बहुत जल्द सिलीगुड़ी एक मेगा सिटी के रूप में परिवर्तित होने वाली है. जब से राज्य सरकार ने महानंदा वन्य जीव अभ्यारण्य के इको सेंसिटिव जोन को 5 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर किए जाने का फैसला किया है, तभी से ही रियल एस्टेट से लेकर उद्योग और सभी सेक्टरों से जुड़े लोगों को एक मेगा सिटी के रूप में सिलीगुड़ी का भविष्य नजर आ रहा है.
अर्थव्यवस्था और विकास को गति देने वाली सभी सेक्टर्स इकाइयों ने एक मत से कहा है कि सरकार के इस निर्णय से सिलीगुड़ी का चौतरफा विकास होगा. यहां इको सेंसेटिव जोन से जुड़े नियमों के कारण विकास परियोजनाएं लंबे समय से बाधित थी. जिसको दूर करने के लिए पूर्ववर्ती सरकारों ने कोई कदम नहीं उठाया. अब भाजपा सरकार की पहल से यहां विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद और विश्वास बढ़ा है.
सबसे ज्यादा लाभ रियल स्टेट को मिलने वाला है . भूमि की कीमतों में संतुलन आने की संभावना बढी है. इससे लोगों को जमीन और मकान खरीदने में आसानी होगी. यह सस्ता भी होगा. यहां आवासीय योजना का विस्तार होने से रोजगार के भी अवसर बढ़ेंगे. इसके साथ ही सिलीगुड़ी के लोगों को विकास परियोजनाओं का भी लाभ मिलेगा. यही कारण है कि सरकार के इस फैसले के बाद रियल एस्टेट डेवलपर काफी खुश दिखाई दे रहे हैं. केवल रियल एस्टेट डेवलपर ही नहीं बल्कि सिलीगुड़ी के सभी वर्गों के लोगों को भविष्य में इसका लाभ मिलने वाला है.
सिलीगुड़ी के अनेक बुद्धिजीवी और व्यवसायी संगठनों के लोगों का मानना है कि यह राज्य सरकार का एक दूरदर्शी और सिलीगुड़ी के विकास के लिए किया जाने वाला एक सार्थक प्रयास है. राज्य सरकार ने केंद्र को अपना फैसला बता दिया है. जिस पर केंद्र सरकार का अनुमोदन कभी भी आ सकता है.
यहां के बुद्धिजीवियों का मानना है कि वर्षों से उपेक्षित सिलीगुड़ी के विकास को एक नई गति मिलने वाली है. पर्यावरण प्रतिबंधों के चलते यहां लंबे समय से कई परियोजनाएं निलंबित थी. जिसके कारण यहां उद्योग धंधों का विकास नहीं हो रहा था. कोई बड़ी इंडस्ट्री नहीं लगी थी. अब उसकी उम्मीद बढ़ गई है. बुद्धिजीवियों को लगता है कि सरकार के फैसले से औद्योगिक, व्यावसायिक तथा आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों को एक नई गति और अवसर उपलब्ध होगा.
सिलीगुड़ी को मेगा सिटी के रूप में विकसित करने के लिए सिलीगुड़ी तथा आसपास के क्षेत्रो में समग्र विकास को नई गति और दिशा देने की जरूरत है. यहां उद्योग धंधों के साथ ही फैक्ट्री का विकास होगा तो सिलीगुड़ी की अर्थव्यवस्था में भी मजबूती आएगी. इसके साथ ही यहां के लोगों का जीवन बेहतर होगा. लोग रियल एस्टेट की ओर अग्रसर होंगे.
सिलीगुड़ी के कई जाने-माने व्यवसायियों, उद्योगपतियों तथा युवाओं ने उम्मीद जताई है कि पर्यावरण प्रतिबंधों का दायरा घटाये जाने से सिलीगुड़ी विकास के वैश्विक मानचित्र पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेगा. आने वाले समय में सिलीगुड़ी का न केवल सकल बुनियादी ढांचा बदलेगा. बल्कि व्यवस्थित शहरी नियोजन का भी मार्ग प्रशस्त होगा. सिलीगुड़ी में काफी समय से आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की तेजी से मांग बढी है.
सिलीगुड़ी उत्तर-पूर्व भारत का प्रवेश द्वार माना जाता है.यह शहर सामरिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है. मौजूदा स्थितियों में शहर अपनी बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र हो गया है. और नए-नए प्रोजेक्ट आएंगे, जहां सिलीगुड़ी के विकास के नए पंख लग जाएंगे. यहां के बुद्धिजीवियों को लगता है कि सिलीगुड़ी में आने वाले समय में शुरू किए जाने वाले प्रोजेक्ट से सिलीगुड़ी का मूल निर्माण इंजीनियरिंग और क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर मिलेंगे .
इको सेंसेटिव जोन का दायरा घटाए जाने का लाभ सिलीगुड़ी के लोगों को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी मिलेगा.हालांकि बुद्धिजीवियों का यह भी कहना है कि यहां विकास और नव निर्माण इस प्रकार से होना चाहिए कि पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान ना हो. राज्य सरकार ने पहले ही अपनी विकास योजनाओं में पर्यावरण को सर्वोपरि रखा है. अब समाज के विभिन्न वर्गों से एक ही आवाज आ रही है कि केंद्र सरकार राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द हरी झंडी दे ताकि यहां लंबे समय से लंबित परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ सके.
इसमें कोई दो राय नहीं है कि इको सेंसेटिव जोन की सीमा को 5 किलोमीटर से 1 किलोमीटर किए जाने का सिलीगुड़ी के लोगों को सभी क्षेत्रों में लाभ मिलेगा. सबसे बड़ा लाभ तो रोजगार और इंडस्ट्री के क्षेत्र में मिलेगा.बेरोजगारी कम होगी. विकास कार्यों में गति आएगी. टेक्नोलॉजी की रफ्तार बढ़ेगी. इस तरह से सिलीगुड़ी के समस्त क्षेत्रों का विकास होगा.
उम्मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार जल्द ही प्रस्ताव का अनुमोदन कर देगी और उसके बाद सिलीगुड़ी को मेगा सिटी के रूप में विकसित करने का सपना सफल हो सकेगा.

