October 1, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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कहीं झंकार मोड़ फ्लाईओवर शोकेस की वस्तु बनकर न रह जाए! फ्लाईओवर का उपयोग करने से क्यों बचना चाहते हैं वाहन चालक?

सिलीगुड़ी के वर्धमान रोड पर जिस लक्ष्य को लेकर लगभग एक दशक पहले प्रशासन ने फ्लाईओवर का निर्माण कराया था, उसमें सरकार को शत-प्रतिशत सफलता मिलती नहीं दिख रही है. बर्दवान रोड फ्लाईओवर का लोकार्पण हुए 2 महीने से ज्यादा समय हो गया, लेकिन देखा जा रहा है कि आज भी दूरगामी यात्री बसें फ्लाईओवर के नीचे से ही जाती हैं. निजी वाहन, एंबुलेंस इत्यादि को छोड़कर छोटी बड़ी अधिकतर यात्री गाड़ियां फ्लाईओवर के नीचे से ही गुजर रही हैं.

झंकार मोड और आसपास के स्थानीय लोग बताते हैं कि शाम के समय तो फ्लाईओवर पर जैसे सन्नाटा पसर जाता है. छोटे बड़े सभी वाहनों के नीचे से गुजरने के कारण कभी-कभी झंकार मोड पर जाम लग जाता है. ऐसे में लोग सवाल कर रहे हैं कि जब यात्री वाहनों को वर्धमान रोड से ही गुजरना है, तो फिर फ्लाईओवर का निर्माण क्यों किया गया? यहां के लोगों ने बताया कि टोटो ऑटो की तो बात ही छोड़िए, अधिकतर बाइक या स्कूटर चालक भी नीचे से ही गुजरते हैं.

लगभग एक किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर वर्धमान रोड पर विशाल मेगा मार्ट के सामने से शुरू होता है और एयर व्यू मोड पर समाप्त होता है. फ्लाईओवर पर दिन में वाहनों की आवाजाही सामान्य से कम है. इसके बावजूद एयरव्यू मोड़ पर जाम लगते देखा गया है. लेकिन शाम के समय सिलीगुड़ी जंक्शन स्थित तेंजिंग नोर्गे बस स्टैंड से जलपाईगुड़ी, कूचबिहार ,अलीपुरद्वार आदि की ओर जाने वाली दूरगामी बसें या अन्य यात्री वाहन बर्दवान रोड फ्लाईओवर का कम ही उपयोग करते हैं.

यहां के लोगों का कहना है कि बस वाले यात्री उठाने के चक्कर में हावड़ा पैट्रोल पंप, झंकार मोड और जगह-जगह बस रोक कर सवारी उठाते हैं. जबकि फ्लाईओवर से जाने से उन्हें बीच में सवारी उठाने का मौका नहीं मिलेगा. हालांकि सच्चाई तो यह भी है कि फ्लाईओवर पर जाने के लिए नीचे से सीढी भी बनाई गई है, जो रेल ओवर ब्रिज के पास है. लेकिन अधिकतर लोगों को इसके बारे में पता नहीं है. अगर यात्री सीढी का प्रयोग करते हुए फ्लाईओवर पर यात्री बस का इंतजार करें तो झंकार मोड़ के पास शाम के समय लगने वाले जाम से छुटकारा मिल सकता है.

कई लोगों का यह भी कहना है कि फ्लाईओवर का निर्माण तो हो गया. फ्लाईओवर को चालू भी कर दिया गया. लेकिन उसका रखरखाव और प्रबंधन सुचारू रूप से नहीं हो रहा है. यात्री वाहनों को फ्लाईओवर से जाने के लिए ट्रैफिक पुलिस भी प्रोत्साहित नहीं कर रही है. जहां तक बाइक सवार या स्कूटर सवार की बात है तो उन्हें लगता है कि फ्लाईओवर से जाने से गाड़ी में तेल कुछ ज्यादा ही खर्च होगा. टोटो और सिटी ऑटो की तो बात ही अलग है. ये सभी छोटे वाहन तो नीचे से ही गुजरते हैं.

सवाल यह है कि आखिर ज्यादातर वाहन चालक फ्लाईओवर का इस्तेमाल क्यों नहीं करना चाहते? क्या वाहन चालकों को फ्लाईओवर का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता? आखिर प्रशासन खामोश क्यों है? फ्लाईओवर कोई शोकेस की वस्तु तो नहीं है. यातायात विभाग किस समय का इंतजार कर रहा है? सिलीगुड़ी प्रशासन को चाहिए कि जिस तरह से महावीर स्थान फ्लाईओवर का उपयोग करना वाहन चालकों को अनिवार्य किया गया है, ठीक उसी तरह की सख्ती और प्रशासनिक फरमान वर्धमान रोड फ्लाईओवर के लिए भी आवश्यक है. तभी वर्धमान रोड पर जाम से छुटकारा मिलेगा!

पूजा से पहले प्रशासन को इस दिशा में ठोस पहल करने की जरूरत है. बता दें कि पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के शासनकाल में वर्धमान रोड पर फ्लाईओवर की आधारशिला रखी गई थी. प्रशासनिक अड़चनों और काम की धीमी गति के कारण निर्माण कार्य में देरी हुई और काफी लंबा समय लग गया.

सिलीगुड़ी नगर निगम के पूर्व मेयर गौतम देव चाहते थे कि चुनाव से पहले ही फ्लाईओवर निर्माण कार्य पूर्ण हो जाए ताकि उसे जनता के लिए खोला जा सके. वह चाहते थे कि अगर विधानसभा चुनाव से पहले फ्लाईओवर को लोकार्पण कर दिया जाता है तो सिलीगुड़ी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को इसका काफी लाभ मिलेगा. लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी. चुनाव हुए और चुनाव में पूरे राज्य से ही टीएमसी का सफाया हो गया. सिलीगुड़ी नगर निगम प्रशासन भी नहीं बच पाया.

विधानसभा चुनाव के उपरांत नई सरकार ने वर्धमान रोड फ्लाईओवर का लोकार्पण किया. उम्मीद की जा रही थी कि बर्दवान रोड पर जाम से छुटकारा मिलेगा. जिस समय इस फ्लाईओवर की आधारशिला रखी गई थी, उस समय वर्धमान रोड पर संतोषी नगर मोड से लेकर झंकार मोड और एयरव्यू मोड तक गाड़ियों का लंबा जाम आए दिन लगता था. इसे देखते हुए तत्कालीन ममता बनर्जी की सरकार ने सिलीगुड़ी नगर निगम के यहां फ्लाईओवर निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दी और यहां निर्माण प्रक्रिया शुरू हुई.

2017-18 वित्तीय वर्ष में ओवरब्रिज परियोजना को मंजूरी मिली और 2018 में इसका काम शुरू हुआ था. शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत लगभग 44.85 करोड़ थी, जो कॉविड-19 महामारी और अन्य कारणों से हुई देरी के बाद इसका बजट बढ़कर 68.75 करोड़ से 70 करोड़ हो गया. निर्माण में देरी और लागत में भारी निवेश के बाद लगभग 9 सालों के बाद 28 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने फ्लाईओवर का उद्घाटन किया.

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