भारत सरकार के लिए भारत बांग्लादेश बॉर्डर तथा सिलीगुड़ी चिकन नेक सामरिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है, यह इसी बात से पता चल जाता है कि दिल्ली से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भारत बांग्लादेश बॉर्डर और सिलीगुड़ी चिकन नेक की सुरक्षा व्यवस्था देखने आए थे और जब उन्होंने भारत बांग्लादेश सीमा से सटे डाबग्राम फुलवारी क्षेत्र के जमुरिया बीटा और संन्यासी काटा इलाकों का दौरा करते हुए सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया तो सीमा पर अलर्ट जवानों को देखकर जैसे वह कह रहे थे, दुश्मन देश की नजर है इस पर! जागते रहो मेरे देश के जवानों!
सिलीगुड़ी चिकन नेक भारत के लिए केवल एक भौगोलिक गलियारा मात्र नहीं है.बल्कि सामरिक जीवन रेखा भी है. लगभग 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा यह क्षेत्र देश के आठ पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भारत से जोड़ता है. सिलीगुड़ी चिकन नेक के एक ओर नेपाल, दूसरी तरफ बांग्लादेश, उत्तर में भूटान और कुछ दूरी पर चीन का प्रभाव क्षेत्र साफ दिख जाता है. अगर इस कॉरिडोर में किसी भी प्रकार की सुरक्षा चुनौती उत्पन्न होती है तो इसका सीधा असर पूरे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी पर पड़ सकता है. यही कारण है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस इलाके को देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में गिनती है. बीएसएफ ,एसएसबी, खुफिया एजेंसी और राज्य पुलिस यहां लगातार आपसी तालमेल के साथ साथ काम करती रही है
पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद अमित शाह का यह पहला उत्तर बंगाल दौरा था. भारत सरकार सिलीगुड़ी चिकन नेक और भारत बांग्लादेश बॉर्डर की सुरक्षा को चाक चौबंद रखना चाहती है. इसका कारण भी है. एक तो भारत सरकार भारतीय सेना की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करना चाहती है और दूसरे में रंगपो रेल परियोजना का काम खत्म होने के बाद जब सिलीगुड़ी से सिक्किम तक ट्रेन जाएगी तो चिकन नेक और बॉर्डर की सुरक्षा में किसी तरह की चूक न हो सके, इसकी पूर्व तैयारी जरूरी है.
पश्चिम बंगाल लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा पर घुसपैठ, तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा, मानव तस्करी और कट्टरपंथी नेटवर्क जैसी चुनौतियों के कारण हमेशा गृह मंत्रालय के फोकस में रहा है. यही कारण है कि अमित शाह सीधे सीमा चौकी पर जाकर जवानों से संवाद करते हैं और उसके बाद राज्य के शीर्ष अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हैं. यह इस बात का भी संकेत है कि केंद्रीय सरकार बदली हुई स्थितियों में सीमा सुरक्षा और आंतरिक प्रशासन को एक साथ जोड़कर देख रही है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर कन्या में राज्य सरकार के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. उनकी यह बैठक सीमा सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारो से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित थी. भारत सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि भारत बांग्लादेश सीमा पर किसी भी तरह की अवैध घुसपैठ को रोकना होगा और सीमा सुरक्षा को प्रश्रय देना होगा. भारत सरकार के लिए बॉर्डर सिक्योरिटी के साथ-साथ सिलीगुड़ी चिकन नेक भी उतना ही महत्वपूर्ण है.केंद्र सरकार सिलीगुड़ी चिकन नेक को लेकर काफी चौकसी बरत रही है. यह गलियारा भारत के पूर्वी हिस्सों को शेष भारत से जोड़ता है.
सिलीगुड़ी के उत्तर कन्या में हुई बैठक कितनी महत्वपूर्ण थी, इसका पता इसी बात से लग जाता है कि इस बैठक में राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सांसद, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कालिमपोंग, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, उत्तर एवं दक्षिण दिनाजपुर तथा मालदा के मंत्री और भाजपा नेता मौजूद थे. उत्तर कन्या में अमित शाह ने तीन प्रमुख विषयों पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया.उन्होंने राज्य सरकार तथा सेना को संदेश दे दिया. राज्य में अपराधी गिरोह के खिलाफ सख्त नीति लागू की जाए. जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन हो तथा अवैध घुसपैठ और फर्जी पहचान से जुड़े मामलों पर कार्रवाई हो.
अमित शाह का यह दौरा पश्चिम बंगाल की आंतरिक सुरक्षा, भारत बांग्लादेश सीमा प्रबंधन और आगामी रणनीति की चुनौतियों को लेकर केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है. उनका यह दौरा केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं है. 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए भी यह जरूरी है. इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा संदेश सीमा क्षेत्र में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर संचार व्यवस्था ,स्मार्ट निगरानी और जवानों की सुविधाओं को भी प्राथमिकता देना रहा था.
