May 17, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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गर्मियों में यात्रा का प्रोग्राम बना रहे हैं तो स्पेशल ट्रेनों से यात्रा करने से बचें!

सिलीगुड़ी के राजेंद्र तिवारी चार दिनों के लिए छपरा स्थित अपने गांव एक शादी में गए थे. उनका वापसी टिकट 05634 ट्रेन में था, जो गोरखपुर से गुवाहाटी नारंगी तक जाती है. छपरा में ट्रेन का समय रात्रि 8:20 पर था. जिस दिन उन्हें ट्रेन पकड़ने के लिए छपरा जाना था, सुबह लगभग 10:00 बजे उनके मोबाइल पर आईआरटीसी का एक मैसेज आया, जिसमें बताया गया कि उक्त ट्रेन 5 घंटे विलंब से चल रही है.

दोपहर बाद एक और मैसेज आया जिसमें सूचित किया गया कि उक्त ट्रेन 10 घंटे विलंब से चलने वाली है. राजेंद्र तिवारी परेशान हो गए. उन्होंने पता किया तो डाउन ट्रेन 12 घंटे विलंब से चल रही थी, जो गोरखपुर पहुंची तक नहीं थी. यही ट्रेन गोरखपुर से डाउन बनकर नारंगी जाती है. यह एक साप्ताहिक ट्रेन है, जो समर स्पेशल के नाम से जानी जाती है.

राजेंद्र तिवारी अगली सुबह छपरा स्टेशन पहुंचे तो पता चला कि ट्रेन गोरखपुर से रवाना तो हो चुकी है, लेकिन रास्ते में ही चार घंटे और विलंब हो गई है. यह ट्रेन दोपहर लगभग 1:00 बजे 15 घंटे विलंब से छपरा पहुंची. कटिहार तक आते-आते ट्रेन 22 घंटे देरी से चल रही थी. ट्रेन के यात्री परेशान हो गए. कभी इंजन में खराबी तो कभी प्लेटफॉर्म क्लियर होने और सिग्नल की समस्या. कभी ट्रैक मेंटेनेंस की समस्या तो कभी कुछ और कर्म से ट्रेन विलंब होती गई

राजेंद्र तिवारी ने बताया कि साधारण पैसेंजर ट्रेन का सिग्नल तुरंत मिल जाता था. लेकिन स्पेशल ट्रेन का सिग्नल सबसे आखिर में दिया जाता था. एक तो ट्रेन विलंब से चल रही थी. ऊपर से स्टेशन मास्टर भी लापरवाही करते थे. राजेंद्र तिवारी ने बताया कि जब वह एनजेपी पहुंचे तो उनकी जान में जान आई. उन्होंने कसम खाई कि भविष्य में स्पेशल ट्रेनों से दूर की यात्रा नहीं करेंगे. जानकारों के अनुसार स्पेशल ट्रेनों के विलंब होने का एक बड़ा कारण नियमित और स्थाई ट्रेनों को परिचालन में प्राथमिकता देना है. ऐसे में स्पेशल ट्रेन विलंब होती जाती है.

अगर आप भी गर्मियों में ट्रेन से कहीं बाहर जाने का कार्यक्रम बना रहे हैं तो सावधान हो जाएं! स्पेशल ट्रेनों से लंबी दूरी की यात्रा भूलकर भी ना करें. गर्मियों में रेलवे के द्वारा अतिरिक्त भीड़ भाड़ को प्रबंधित करने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जाती हैं, जिसका नंबर आमतौर पर जीरो से शुरू होता है. एक तो स्पेशल ट्रेनों का किराया नियमित ट्रेनों के किराए के मुकाबले ज्यादा होता है. ऊपर से स्पेशल ट्रेन कभी भी निर्धारित समय पर नहीं पहुंचती. सूत्र बताते हैं कि सामान्यतः स्पेशल ट्रेन यात्रियों को सांत्वना देने के लिए चलाई जाती है. यह कभी भी निर्धारित समय पर गंतव्य पर नहीं पहुंचती है.

इस समय देशभर में दर्जनों स्पेशल ट्रेने चलाई जा रही हैं. ऐसी ट्रेनों में कंफर्म टिकट तो मिल जाता है, लेकिन सफर काफी कष्टदायक सिद्ध होता है. अगर आप कहीं बाहर जाने के लिए ट्रेन टिकट बुक कर रहे हैं तो स्पेशल ट्रेनों के चक्कर में ना पड़े और केवल नियमित ट्रेनों पर भरोसा करें. भले ही आपकी यात्रा विलंब से शुरू हो, लेकिन यह दुरुस्त होगी. पूर्वोत्तर रेलवे के द्वारा नारंगी से गोरखपुर के बीच 05634 नामक स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है, जो 3 अप्रैल से चल रही है और 29 मई तक चलेगी.

लेकिन इस ट्रेन से यात्रा करने वाले मुसाफिर से पूछिए तो वह वही बताएंगे कि ना बाबा, अब स्पेशल ट्रेन खासकर 0563 4 से बोलकर भी यात्रा नहीं करेंगे. उक्त ट्रेन के रखरखाव, प्रबंधन और परिचालन से संबंधित पहले भी रेल मंत्री को शिकायत भेजी जा चुकी है. कदाचित रेलवे को भी पता है. लेकिन 29 मई के बाद इस ट्रेन की सेवा समाप्त हो जाएगी. शायद यही कारण है कि पूर्वोत्तर रेलवे और रेल विभाग भी यात्रियों की शिकायत को दरकिनार कर रहा है.

इस समय देशभर में चल रही सभी स्पेशल ट्रेनों का यही हाल है. इन स्पेशल ट्रेनों में कंफर्म टिकट तो मिल जाएगा, लेकिन आपकी यात्रा कष्टदायक बन सकती है. समय पर गंतव्य स्थल पर पहुंचना शायद ही संभव हो. जिस ट्रेन का नंबर जीरो से शुरू होता है वह आमतौर पर स्पेशल ट्रेन के अंतर्गत रखी जाती है. ऐसे में ट्रेन का टिकट बुक करते समय सावधानी बरतें और नियमित तथा स्थाई ट्रेनों पर ही भरोसा करें.

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