August 19, 2026
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IPS जयरामन के सिलीगुड़ी आते ही SMC से लेकर SJDA तक हड़कंप!

इधर आईपीएस के जय रामन सिलीगुड़ी पहुंचे, उधर सिलीगुड़ी नगर निगम से लेकर सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण तक हड़कंप मच गया. चाहे एसएमसी हो या एसजेडीए, उन पूर्व अधिकारियों के पैरों तले की धरती खिसकती सी महसूस हो रही है, जिन पर कथित रूप से भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप लगे हैं. आईपीएस के जय रामन सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण और एसएमसी में कथित 200 करोड रुपए के घोटाले की जांच के लिए गठित आयोग के सदस्य हैं.

के जय रामण बाल की खाल निकालने वाले अधिकारियों की श्रेणी में आते हैं. कभी वे सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर हुआ करते थे. उन्हीं के कार्यकाल में 2012 13 के वित्तीय वर्ष में सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण में लगभग 200 करोड रुपए का घोटाला सामने आया था. इसी घोटाले की जांच करते हुए के जय रामन ने एक बड़े अधिकारी को गिरफ्तार किया था. हालांकि बाद में उनकी इस ईमानदारी की सजा उनके करियर को तबाह करने के रूप में भी सामने आई थी.

जब तक के जय रामन सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर थे, तब उनकी तूती बोलती थी. लेकिन जब उन्होंने अपने कर्तव्य और न्याय के पथ पर चलते हुए कानून एवं व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रयास में एक बड़े अधिकारी पर ही हाथ मारा, तब तत्कालीन टीएमसी की सरकार ने उनका ऐसी जगह तबादला करा दिया जिसके बाद उनका भविष्य अंधेरे में वजूद की तलाश के लिए मजबूर हो गया. लेकिन कहते हैं ना कि राख के नीचे भी चिंगारी छिपी रहती है.

राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने के जयरामन को अभय दान दे दिया है. जय रामन उनके द्वारा गठित जांच आयोग के सदस्य हैं. मुख्यमंत्री को विश्वास है कि के जयरामन के नेतृत्व में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. क्योंकि यह घटनाक्रम उनके कार्यकाल में ही हुआ था, इसलिए उन्हें अच्छी तरह पता है कि घोटाले और अनियमितता के खेल में कौन-कौन लोग शामिल थे. यही कारण है कि वे सभी डर गए हैं और अपना दामन साफ करने के फेर में लग गए हैं.

के जय रामन ने सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण के साथ-साथ सिलीगुड़ी नगर निगम में पूर्व में हुई अनियमितता की जांच का कार्य शुरू कर दिया है. सोमवार को उन्होंने सिलीगुड़ी नगर निगम और सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ एक मैराथन बैठक की है. इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस शासित बोर्ड की गतिविधियों और विभिन्न योजनाओं में हुई कथित अनियमिताओं पर विस्तार से मंथन शुरू कर दिया गया है. सूत्र बताते हैं कि सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण के कई अधिकारी, अभियंता, योजना प्रभारी और इस तरह से तत्कालीन टीएमसी के कुछ बड़े नेताओं पर गाज गिर सकती है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 से 2025 के बीच सिलीगुड़ी नगर निगम में कचरा निस्तारण विभाग के लिए कागजों में लगभग 60 गाड़ियों की खरीद की गई थी. इन गाड़ियों की खरीद पर पानी की तरह पैसा बहाया गया था. रिपोर्ट के अनुसार एक गाड़ी पर लगभग 13 लाख रुपए से अधिक खर्च किए गए थे. जबकि उस समय के बाजार के अनुसार गाड़ी की बाजार कीमत 3.50 से 4 लाख रुपए के बीच थी. सूत्र बताते हैं कि सिलीगुड़ी नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज गाड़ियों की वास्तविक संख्या तथा उनकी खरीद पर हुए खर्च का मिलान किया जाएगा और इसकी निष्पक्ष जांच की जा सकती है.

भाजपा के अमित जैन ने इस तरह के कई आरोप लगाए हैं. उसकी भी जांच की जाएगी. हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है कि गाड़ियों की खरीद, उनकी वास्तविक संख्या, भुगतान और बाजार कीमत के बीच अंतर को लेकर उठे विवाद की जांच के जय रामन करेंगे या फिर इसके लिए अलग आयोग गठित होगा. लेकिन संभावना है कि SJDA में 200 करोड़ के घोटाले की जांच के लिए गठित आयोग ही इसकी जांच कर सकता है.

सूत्रों ने बताया के जय रामन की निगरानी में कथित 200 करोड रुपए के घोटाले की पुरानी फाइलों को खोला जा रहा है. उसकी कड़ियों को जोड़ने के लिए तृणमूल कांग्रेस शासित बोर्ड के पार्षदों की फाइलों के साथ-साथ उनकी जन्म कुंडली भी खोली जा रही है. इनमें खासकर वे पूर्व पार्षद और टीएमसी के नेता शामिल हैं जिनके खिलाफ सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के विभिन्न थानों में FIR दर्ज हुए थी. राज्य में सत्ता बदलाव के बाद अधिकारियों और सिलीगुडी के कुछ पूर्व पार्षदों के खिलाफ कुछ नयी शिकायतें भी सामने आई हैं. उन शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है.

जांच आयोग के सदस्यों ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि 200 करोड रुपए के घोटाले की जांच में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. के जय रामन ने जांच का जिम्मा अपने हाथ में लिया है. नयी शिकायतों का भी उन्हें इंतजार है. किसी बड़ी मछली को फंसाने के लिए जिस तरह से चारे का महत्व होता है, उसी तरह से आईपीएस के जय रामन ने लक्ष्य पर पहुंचने के लिए हर छोटी-छोटी बातों को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है. क्योंकि जांच के बिंदुओं को शीर्ष पर पहुंचाने के लिए कड़ियों से होकर ही गुजरना पड़ता है और यही छोटी-छोटी कड़ियां ही घोटाले की जांच की परतों को खोलने के लिए काफी होगी.

सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण के घोटाले की जांच सिलीगुड़ी नगर निगम में पूर्व में हुई अनियमिता की जांच के बगैर अधूरी होगी. यही कारण है कि TMC शासित बोर्ड के कुछ पार्षदों और अधिकारियों को इस कड़ी में निशाने पर लिया गया है. कुछ समय पहले सिलीगुड़ी नगर निगम के तीन नंबर वार्ड के पूर्व पार्षद राम भजन महतो के खिलाफ आवास योजना में घोटाले का आरोप लगा था और उनके खिलाफ प्रधान नगर थाने में एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी. इसलिए उनके निशाने पर राम भजन महतो जैसे और भी कई पार्षद हो सकते हैं.

सूत्रों ने बताया कि इस बार किसी भी तरह की चूक नहीं की जाएगी और कानून एवं व्यवस्था के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. दोषी व्यक्तियों को किसी भी तरह बख्शा नहीं जाएगा. आपको बता दें कि सिलीगुड़ी नगर निगम के तृणमूल बोर्ड पर बिल्डिंग प्लान समेत अन्य सरकारी योजनाओं में अनियमितता के आरोप लगे थे. इनमें कचरा संग्रह और अपशिष्ट निस्तारण योजना में भी अनियमितता सामने आई थी. इन सभी की जांच की जाएगी. सिलीगुड़ी के विधायक और मंत्री डॉ शंकर घोष ने आईपीएस जय रामन से मुलाकात की है और उन्हें हर संभव सहयोग और सहायता का आश्वासन दिया है.बहरहाल देखना होगा कि के जय रामन की जांच की गाज किन-किन नेताओं तथा अधिकारियों पर गिरती है.

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