सभी DC को तीन दिनों के भीतर सार्वजनिक सूचना जारी कर नागरिकों से शिकायतें दर्ज करने का दिया निर्देश, 9 जून को होगी अगली सुनवाई।
सिक्किम उच्च न्यायालय ने सिक्किम सरकार द्वारा पूरे राज्य में लागू किए गए ‘ऑड-ईवन’ वाहन नियम को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। मुख्य न्यायाधीश ए. मुहमद मुस्ताक और न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान की खंडपीठ ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और सभी जिलों के जिलाधिकारियों को जनहित में निर्देश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता महेश राई और अन्य द्वारा दायर इस मामले में कोर्ट अब आगामी 9 जून, 2026 को अगली सुनवाई करेगा, जिसमें सरकार और प्रशासन को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी । यह पूरा विवाद राज्य सरकार के उस हालिया फैसले के बाद शुरू हुआ, जिसके तहत पहले केवल गंगटोक शहर तक सीमित ‘ऑड-ईवन’ प्रतिबंधों को अब राज्य के सभी जिलों में विस्तारित कर दिया गया है । याचिका में राज्य सरकार द्वारा पूरे सिक्किम में लागू की गई ओड-ईवन व्यवस्था को चुनौती दी गई है, जिसके तहत टैक्सियों और दोपहिया वाहनों को छोड़कर अन्य वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एन. राई , अभिनव कांत झा और प्रीति बस्नेत ने दलील दी कि इस व्यापक पाबंदी से नागरिकों की स्वतंत्र आवाजाही प्रभावित हो रही है और आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है । सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त महाधिवक्ता जांगपो शेरपा, सरकारी अधिवक्ता एस.के. क्षेत्री और थिनले दोरजी भूटिया ने याचिकाकर्ता की नीयत (Bona fide) पर सीधे सवाल उठाए । सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी है और वह वास्तविक जनहित के बजाय केवल बड़े पैमाने पर सार्वजनिक ध्यान आकर्षित करने के लिए इस कानूनी मंच का दुरुपयोग कर रहा है । हालांकि, हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस चरण में याचिकाकर्ता की मंशा पर संदेह करने से साफ इनकार कर दिया । मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अदालत के सामने इस वक्त सबसे प्राथमिक और महत्वपूर्ण सवाल ‘ऑड-ईवन’ नियम के कारण आम जनता को होने वाली व्यावहारिक परेशानियां हैं, जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिया है कि वे सरकारी रिकॉर्ड पर यह प्रस्तुत करें कि नागरिकों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) के क्या वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं । इसके साथ ही, अदालत ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को आदेश दिया है कि वे इस निर्देश की प्राप्ति के तीन दिनों के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों में सार्वजनिक नोटिस जारी करें । इस नोटिस के जरिए आम जनता से इस ओड-इवन वाहन प्रतिबंध के कारण हो रही समस्याओं और शिकायतों को दर्ज किया जाएगा, जिसे संकलित कर जिलाधिकारियों को अगली सुनवाई से पहले अदालत के समक्ष पेश करना होगा । मामले की अगली सुनवाई 9 जून 2026 को निर्धारित की गई है, जब अदालत राज्य सरकार और जिला प्रशासन से प्राप्त रिपोर्टों पर विचार करेगी।

