कि सरकार मानवता से ज्यादा दिखावे की राजनीति में व्यस्त है.
ममता बनर्जी की आवाज भले ही दमदार हो लेकिन उनका विरोध मात्र एक औपचारिकता भर रह गया है. क्योंकि उनकी ही पार्टी के कई नेता और पूर्व मंत्री अब उनका साथ नहीं दे रहे हैं. वे विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की करारी हार से इस कदर आहत हैं कि उन्होंने हार की सारी जिम्मेवारी ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का पर डाल दी है. ऐसे लोग भाजपा में अवसर की तलाश कर रहे हैं. दूसरी तरफ बीजेपी टीएमसी से असंतुष्ट नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करने से पहले फूंक फूंक-फूंक कर कदम रख रही है.
कांग्रेस की कोख से उत्पन्न हुई थी टीएमसी. क्या TMC की कोख से एक और टीएमसी जन्म लेने वाली है? यह बात इसलिए कही जा रही है कि टीएमसी की प्रमुख ममता बनर्जी को भनक लग चुकी है कि उनकी पार्टी टूट सकती है. इसीलिए वह यह कहती है कि जिनको उनकी पार्टी से जाना है, जा सकते हैं. वह अकेला अपनी पार्टी को नए सिरे से खड़ा करेगी. लेकिन बीजेपी के आगे कभी भी घुटने नहीं टेक सकती.
जब सत्ता चली जाती है तो किसी का भी ऐसा ही हाल होता है, जो ममता बनर्जी का हो रहा है. इतिहास गवाह है कि राजनीतिक दल और राजनीतिक दलों के कई नेता समय के अनुसार पार्टी और रणनीति दोनों ही बदल लेते हैं. कुछ समय पहले टीएमसी में वही सब होता था, जैसा ममता बनर्जी कहती थी. लेकिन आज समय का चक्र कुछ ऐसा चला है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी में अलग-थलग पड़ चुकी है.
कभी ममता बनर्जी के फैसले को आंख मूंद कर समर्थन करने वाले टीएमसी के नेता अब ममता बनर्जी को आंख दिखा रहे हैं. ऐसे असंतुष्ट नेताओं को पार्टी की ओर से कारण बताओं नोटिस भेजा जा रहा है, जिसका राजनीतिक विश्लेषक यह अर्थ लगा रहे हैं कि आने वाले समय में ये नेता कभी भी पाला बदल सकते हैं. उनकी तरफ से पार्टी की बुरी हार के लिए ममता बनर्जी के साथ ही अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की मुश्किल आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है. अभिषेक बनर्जी के खिलाफ fir हो चुका है. उधर भाजपा नेताओं की ओर से मांग की जा रही है कि अगर बंगाल को भय और भ्रष्टाचार से बचाना है, तो ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करना होगा. राजनीतिक विश्लेषको के अनुसार आने वाले समय में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की मुश्किल बढ़ने वाली है. अगर अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तार किया जाता है तो निश्चित रूप से टीएमसी में एक बड़ा फाड़ हो सकता है, जिसकी कल्पना ममता बनर्जी ने भी नहीं की होगी.
