September 21, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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अन्नपूर्णा का पैसा पाने के लिए सिलीगुड़ी से लेकर आसनसोल तक महिलाओं का संग्राम!

Struggle of women from Siliguri to Asansol to get Annapurna money!

एक बार फिर से अन्नपूर्णा योजना का पैसा पाने की बाट जोह रही महिलाओं के द्वारा सिलीगुड़ी से लेकर आसनसोल तक संग्राम छेड़ दिया गया है. सोमवार को सिलीगुड़ी एसडीओ कार्यालय में अन्नपूर्णा योजना की राशि से अब तक वंचित महिलाओं के द्वारा आक्रामक प्रदर्शन किया गया, तो दूसरी ओर आसनसोल में महिलाओं ने महकमा शासक कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया. उनका आंदोलन इतना उग्र था कि उन्होंने सड़क जाम कर दिया. बाद में पुलिस अधिकारियों के समझाने के बाद महिलाएं सड़क से हटीं.

यह कोई पहला मौका नहीं है. जब जब राज्य सरकार के द्वारा लाभार्थी महिलाओं के खाते में अन्नपूर्णा योजना की मासिक किस्त ₹3000 जमा की जाती है, जिन महिलाओं के खाते में योजना की राशि आ जाती है, तो वह अपनी खुशी पड़ोस की महिलाओं को शेयर करती हैं. दूसरी तरफ जिन महिलाओं के खाते में योजना का पैसा नहीं आता, लाभार्थी पड़ोसन की खुशी देखकर जैसे उनके हृदय पर सांप लोटने लगता है. उनके द्वारा संबंधित कार्यालय के अधिकारियों के समक्ष हंगामा शुरू कर दिया जाता है.

अन्नपूर्णा योजना के लाभ से वंचित महिलाओं का फॉर्म क्यों रिजेक्ट किया गया? जून जुलाई महीने में ही जमा किया गया फॉर्म अब तक अप्रूव्ड क्यों नहीं हुआ? इसका कारण समझने और उसके समाधान पर ध्यान न देकर महिलाओं के द्वारा धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जाता है. कभी एसडीओ कार्यालय के कर्मचारियों का घेराव तो कभी नगरपालिका का, कभी बीडीओ ऑफिस में प्रदर्शन तो कभी राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर धरना प्रदर्शन, यही सब होता है ताकि मीडिया उनकी बात को सरकार तक पहुंचाए.

सोमवार को सिलीगुड़ी में सुबह से ही महिलाओं का तांता लगना शुरू हो गया. अन्नपूर्णा योजना के लाभ से वंचित महिलाएं झोले में अन्नपूर्णा योजना के सभी दस्तावेज लेकर लौटी थीं. लेकिन जब उनकी बात संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंची, तब उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया. इसी तरह से आसनसोल में महिलाओं ने महकमा शासक कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. जब महिलाओं को कार्यालय के अंदर जाने से रोका गया, तब उन्होंने अपनी मांग को लेकर सड़क जाम कर दी. प्रदर्शनकारी महिलाओं ने साफ कहा कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक वह वहां से नहीं जाएंगी.

अन्नपूर्णा योजना के लाभ से वंचित हर महिला का अपना-अपना दर्द है. अपना-अपना तर्क है और अपना-अपना दृष्टिकोण है. सिलीगुड़ी एसडीओ कार्यालय में एक महिला ने खबर समय को बताया कि उसने लगभग 4 महीने पहले ही अन्नपूर्णा योजना का फॉर्म भरा था. लेकिन उसे एक बार भी अन्नपूर्णा योजना का पैसा नहीं मिला. उसके पड़ोस में लगभग सभी महिलाओं के खाते में अन्नपूर्णा का पैसा आ रहा है. लेकिन उसे क्यों नहीं? क्या वह अन्नपूर्णा की पात्र नहीं है? एक अन्य महिला ने बताया कि जिसके घर में गाड़ी है, जो महिला नौकरी करती है, वह भी अन्नपूर्णा योजना का लाभ उठा रही है. जबकि उसके पास तो कुछ भी नहीं है.

देव कुमारी नामक महिला ने बताया कि वह एक गरीब परिवार से आती है. उसके पति मजदूरी करते हैं. किराए के मकान में वे सभी रहते हैं. लेकिन फिर भी उन्हें अन्नपूर्णा का पैसा नहीं मिल रहा है. जबकि मकान वाली महिलाओं को अन्नपूर्णा का पैसा मिल रहा है. उनके पास किसी तरह की कोई कमी नहीं है. मालती नामक अन्य महिला ने बताया कि जब सरकार को वोट लेना था, तब कहा गया कि सभी महिलाओं को अन्नपूर्णा का पैसा हर महीने तीन-तीन हजार रुपए मिलेंगे. कहां गया सरकार का वादा? अगर देना है तो सभी को सरकार पैसा दे. अन्यथा किसी को भी ना दे.

प्रियंका नामक महिला ने कहा कि सरकार को चाहिए कि अन्नपूर्णा योजना ही बंद कर दे. नहीं तो हर महिला के खाते में हजार हजार रुपए दे. भाजपा सरकार हर बार आश्वासन देती है. लेकिन जब पैसा छोड़ती है तो उनके खाते में पैसा ही नहीं आता है. यह सरासर नाइंसाफी है. सरकार को चाहिए कि पात्र महिलाओं के खाते में अन्नपूर्णा योजना की राशि ट्रांसफर करे. एसडीओ ऑफिस में प्रदर्शन कर रही एक अन्य महिला ने बताया कि वह तो भाजपा को वोट देती है, लेकिन फिर भी उसे पैसा नहीं मिला.

इस तरह से हर महिला का अपना-अपना तर्क है. लेकिन कोई भी महिला यह समझने की कोशिश नहीं करती कि आखिर क्या कारण है कि उनके पड़ोस की बाकी महिलाओं के खाते में अन्नपूर्णा योजना की राशि नियमित रूप से पहुंच रही है जबकि उन्हें अभी तक इसका लाभ नहीं मिला? अगर सरकार किसी तरह का भेदभाव करती तो करोड़ों महिलाओं के खाते में अन्नपूर्णा की राशि नहीं पहुंचती. इसलिए महिलाओं को अपने दिमाग से इस भ्रम को निकालने की जरूरत है. सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अन्नपूर्णा योजना का लाभ केवल पात्र महिलाएं ही उठा सकती हैं.

सरकारी नौकरी करने वाली, आशा कर्मी, पेंशन धारी, आयकर जमा करने वाली महिला, जीएसटी वाली महिला, शिक्षिका आदि महिलाओं को अन्नपूर्णा का लाभ नहीं मिलेगा. पात्रताएं पूरा करने के बाद ही महिलाओं को अन्नपूर्णा का लाभ मिल सकेगा. दूसरी तरफ ऐसी महिलाओं की भी तादाद कम नहीं है, जिनका बैंक खाता या तो डीबीटी लिंक नहीं है या फिर उनके नाम में भूल है. यही कारण है कि सरकार द्वारा उनके खाते में भेजी गई राशि जमा नहीं हो पाती और पेमेंट फैलियर हो जाती है. इस स्थिति में महिलाओं को अपना बैंक खाता सुधार की कोशिश करनी चाहिए.

याद रखें, अगर आप अन्नपूर्णा योजना की एक पात्र महिला हैं और आपका बैंक खाता सही है, नाम में कोई भूल नहीं है तो आप इस लाभ से वंचित नहीं रह पाएंगी. पश्चिम बंगाल सरकार व मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि हर पात्र महिला को अन्नपूर्णा का लाभ मिलेगा. सरकार पर दबाव डालने के लिए प्रदर्शन कुछ हद तक सही है. लेकिन जब आपकी पात्रता ही गलत हो, अगर पात्रता सही भी है तो बैंक में नाम मिस्टेक, डीबीटी का लिंक नहीं होना, आदि त्रुटियां हो तो इसके लिए सरकार जवाब देह नहीं है. सरकार आधार नंबर से पैसे जारी करती है. इसलिए अन्नपूर्णा का लाभ पाने के लिए अपने खाते से लेकर स्टेटस में दी गई भूलों को जल्द से जल्द सुधार लें. अगर आप एक पात्र महिला हैं तो निश्चित रूप से इसका लाभ मिलेगा. भले ही कुछ वक्त और लग जाए!

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