सिलीगुड़ी समेत पूरे राज्य में चल रही है 2026 राज्य मतदाता सूची से वंचित रह गए मतदाताओं के नाम को पुन: जोड़ने की प्रक्रिया. इसके लिए पात्र उम्मीदवारों से फॉर्म 6 भरने को कहा जा रहा है, ताकि उनका नाम आवेदन की जांच परख के बाद फिर से राज्य मतदाता सूची में दर्ज किया जा सके. यह प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से शुरू की गई है.
जब से यह प्रक्रिया शुरू की गई है और आवेदकों से फॉर्म 6 भरने के लिए कहा गया है, तभी से सिलीगुड़ी ही नहीं बल्कि राज्य के कोने-कोने से ऐसे अनेक लोग भ्रमित और असमंजस में है और यह सवाल उठा रहे हैं कि जब उनके सारे दस्तावेज सही हैं और उन सभी दस्तावेजों की जांच के बाद उनका नाम राज्य मतदाता सूची में दर्ज किया गया था, फिर राज्य में एस आई आर 2026 के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से क्यों काटा गया? अब वे किस बात के लिए पुनः फॉर्म भरें? जब उनकी कोई गलती ही नहीं तो सजा क्यों?
हमारे खबर समय को चुनाव अधिकारियों से ‘पीड़ित’ ऐसे अनेक परिवारों ने बताया कि उनके परिवार के कुछ सदस्यों के नाम एक ही दस्तावेज के आधार पर 2026 की राज्य मतदाता सूची में दर्ज है. लेकिन कुछ सदस्यों के नाम उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए. आखिर ऐसा क्यों हुआ? उनका यह भी सवाल है कि जब दोबारा छूट गए सदस्य का नाम राज्य मतदाता सूची में दर्ज करने के लिए आवेदन करेंगे तो दस्तावेज तो वही होंगे. ऐसे में उन्हें क्या फिर से आवेदन करने की आवश्यकता है? वे समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए? जब खुद BLO भी समझ नहीं पा रहे हैं, तो उन्हें भला क्या समझा पाएंगे?
यह कैसी विडंबना है कि एक तरफ पूरे पश्चिम बंगाल में SIR 26 के दौरान मतदाता सूची से वंचित रहे नाम को जुड़वाने के लिए चुनाव आयोग ने पहल की है, तो दूसरी तरफ उसी चुनाव आयोग से कई मतदाता यह सवाल कर रहे हैं कि जब उनके सारे दस्तावेज जैसे पैन कार्ड, पहचान पत्र, आधार कार्ड, SIR 2002 में माता-पिता के नाम, सब कुछ सही है, उन्होंने चुनाव आयोग की हियरिंग में भी भाग लिया और अपने सभी दस्तावेज दिखाए, दस्तावेजों का सत्यापन भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद उनके परिवार के कुछ सदस्यों के नाम तो मतदाता सूची में दर्ज किया गया जबकि कुछ सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया,तो यह किसकी गलती है? अगर गलती अधिकारियों की है तो वे इसका खामियाजा क्यों भुगते? वे सरकार और चुनाव आयोग से सवाल कर रहे हैं कि दोबारा फॉर्म क्यों भरें?
चुनाव आयोग के अधिकारियों की कार्यशैली से पीड़ित एक नाम नीलम अग्रवाल का भी है. उनके पति का नाम निर्मल कुमार अग्रवाल है. निर्मल कुमार अग्रवाल तथा उनकी पत्नी नीलम अग्रवाल का नाम 2026 SIR से पहले राज्य मतदाता सूची में शामिल था. 2026 एस आई आर के दौरान दंपति ने अपने सभी दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रक्रिया में भाग लिया. जब 2026 राज्य मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित हुआ तो उसमें पति का नाम तो है, लेकिन पत्नी का नाम शामिल नहीं था. दस्तावेज वही, लेकिन एक का नाम शामिल और एक का नाम बाहर क्यों? उनकी पत्नी का नाम मतदाता सूची से बाहर क्यों?
आप नीलम अग्रवाल के दस्तावेजों को देखिए. वोटर कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट, पैन कार्ड, सब कुछ उनके पास हैं. उनके माता-पिता का नाम 2002 SIR सूची में भी है. आप उनके माता-पिता का वोटर कार्ड देख सकते हैं. उनके पति निर्मल कुमार अग्रवाल का नाम 2002 एस आई आर सूची में भी है. इन सभी मतदाताओं के नाम 2026 की राज्य मतदाता सूची में भी दर्ज है. नीलम अग्रवाल ने 9 जनवरी 2026 को अपने सभी दस्तावेजों के साथ राज्य चुनाव आयोग की हियरिंग में भी भाग लिया. इसके बावजूद नीलम अग्रवाल का नाम राज्य मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया. आखिर ऐसा क्यों?
अब नीलम अग्रवाल का सवाल है कि उन्हें राज्य मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए फिर से आवेदन क्यों करना चाहिए? अगर वह आवेदन करती भी है तो उनके पास तो वही वैलिड दस्तावेज होंगे. नीलम अग्रवाल तो एक उदाहरण है. ऐसे अनेक मतदाता हैं, जो कथित रूप से चुनाव अधिकारियों से पीड़ित बताए जा रहे हैं. उनसे कहा जा रहा है कि वे निर्वाचन तालिका में नाम जुड़वाने के लिए दोबारा फॉर्म 6 भरें. वे चुनाव आयोग से सवाल कर रहे हैं कि दोबारा आवेदन करने के लिए अब उन्हें कौन से दस्तावेज दिखाने होंगे. क्योंकि उनके पास जितने दस्तावेज हैं, वे सभी चुनाव आयोग की पात्रता को साबित करते हैं. चुनाव आयोग द्वारा मान्य उन्हीं दस्तावेजों को फिर से प्रस्तुत किया जाता है तो फिर उन दस्तावेजों को 2026 SIR के दौरान अमान्य क्यों कर दिया गया?
राज्य मतदाता सूची से वंचित ऐसे मतदाताओं के सवाल का जवाब बीएलओ के पास भी नहीं है. यह कम हैरानी की बात नहीं है कि राज्य में मतदाता सूची में नाम दर्ज करवाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. लेकिन अब तक इस संबंध में राज्य के बीएलओ को अवगत तक नहीं कराया कि उनकी जिम्मेदारियां क्या है! उन्हें ऐसे मतदाताओं को किस तरह सहयोग करना है, जिनके सारे कागजात ओके हैं और खुद उनके दस्तावेजों को प्राथमिक स्तर पर उनके द्वारा approved भी किया गया था. उनकी खुद भी समझ में नहीं आ रहा है आखिर मतदाता सूची से उनके नाम क्यों गायब किए गए?
आपको बता दें कि सिलीगुड़ी समेत राज्य के अनेक ऐसे मतदाता हैं, जिनके सारे कागजात चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार दुरुस्त हैं, जैसे 2002 SIR में नाम, पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, माता-पिता के नाम इत्यादि सब कुछ ठीक हैं. लेकिन फिर भी उनका नाम एस आई आर 2026 मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया. ऐसे में वे सवाल कर रहे हैं कि आखिर जब उनके सारे कागजात सही है तो फिर उनका नाम मतदाता सूची से बाहर क्यों किया गया? उनका यह भी सवाल है कि आखिर वह दोबारा फार्म क्यों भरें?
बताते चलें कि पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में और खासकर उन राज्यों में जहां SIR हुआ था और इस दौरान अनेक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए थे, जब कोर्ट ने उनके मामलों पर विचार करते हुए उनके कागजातों को सही पाया तो चुनाव आयोग को फटकार लगाई थी. हालांकि कोर्ट की दखलंदाजी के बाद अब एक बार फिर से मतदाताओं को राज्य मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का मौका मिला है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया के दौरान सिलीगुड़ी के हजारों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए थे. तब से मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया है. आखिरकार कोर्ट ने उनके लिए रास्ता खोल दिया.
बहुत से मतदाता असमंजस में है कि जब उनका सब कुछ सही है. तो फिर इसी के लिए उन्हें दोबारा फॉर्म भरने की जरूरत क्यों है? क्या सरकार उनकी समस्या का समाधान कर सकेगी? कई मतदाता तो ऐसे भी है जो एस आई आर 2026 के दौरान अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए गए थे. अब वह दोबारा लौट आए हैं और फिर से मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज होते देखना चाहते हैं. ऐसे लोगों के लिए तो फॉर्म 6 भरने की बात समझी जा सकती है. लेकिन जो लोग खुद उपस्थित थे, हियरिंग में भी भाग लिया, अपने सभी वैलिड दस्तावेज दिखाए, लेकिन ERO ने उन पर विचार तक नहीं किया.
बहरहाल गलती किसी की भी हो, लेकिन सजा मतदाताओं को मिल रही है. क्या राज्य चुनाव आयोग अपने अधिकारियों की गलती को स्वीकार करेगा? क्या राज्य चुनाव आयोग ऐसे मतदाताओं को दोबारा आवेदन करने से राहत दे सकता है, जिन्होंने न केवल भौतिक रूप से उपस्थित होकर एस आई आर प्रक्रिया में भाग लिया, बल्कि अपने सभी वैलिड दस्तावेज प्रस्तुत भी किए? ऐसे कई ज्वलंत सवाल हैं, जिनका उत्तर या तो सरकार दे सकती है या फिर चुनाव आयोग!
खैर, अगर आप चाहते हैं कि आपका नाम राज्य मतदाता सूची में जुड़े तो इसके लिए चुनाव आयोग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ASDD वोटरों की लिस्ट मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध है.यह संबंधित जिलों के निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर दिए गए लिंक से भी देखी जा सकती है. अगर किसी योग्य मतदाता का नाम सूची में नहीं है तो वह फॉर्म सिक्स के जरिए नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है. नए वोटर भी फॉर्म सिक्स के जरिए अपना नाम जुड़वा सकते हैं या नए पहचान पत्र बनवा सकते हैं.
राज्य चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार राज्य चुनाव आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों को खास निर्देश दिए हैं. आपके इलाके का बीएलओ SIR से पहले और बाद की मतदाता सूची की तुलना करेंगे. इसके आधार पर योग्य मतदाताओं की पहचान की जाएगी. इसके बाद बीएलओ या कोई भी सरकारी अधिकारी पहचाने गए मतदाताओं के घर जाएंगे. वहां उनकी वोटर स्टेटस की जांच की जाएगी. तत्पश्चात फॉर्म सिक्स भरने में उनकी मदद की जाएगी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य चुनाव आयोग ने प्रत्येक बीएलओ को प्रत्येक हफ्ते कम से कम 20 से 25 घरों का दौरा करने को कहा है. यह पूरी प्रक्रिया एक महीने तक चलेगी.
बूथ लेवल अधिकारी के द्वारा तैयार की गई सूची को BLA के पास पहुंचाया जाएगा. BLA नाम का वेरिफिकेशन करेंगे. उसके पश्चात चुनाव अधिकारी तक यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. ERO के सत्यापन के बाद ही आपका नाम मतदाता सूची में जोड़ दिया जाएगा. मिल रही जानकारी के अनुसार जल्द ही राज्य चुनाव आयोग वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए सिलीगुड़ी समेत राज्य के विभिन्न स्थानों पर विशेष कैंप लगा सकता है.

