July 11, 2026
Sevoke Road, Siliguri
प्रमुख हेडलाइंस और अपडेट्स siliguri SILIGURI MUNICIPAL CORPORATION toto TRAFFIC POLICE TRAFFIC RULES

सिलीगुड़ी में कब तक रुकेगी टोटो बनाम सिटी ऑटो की जंग!

How long will the battle between Toto and City Auto continue in Siliguri?

फुलबारी To सालूगाड़ा यातायात करने वाला एक सिटी ऑटो जैसे ही हाशमी चौक पार करने के बाद विधान मार्केट में सवारी उठाने के लिए एक जगह रूका, तभी उसके आगे पीछे दो-तीन टोटो आ गये और यात्रियों को ढूंढने लगे.उधर सिटी ऑटो का चालक भी सवारी का इंतजार कर रहा था. कुछ देर में टोटो में एक दो सवारी बैठ गई. सिटी ऑटो सवारी का इंतजार करता रह गया. टोटो चालक को देखकर सिटी ऑटो के चालक ने बुरा सा मुंह बनाया. टोटो चालक जैसे अपनी सफलता पर मुस्कुरा कर आगे बढ़ गया.

सिलीगुड़ी में महीने, 2 महीने पर सिटी ऑटो और टोटो की जंग चलती रहती है. दोनों एक दूसरे को देख नहीं सकते. दोनों की शिकायत रहती है कि वे एक दूसरे की रोजी-रोटी छीन रहे हैं. खासकर सिटी ऑटो चालकों की शिकायत रहती है कि सिलीगुड़ी में कुकुरमुत्ता की तरह बढ गये टोटो के कारण उनकी सवारियां कम हो रही है. इसलिए वे आए दिन टोटो से भिड़ जाते हैं.

सिलीगुड़ी में पिछले दो दिनों तक सिटी ऑटो की हड़ताल रही. उनकी मांग थी कि सिलीगुड़ी प्रशासन टोटो पर नियंत्रण करे. उनके लिए निर्धारित रूट पर ही वे टोटो चलाएं. उन्होंने कई बार प्रशासन का ध्यान भी आकृष्ट कराया था. लेकिन आरोप है कि प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया. फिर बिना किसी निर्णय के ही सिटी ऑटो चालकों की हड़ताल समाप्त हो गई. बुधवार से सिलीगुड़ी की सड़कों पर सिटी ऑटो दौड़ रहे हैं.

टोटो और सिटी ऑटो वालों की जो शिकायत है, अपनी जगह पर वह सही है. सिटी ऑटो वालों का आरोप है कि सिलीगुड़ी में चल रहे बहुसंख्यक टोटो के कारण उनकी कमाई घट गई है. हालांकि वे यह मांग नहीं करते हैं कि प्रशासन टोटो को बंद करा दे. उनका सिर्फ यह कहना है कि टोटो को उनके निर्धारित रूट पर ही चलने की अनुमति दी जाए. दूसरी तरफ टोटो चालकों का रोना है कि प्रशासन ने उनके लिए जो रूट निर्धारित किया है, उससे उन्हें इतनी भी कमाई नहीं होती कि घर परिवार का खर्च चला सके.

ऊपर से ईएमआई और अनेक प्रकार के खर्च होते हैं जिनकी भरपाई वे टोटो चला कर नहीं कर पाते हैं. सिटी ऑटो चालकों की शिकायत रहती है कि टोटो के कारण सिटी ऑटो की सवारी टोटो में चली जाती है और उन्हें खाली गाड़ी ले जानी पड़ती है. उनका कहना है कि वह भाड़े पर गाड़ी चलाते हैं. उन्हें रोज शाम को मलिक को ₹700 से ₹800 देना पड़ता है.उसके बाद उनके पास इतना भी नहीं बच पाता है कि वह अपने घर परिवार का खर्च निकाल सके. इस तरह से दोनों की शिकायत अपनी अपनी जगह सही है. लेकिन इसका समाधान एक दूसरे की रोजी-रोटी छीनकर नहीं किया जा सकता है.

सिलीगुड़ी प्रशासनिक सूत्रों ने भी बताया है कि टोटो हो अथवा सिटी ऑटो दोनों को रोजी-रोटी कमाने का पूरा अधिकार है. अगर टोटो को बंद किया जाता है तो उनके सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा. फिर वह कैसे अपना घर परिवार चलाएंगे. इससे शहर में अव्यवस्था बढ़ेगी, चोरी, छिनताई और आपराधिक घटनाओं में बढ़ोतरी होगी. इसलिए सिटी ऑटो चालकों को ऐसी कोई मांग नहीं करनी चाहिए कि किसी की रोजी रोटी प्रभावित हो.

सिलीगुड़ी प्रशासन ने पहले ही टोटो के लिए रूट निर्धारित कर दिया है. सिलीगुड़ी प्रशासन इस बात की कोशिश कर रहा है कि सभी टोटो चालक अपने निर्धारित रूट में ही गाड़ी चलाएं. इन नियमों का वह पालन भी कर रहे हैं. फिर भी एकाध घटनाएं गलत रूट की हो सकती हैं. प्रशासन की उस पर नजर बनी हुई है. उधर टोटो चालकों की प्रशासन से मांग है कि उनके लिए कोई सीमा दायरा नहीं रखा जाए और सिलीगुड़ी में सभी मार्गों पर टोटो चलाने की अनुमति दी जाए.

प्रशासन को लगता है कि अगर टोटो को जरूरत से ज्यादा छूट मिलती है तो सड़क जाम बहुत ज्यादा होने लगेगा. टोटो चालकों की मांगों को लेकर सीटू समर्थित ई-रिक्शा यूनियन का धरना प्रदर्शन पिछले दिनों हुआ था. सिलीगुड़ी कोर्ट मोड के पास मुख्य डाकघर के सामने गांधी मूर्ति के नीचे यह धरना कार्यक्रम आयोजित हुआ था. इस कार्यक्रम में सीपीएम के जिला सचिव समन पाठक, सीटू की ओर से मोहन पांडा, विमल पाल ,उदयन दास गुप्ता आदि कई नेताओं ने कहा कि ई रिक्शा चालक के कारण सड़क जाम नहीं होती.

यातायात नियंत्रण के लिए दूसरे तरीके अपनाया जाना चाहिए. उनका आरोप था कि सिलीगुड़ी में टोटो चालकों के कारण नहीं बल्कि जहां-तहां सड़कों पर पार्किंग के कारण ही जाम लगता रहता है. टोटो चालक बस इतना चाहते हैं कि प्रशासन उन्हें शहर में सुचारू तथा व्यवस्थित रूप से टोटो चलाने की अनुमति दे.

ऐसा नहीं लगता है कि सिलीगुड़ी प्रशासन उनकी यह मांग मान ले. परंतु यह भी सही है कि टोटो चालकों को उनके निश्चित रूट पर चलने से भी नहीं रोका जाएगा. जहां तक सिटी ऑटो की बात है, उन्हें अपने निर्धारित रूट पर ही बगैर किसी प्रतिस्पर्धा या हिंसा की भावना रख अपना वाहन चलाना चाहिए. चालक अपनी मेहनत और किस्मत से कमाते है.जिसके भाग्य में जितना होता है, वह उतना ही कमाता है. उससे ज्यादा नहीं कमा पाता. इस संतोष और भावना से दोनों तरह के वाहन चालकों को आपस में अच्छे संबंध रखते हुए अपना काम करना चाहिए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *