January 27, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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बांग्लादेश की शह पर चिकन नेक की तरफ बढ़ता चीन!

China is advancing towards the Chicken's Neck region, with the support of Bangladesh!

सोशल मीडिया से लेकर दूसरे प्लेटफार्मों पर चीन के राजदूत याओ वैन के द्वारा तीस्ता नदी परियोजना क्षेत्र का दौरा सुर्खियों में है. उन्होंने यह दौरा बांग्लादेश की यूनुस सरकार के सहयोग से किया है. उनके दौरे के समय यूनुस सरकार की मंत्री सईदा रिजवाना हसन भी मौजूद थी.

बांग्लादेश की ओर से सफाई दी जा रही है कि चीनी राजदूत का यह दौरा तीस्ता नदी व्यापक प्रबंध और पुनर्स्थापना परियोजना के तहत चल रहे तकनीकी आकलन से जुड़ा है. चीन इस परियोजना के तहत तीस्ता मास्टर प्लान को जल्द से जल्द लागू करना चाहता है. लेकिन भारत के लिए चिंता की बात यह है कि तीस्ता नदी परियोजना का क्षेत्र सिलीगुड़ी गलियारा के बेहद नजदीक स्थित है.

भारत बांग्लादेश के बीच तनाव पहले से ही चल रहा है. जबकि बांग्लादेश का चीन से फ्रेंडशिप है. भारत चीन से भी दूरी बनाकर चलता है. वर्तमान में बांग्लादेश चिकन नेक को लेकर भारत को आंख दिखा चुका है और उसे तबाह करने की धमकी भी दे चुका है. आपको याद होगा कि काम चलाऊ सरकार के प्रधानमंत्री यूनुस 2025 में चीन दौरे पर गए थे, तब उन्होंने बीजिंग में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि चीन की मदद से बांग्लादेश में मजबूत आर्थिक ढांचा खड़ा किया जाएगा.

उन्होंने बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति को लेकर कहा था कि उनका देश समुद्र का एकमात्र संरक्षक है. ऐसे में चीन उनके भूभाग का सामरिक कार्यों में इस्तेमाल कर सकता है. हाल की घटना को लेते हैं तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बांग्लादेश तीस्ता मास्टर प्लान को कैसे लागू कर सकता है. क्योंकि परियोजना की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई है. जाहिर है कि बांग्लादेश और चीन के बीच चिकन नेक को लेकर कोई खिचड़ी पक रही है.

जहां तक तीस्ता नदी की बात है, यह नदी उत्तर बंगाल के लिए जीवन रेखा तो है ही. बांग्लादेश के लिए भी जीवन रेखा मानी जाती है. तीस्ता नदी के जल बंटवारे को लेकर शुरू से ही भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद बना रहा है. केवल बातचीत के जरिए ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है. इस पर कोई ठोस नीति अभी तक लागू नहीं हुई है. ना ही इस पर कोई समझौता हो सका है.

बहर हाल इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर भारत की बेचैनी बढ़ा दी है. हालांकि सिलीगुड़ी गलियारे की सुरक्षा काफी चाक-चौबंद है फिर भी चीन और बांग्लादेश की रणनीति और खिचड़ी का पता नहीं चलने से आशंकाएं बरकरार हैं. हालांकि बांग्लादेश की ओर से भारत को आश्वस्त किया जा रहा है कि सिलीगुड़ी गलियारा को लेकर उनकी कोई रणनीति नहीं है.

परंतु सूत्र बताते हैं कि चीन के राजदूत ने सिलीगुड़ी गलियारा के नजदीक दौरा करने से पहले बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहमान से भी मुलाकात की थी. उनकी इस मुलाकात पर बांग्लादेश का कहना है कि चीन और बांग्लादेश आपस में मित्र देश हैं. आपसी हितों पर दोनों देश समय-समय पर कार्य योजना बनाते हैं और मित्रता को और मजबूत करने के संबंध में कदम उठाते हैं. उनकी बातचीत के अंतर्गत तीस्ता नदी परियोजना शामिल थी.

लेकिन क्या बांग्लादेश की सफाई और चीन की कथनी का भरोसा किया जा सकता है? वैसे भारत पूरी तरह सतर्क है और सिलीगुड़ी गलियारे की सुरक्षा के लिए सभी तरह के महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है. आज नहीं तो कल, बांग्लादेश का भांडा फूटेगा ही. तब बांग्लादेश कहीं का नहीं रहेगा. यूनुस सरकार का पतन तो निश्चित है ही.

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