July 7, 2026
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‘चिकन नेक’ पर दुश्मन नहीं दिखा पाएगा आंख! केंद्र सरकार का ऐतिहासिक कदम!

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सिलीगुड़ी के लोगों को सिलीगुड़ी गलियारे यानी चिकन नेक को लेकर अब डरने की जरूरत नहीं है. दुश्मन देश इस गलियारे पर आंख नहीं दिखा पाएगा. चीन भी हाथ मलते रह जाएगा. क्योंकि केंद्र सरकार ने इसकी सुरक्षा के लिए जो दूरदर्शी और पुख्ता तैयारी की है, उसके बाद दुश्मन देश का एक परिंदा भी यहां पर नहीं मार पाएगा!

आखिर केंद्र सरकार की योजना क्या है? जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. आपको बता दें कि पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी गलियारा यानी चिकन नेक के समानांतर वैकल्पिक रेल मार्ग विकसित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. केंद्र सरकार की दूरदर्शी नीति और अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बहाल करने की दिशा में भी एक और कदम उठाया गया है.

सरकार ने बांग्लादेश और नेपाल को भी अपनी योजना में शामिल करने के लिए तैयार कर लिया है. रेलवे बोर्ड ने बांग्लादेश और नेपाल के साथ अंतर्राष्ट्रीय रेल संपर्क मजबूत करने तथा वैकल्पिक रेल नेटवर्क विकसित करने के लिए 14 फाइनल लोकेशन सर्वे को न केवल मंजूरी दी है, बल्कि इसके लिए तकनीकी अध्ययन, सर्वे आदि पर 30 करोड़ 5 लाख 25 हजार खर्च करने का फैसला कर लिया है.

भारत के इस फैसले के बाद जरूर चीन की नींद उड़ गई होगी, जो बांग्लादेश की बैसाखी बनकर सिलीगुड़ी गलियारा पर नजरे जमाए हुए था. आखिर रातों-रात बाजी कैसे पलट गई? भारत ने पहले से कोई ऐलान भी नहीं किया था और चीन की नींद उड़ गई. भारत ने अपनी सामरिक ताकत का परिचय दे दिया है और चीन को बता दिया है कि उसकी कोई भी चालाकी काम नहीं करेगी. भारत की एकता और अखंडता को कोई खतरा नहीं है.

जो 14 परियोजनाएं स्वीकृत की गई है, इन परियोजनाओं से न केवल भारत को अपने उद्देश्य में सफलता मिलेगी, बल्कि नेपाल और बांग्लादेश को भी लाभ मिलने वाला है. दरअसल भारत बांग्लादेश और नेपाल के साथ रेलवे कनेक्टिविटी को बढ़ाना चाहता है. इसका एक बड़ा लाभ यह भी होगा कि चिकन नेक की सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी. क्योंकि चिकन नेक के समानांतर सुरक्षित और वैकल्पिक मार्ग तैयार होगा.

आईए जानते हैं कि ये 14 परियोजनाएं क्या है? इनमें से आठ परियोजनाएं बांग्लादेश, दो परियोजनाएं नेपाल और चार परियोजनाएं सीमांचल तथा उत्तर बंगाल की आंतरिक रेलवे लाइनों से संबंधित है. बांग्लादेश से जुड़ी प्रस्तावित प्रमुख परियोजनाओं में बालूरघाट हिल्ली गाईबांदा महेंद्रगंज तुरा मेंदी पात्थर रेल कॉरिडोर के अलावा बेलुनिया फनी चट्टोग्राम, गेंदे दर्शना अगरतला, दालकोला पीरगंज पंचगढ़ हल्दीबाडी तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय रेल मार्गों के सर्वे को भी मंजूरी दी गयी है. इसके लिए 6.25 करोड रुपए स्वीकृत किए गए हैं.

दूसरी तरफ नेपाल कनेक्टिविटी के तहत विराटनगर न्यू माल जंक्शन रेलवे कॉरिडोर का सर्वे कराया जाएगा. इसके लिए 4.75 करोड रुपए स्वीकृत किए गए हैं. जबकि सीमांचल बिहार के लिए गलगलिया भदरपुर काजली बाजार रेल संपर्क के लिए 31.25 लाख स्वीकृत किए गए हैं. फाइनल लोकेशन सर्वे का काम जल्द ही फ्लोर पर जाएगा. इस तकनीकी चरण के बाद अगले चरण में प्रस्तावित रेल मार्ग का अंतिम एलाइनमेंट ,भूमि की आवश्यकता, पुल, स्टेशन आदि का अनुमानित लागत का अध्ययन किया जाएगा.

एक बार सर्वे रिपोर्ट और डीपीआर तैयार होने के बाद इन परियोजनाओं को अंतिम प्रशासनिक तथा वित्तीय स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. रेलवे बोर्ड का यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब चीन और बांग्लादेश के बीच सिलीगुड़ी गलियारा को लेकर एक रणनीति बनाई जा रही है. चीन ने इसमें बांग्लादेश को भी भागीदार बनाया है. दरअसल बांग्लादेश के प्रोजेक्ट में चीन ने निवेश करने की इच्छा व्यक्त की है.

बांग्लादेश का प्रोजेक्ट सिलीगुड़ी गलियारा के बिल्कुल करीब है. ऐसे में चीन के इंजीनियर यहां आकर सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सामरिक सूचनाओं के बारे में चीन को सूचना दे सकते थे. भारत सरकार ने उनके इरादे पर पानी फेर दिया है. भारतीय रेलवे बोर्ड के इस फैसले के बाद जानकार मानते हैं कि सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल में इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही रोजगार और व्यापार के अवसर बढ़ेंगे. इस तरह से कह सकते हैं कि आने वाले समय में सिलीगुड़ी गलियारा न केवल सशक्त और सक्षम होगा, बल्कि सिलीगुड़ी और आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, रोजगार और व्यवसाय के अवसर बढ़ेंगे.

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