पश्चिम बंगाल में सरकार क्या बदली, भाजपा नेताओं के पर निकल आए हैं. पिछली सरकार में इस पर को कुतरने का काम जोर शोर से चल रहा था. अब हालात बदल चुके हैं. मुख्यमंत्री का चेहरा बदला है और बदले हैं नेताओं के सुर… हर भाजपा का छुटभैया नेता खुद को तीसमार खान समझने लगा है.
आजकल बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चुन-चुन कर बाण बरसा रहे हैं. ममता बनर्जी को भी भाजपा नेताओं के बाण चुभ रहे हैं. वह खूब खिसिया रही हैं. ममता बनर्जी की सुबह भाजपा को गाली देने से शुरू होती है और रात भाजपा नेताओं को देख लेने तक की ठसक से खत्म होती है.
शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी और उनके भाइपो का राजनीतिक दरवाजा बंद करने के लिए सभी तरह की बिसात बिछाने में लगे हुए हैं. पार्टी कब की टूट चुकी है. पार्टी के नेता दीदी पर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. सुवेंदु अधिकारी नहीं चाहते हैं कि ममता बनर्जी किसी तरह से विधानसभा तक पहुंचे. आजकल वह ममता बनर्जी को सलाह दे रहे हैं. आपकी उम्र 75 साल हो गई है. अब आपको आराम करना चाहिए.
शुभेंदु अधिकारी के इस बयान ने ममता बनर्जी के बदन में जैसे आग लगा दी है. जैसे वह कहना चाहती हैं, अरे सुवेंदु… अगर सलाह ही देनी है तो अपने प्रधानमंत्री को दो. मैंने ही तुम्हें राजनीति का एबीसीडी सिखाया…और मुझे ही उपदेश दे रहे हो! अगर मैं 75 साल की हो गई हूं और मुझे आराम करना चाहिए तो अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी लगे हाथ सलाह दे दो! उन्हें भी आराम करने का समय है… तुम कहो तो मीठा और मैं कहूं तो तीखा… एटा चलबे ना!
सुवेंदु अधिकारी के एक विश्वासपात्र मंत्री ने मुख्यमंत्री के कान में कुछ कहा, महाशय, ऐसी सलाह आपके राजनीतिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है! ममता बनर्जी आपके ही शब्दों को तोड़ मरोड़कर प्रधानमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल कर सकती है और आपको प्रधानमंत्री की नजर में विलेन बना सकती है! सुवेंदु अधिकारी को जल्दी अपनी गलती का एहसास हो गया. उन्होंने अपने विश्वासपात्र से कहा, तुम सही कहते हो…
विश्वासपात्र मंत्री ने कहा, महाशय जल्द ही इस पैटर्न को बदल दीजिए! आपके पास गिनाने के लिए बहुत कुछ है. 6 महीने में आपने पिछले 5 साल का अधूरा काम पूरा कर लिया है. शासन के सभी क्षेत्रों में आपने सफलता प्राप्त की है. बंगाल की नारी शक्ति को सशक्त बनाया… अन्नपूर्णा भंडार से लेकर शासन प्रशासन सब जगह आपके परचम लहरा रहे हैं. उसे शान से गिनाइये… मौजूदा ऐतिहासिक उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में नए शिक्षकों को राजनीति से दूर रखना ताकि शिक्षा का राजनीतिकरण ना हो सके, के अलावा पुलिस एनकाउंटर है, जिसकी चारों तरफ तारीफ हो रही है. आपकी पुलिस अच्छा काम कर रही है. कानून व्यवस्था की स्थिति सुधरी है. इस पर बात करिए…
महाशय, तर्क ऐसा दें जिसका कोई कुतर्क नहीं हो. मुख्यमंत्री ने अपने विश्वासपात्र मंत्री की बात मान ली. उसके बाद दोनों एक पत्रकार सममेलन में पहुंचे. वहां एक पत्रकार ने मुख्यमंत्री से सवाल किया, सर आपने अपनी गृहनगर सीट नंदीग्राम को छोड़ने और भवानीपुर सीट को बनाए रखने का क्यों फैसला किया? मंत्री ने सुवेंदु अधिकारी के कान में कुछ कहा, तो फौरन मुख्यमंत्री ने तर्क ढूंढना शुरू कर दिया.
‘पत्रकार बंधु’, मुख्यमंत्री ने कहा, अगर मैं नंदीग्राम सीट को बनाए रखता तो ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिल जाता और वह चुपके से विधानसभा में पहुंचकर विपक्ष का नेता बनकर मेरी टांग खींचती और मैं यह बर्दाश्त करने वाला नहीं था. इसलिए मैंने काफी सोच समझकर भवानीपुर सीट को बनाए रखा और नंदीग्राम सीट छोड़ दी… मुझे अपने लोगों पर पूरा भरोसा है.लेकिन मुझे खुशी है कि ममता बनर्जी का राजनीतिक बस्ता बांध दिया. अब वह विधानसभा में नहीं पहुंच सकती है.
एक पत्रकार ने पूछा, आपकी सरकार के लगभग 6 महीने पूरे हो चुके हैं. भविष्य की आपकी कार्य योजना क्या है? मुख्यमंत्री ने जवाब दिया, ब्रेकफास्ट हो चुका है… अब लंच की तैयारी है! सवाल जवाब का क्रम जारी था. इसी बीच विश्वास पात्र मंत्री ने मुख्यमंत्री के कान में कुछ कहा.
मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से विदा लेने की बात कही. कहा, मैं जल्द ही सिलीगुड़ी में मिलूंगा… 3 नवंबर को. भाजपा सिलीगुड़ी में शक्ति प्रदर्शन करेगी. गणतंत्र बचाया जाएगा. तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी और कांग्रेस को भगाया जाएगा. बाघा जतिन पार्क में मेरी सभा होगी. फिर आप देखना, वहां कैसी भीड़ एकत्र होगी. हमारी सरकार सनातनियों की सरकार है…
जब दोनों अपनी गाड़ी में ऑफिस लौट रहे थे तो ममता बनर्जी द्वारा SIR पर दिया गया बयान और उनकी धमकी उनके जेहन पटल पर गूंज रही थी. मैं इस सरकार को गिरा दूंगी…
दीदी की कई बातें उनके जेहन पटल में गूंज रही थी… भाजपा ने वोट चोरी की है. मैं बंगाल में नहीं हारती. मुख्यमंत्री जैसे मन ही मन कह रहे थे, सावन के अंधे को सब जगह हरा भरा नजर आता है… कल तुम्हारा था. आज मेरा है. आप मेरा रास्ता नहीं रोक सकती! भाजपा दशकों तक बंगाल में शासन करेगी.
मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र मंत्री ने भी अपने मन में कहा, दीदी वक्त किसी का गुलाम नहीं है. कल आपका वक्त था. आज हमारा वक्त है. रही बात शासन में लौटने की, तो यह दिवा स्वप्न देखना बंद कर दो. क्या बंगाल अपनी राजनीतिक परंपरा को बदल देगा? यहां कांग्रेस ने एक दशक शासन किया. उसके बाद वाममोर्चा ने 3 दशकों तक शासन किया. दीदी, आपने 15 वर्षों तक शासन किया. जो पार्टी सत्ता से बाहर जाती है, क्या वह लौटकर सत्ता में आती है? आजकल भाजपा नेता इसी खुशफहमी में जी रहे हैं!
आपको बताते चलें कि यह एक हास्य-व्यंग्य है. इसे हमारे प्रतिनिधि सुरेंद्र श्रीवास्तव ने लिखा है, जो राजनीतिक फूलझडियों पर आधारित है. कुछ तथ्य तो कुछ फुलझड़ियां भी हैं. राजनीति में हास्य व्यंग्य का पुट तो होना ही चाहिए. आपको हमारा यह प्रयास कैसा लगा? हमें अवगत कराना ना भूले. हमारा मकसद किसी भी राजनेता का अपमान करना नहीं है.
