नेपाल एक ऐसा देश है, जो हमेशा झंझावातों का सामना करता रहता है. कभी राजनीतिक भूकंप तो कभी प्राकृतिक आपदा जैसे नेपाल की पहचान बन गई है. जब भी नेपाल मुसीबतों से लड़कर खड़ा होने की कोशिश करता है, अचानक ही सब कुछ बिखर जाता है. जैसे इस समय सैलाब ने नेपाल के जान माल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है.
नेपाल सरकार से अब तक जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार नेपाल घूमने आए 100 से ज्यादा भारतीय पर्यटक लापता हो गए हैं. मिल रही जानकारी के अनुसार यह बाढ़ अचानक आई और सब कुछ बहा कर ले गई. बाढ़ के रेले के सामने जो कुछ आया, सैलाब उसे बहा ले गया. यहां तक कि पुल भी बह गया.
कार, टैक्सी ,जल विद्युत प्रकल्प, बस्ती, बाजार सब कुछ खत्म हो गया. नेपाल सरकार ने कई हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं. जैसे नेपाल पुलिस के लिए 100 नंबर, एंबुलेंस के लिए 102 नंबर, सशस्त्र प्रहरी बल के लिए 1114. इसके अलावा अलग-अलग प्रहरियों के लिए भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं.
इस समय सोशल मीडिया पर नेपाल में विनाशकारी बाढ़ की प्रलय लीला देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. सैलाब में सब कुछ खत्म हो चुका है. जिस तरह से कुछ वर्ष पहले नेपाल में आए भूकंप ने नेपाल को तहस नहश कर दिया था. ठीक उसी तरह से सैलाब के प्रकोप को देखा जा रहा है. काठमांडू पोस्ट के अनुसार अब तक इस हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है.
नेपाल की कई प्रमुख सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. सड़कों पर भूस्खलन का मलवा पड़ा हुआ है. यहां के कई जिलों में अफरा तफरी का आलम है. नेपाल के नजदीक तिब्बत स्थित है और तिब्बत से नेपाल को हमेशा प्राकृतिक आपदा का खतरा रहता है. यह सैलाब भी तिब्बत की ओर से आया था. अब भारत को भी खतरा बढ़ गया है. खासकर बिहार में बाढ़ आना तय है.
नेपाल में कई नदियां पहले से ही रौद्र रूप मचा रही है. इनमें से एक नदी है भोटेकोशी नदी. यह नदी पिछले कई दिनों से उमड़ रही थी. सुबह के लगभग 9:00 बजे थे. नदी के आसपास रहने वाले लोग और बाजार में चहल-पहल दिख रही थी. किसी ने भी सोचा नहीं था कि पल में ही प्रलय आ जाएगा.
तभी तिब्बत की ओर से अचानक इस नदी में भीषण बाढ़ आ गई, जिसके चलते रसुवा जिले में भारी तबाही मच गई. नदी के आसपास रहने वाले लोग भागते नजर आए. लोगों की चीख पुकार मच गई. संपत्ति तो डूब गया पानी में. लेकिन कई लोगों ने अपनी जान बचा ली.
भोटेकोशी नदी के किनारे ही टिमूरे बाजार है. कुछ ही देर में यह बाजार बाढ़ में समा गया. उसके बाद पानी बढ़ता हुआ रसुआ सीमा नाके के कस्टम क्षेत्र में घुस गया और वहां व्यापक तबाही मचाई. यहां खड़े कई वाहन तथा दूसरे सामान पानी की तेज धारा में बह गए. इतना ही नहीं, यहां कई जल विद्युत परियोजनाएं स्थित हैं. यहां काफी संख्या में बस्तियां भी हैं. उन सभी को भारी नुकसान पहुंचा है.
नेपाल का रसुवा जिला बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं के दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील माना जाता है. यह काठमांडू के उत्तर पूर्व में स्थित है और तिब्बत सीमा से लगभग 125 किलोमीटर दूर है.भोटेकोशी नदी के तट पर कई बस्तियां बस गई है. इनमें रसुवा के अलावा नुवाकोट,धादिंग, चितवन आदि शामिल है. पिछले काफी समय से नदी किनारे रहने वाले लोगों को नेपाल का राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण सतर्क कर रहा था.
नेपाल की भौगोलिक स्थिति तथा बाढ़ की तबाही के बाद कई अन्य क्षेत्रों को बचाने के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है. जब नेपाल में एक नदी में बाढ़ आ जाती है तो उसका असर दूसरी नदियों पर भी देखा जाता है. ऐसे में स्थानीय प्रशासन ने त्रिशूली नदी समेत अन्य नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को चेतावनी देने का काम शुरू कर दिया है.
नेपाल में बाढ़ आने के बाद बिहार सरकार ने भी कोसी नदी के नजदीक रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया है. भारत के बगहा, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण जिलों से बहने वाली नदियों के पास रहने वाले लोगों के लिए स्थानीय प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है. यहां के लोगों को कहा गया है कि वे नदियों से दूर रहे और सुरक्षित जगहों पर शरण लें.
अब देखना होगा कि नेपाल प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण अचानक आई तबाही को रोकने में कितना सक्षम होता है. इस सैलाब में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है और कितनी भारी क्षति हुई है, नेपाल सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है. प्रारंभिक जानकारी काठमांडू पोस्ट पर आधारित है.
