October 8, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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जब सब कुछ ठीक है तो दोबारा फॉर्म भरने की जरूरत क्यों? मतदाता सूची से छूटे नाम कैसे जुड़ेंगे, सिलीगुड़ी के Voters हैं परेशान!

यह कैसी विडंबना है कि एक तरफ पूरे पश्चिम बंगाल में SIR 26 के दौरान मतदाता सूची से वंचित रहे नाम को जुड़वाने के लिए चुनाव आयोग ने पहल की है, तो दूसरी तरफ उसी चुनाव आयोग से कई मतदाता यह सवाल कर रहे हैं कि जब उनके सारे दस्तावेज जैसे पैन कार्ड, पहचान पत्र, आधार कार्ड, SIR 2002 में माता-पिता के नाम, सब कुछ सही है और स्थानीय BLO के द्वारा अनुमोदित भी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम मतदाता सूची तालिका में नहीं है, तो यह किसकी गलती है? अगर गलती अधिकारियों की है तो वे इसका खामियाजा क्यों भुगते? वे सरकार और चुनाव आयोग से सवाल कर रहे हैं कि दोबारा फॉर्म क्यों भरें?

राज्य मतदाता सूची से वंचित ऐसे मतदाताओं के सवाल का जवाब बीएलओ के पास भी नहीं है. यह कम हैरानी की बात नहीं है कि राज्य में मतदाता सूची में नाम दर्ज करवाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. लेकिन अब तक इस संबंध में राज्य के बीएलओ को अवगत तक नहीं कराया कि उनकी जिम्मेदारियां क्या है! उन्हें ऐसे मतदाताओं को किस तरह सहयोग करना है, जिनके सारे कागजात ओके हैं और खुद उनके दस्तावेजों को प्राथमिक स्तर पर उनके द्वारा approved भी किया गया था. उनकी खुद भी समझ में नहीं आ रहा है आखिर मतदाता सूची से उनके नाम क्यों गायब किए गए अब या तो BLO झूठ बोल रहा है या फिर BLO के पास अब तक चुनाव अधिकारी का फरमानी लेटर नहीं आया है.

आपको बता दें कि सिलीगुड़ी समेत राज्य के के अनेक ऐसे मतदाता हैं, जिनके सारे कागजात चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार दुरुस्त हैं, जैसे 2002 SIR में नाम, पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, माता-पिता के नाम इत्यादि सब कुछ ठीक हैं. लेकिन फिर भी उनका नाम एस आई आर 2026 मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया. ऐसे में वे सवाल कर रहे हैं कि आखिर जब उनके सारे कागजात सही है तो फिर उनका नाम मतदाता सूची से बाहर क्यों किया गया? उनका यह भी सवाल है कि आखिर वह दोबारा फार्म क्यों भरें?

यह वॉइस क्लिप खबर समय के किसी दर्शक की है, जो चुनाव प्रक्रिया को आसान बनाने वाले और इस प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाले बीएलओ की सच्चाई को भी सामने लाती है. मतदाता सीधे BLO से जुड़ा होता है. लेकिन जब बीएलओ को ही पता नहीं है, तो वह मतदाता का क्या मार्गदर्शन कर सकेगा! ऐसे में सवाल है कि आखिर योग्य मतदाता क्या करें? किसके पास जाए? उनकी फरियाद कौन सुने? ये कुछ ज्वलंत सवाल हैं.

मालूम हो कि पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान कथित रूप से अनेक योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए थे. उदाहरण के लिए आप इस मतदाता को ही देख लीजिए. नीलम अग्रवाल का यह पहचान पत्र एक प्रमाण है. यह दर्शाता है कि उनके पास पैन कार्ड, आधार कार्ड, SIR 2002 लिस्ट में भी उनके माता-पिता के नाम सब कुछ सही है. लेकिन इसके बावजूद 2026 की मतदाता सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया.

केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में और खासकर उन राज्यों में जहां SIR हुआ था और इस दौरान अनेक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए थे, जब कोर्ट ने उनके कागजातों को सही पाया तो फिर ERO ने मतदाता सूची से उनके नाम क्यों हटाए? कोर्ट भी पूर्व में इस पर टिप्पणी कर चुका है. हालांकि सभी को अब एक बार फिर से मौका मिला है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया के दौरान सिलीगुड़ी के हजारों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए थे. तब से मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया है. आखिरकार कोर्ट में उनकी जीत हुई.

बहुत से मतदाता असमंजस में है कि जब उनका सब कुछ सही है. तो फिर इसी के लिए उन्हें दोबारा फॉर्म भरने की जरूरत क्यों है? क्या चुनाव आयोग अथवा सरकार उनकी समस्या का समाधान कर सकेगी? आपको बताते चलें कि पश्चिम बंगाल समेत देश के विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. कई मतदाता तो ऐसे भी है जो एस आई आर 2026 के दौरान अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए गए थे. अब वह दोबारा लौट आए हैं और फिर से मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज होते देखना चाहते हैं.

लेकिन बीएलओ का सच भी देखकर आप हैरान हो जाएंगे. खबर समय को किसी दर्शक की ओर से जानकारी मिली है कि उसने सिलीगुड़ी के एक समाचार पत्र में खबर देखने के बाद अपने इलाके के बीएलओ को फोन किया और मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए सहयोग करने के लिए कहा. BLO ने बताया कि समाचार पत्रों में उन्होंने भी देखा है. लेकिन उनके पास इस तरह की कोई अधिकृत सूचना नहीं है. ऐसे में वह उनकी क्या मदद कर सकते हैं!

जरा सोचिए! चुनाव आयोग ने इस संदर्भ में अधिसूचना भी जारी कर दी है. लेकिन इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पायदान BLO होता है, जिसे पता तक नहीं है कि चुनाव आयोग ने उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी दी है. अगर BLO सच बोल रहा है तो चुनाव आयोग की लापरवाही झलकती है. सवाल यह है कि चुनाव आयोग ने अधिसूचना जारी करने के बाद बूथ लेवल अधिकारी को लेटर क्यों नहीं दिया? या क्या BLO झूठ बोल रहा है? अब इनमें कौन सच्चा और कौन झूठा है, कम से कम मतदाता को तो इससे कोई लेना-देना नहीं है.

पश्चिम बंगाल मतदाता सूची से वंचित मतदाताओं को इस विवाद या बहस में पड़ने की जरूरत भी नहीं है. उन्हें तो बस इस बात की चिंता है कि किसी तरह उनका नाम मतदाता सूची में जुड़ जाए. हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी लड़ाई लड़ने के बाद अब उन्हें एक मौका मिला है और वे इस मौके को हाथ से गवाना नहीं चाहते हैं. यही कारण है कि सिलीगुड़ी और आसपास के क्षेत्रों के अनेक मतदाता, जिनका नाम एस आई आर के दौरान मतदाता सूची से वंचित रह गए थे, वे अपने इलाके के बीएलओ को फोन कर रहे हैं. लेकिन बीएलओ की तरफ से उन्हें कोई सहयोग नहीं मिल रहा है.

ऐसे में सवाल है कि आखिर मतदाता क्या करे. आप किस तरह से पश्चिम बंगाल मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकते हैं, खबर समय के द्वारा आपको महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है. अगर आपके इलाके का BLO आपको सहयोग नहीं कर रहा है तो चिंता करने की बात नहीं है. आप इस प्रक्रिया को ऑनलाइन शुरू कर सकते हैं.SIR के दौरान ASDD कैटेगरी में दर्ज वोटरों की लिस्ट ऑनलाइन कर दी गई है. आपको फॉर्म 6 लेने के लिए BLO के पास जाने की भी जरूरत नहीं है.

अगर आपके इलाके का बीएलओ सहयोग नहीं कर रहा है तो आप किसी साइबर कैफे या ऑनलाइन एजेंसी से दोबारा ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. चुनाव आयोग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ASDD वोटरों की लिस्ट मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध है.यह संबंधित जिलों के निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर दिए गए लिंक से भी देखी जा सकती है. अगर किसी योग्य मतदाता का नाम सूची में नहीं है तो वह फॉर्म सिक्स के जरिए नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है. नए वोटर भी फॉर्म सिक्स के जरिए अपना नाम जुड़वा सकते हैं या नए पहचान पत्र बनवा सकते हैं.

राज्य चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार राज्य चुनाव आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों को खास निर्देश दिए हैं. आपके इलाके का बीएलओ SIR से पहले और बाद की मतदाता सूची की तुलना करेंगे. इसके आधार पर योग्य मतदाताओं की पहचान की जाएगी. इसके बाद बीएलओ या कोई भी सरकारी अधिकारी पहचाने गए मतदाताओं के घर जाएंगे. वहां उनकी वोटर स्टेटस की जांच की जाएगी. तत्पश्चात फॉर्म सिक्स भरने में उनकी मदद की जाएगी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य चुनाव आयोग ने प्रत्येक बीएलओ को प्रत्येक हफ्ते कम से कम 20 से 25 घरों का दौरा करने को कहा है. यह पूरी प्रक्रिया एक महीने तक चलेगी.

बूथ लेवल अधिकारी के द्वारा तैयार की गई सूची को BLA के पास पहुंचाया जाएगा. BLA नाम का वेरिफिकेशन करेंगे. उसके पश्चात चुनाव अधिकारी तक यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. ERO की हरी झंडी मिलने के बाद ही आपका नाम मतदाता सूची में जोड़ दिया जाएगा. हालांकि मिल रही जानकारी के अनुसार जल्द ही राज्य चुनाव आयोग वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए सिलीगुड़ी समेत राज्य के विभिन्न स्थानों पर विशेष कैंप लगा सकता है.

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