फेस बुक व सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. कुछ पर्यटक कालिमपोंग के डेलो पार्क में घूमने जाते हैं, तो एंट्री फीस उनसे मांगी जाती है. इस पर पर्यटक आपे से बाहर हो जाता है और कहता है कि सरकार बदल गई है. बंगाल की बीजेपी सरकार में पर्यटक स्थलों पर प्रवेश के लिए सरकार कोई फीस नहीं ले रही है. ऐसे में वे पार्क में प्रवेश के लिए फीस क्यों देंगे. जबकि स्थानीय कर्मचारी जीटीए की बात कह कर पैसे मांगते हैं. इसी बात पर दोनों तरफ से बहस होने लगती है. आप यह पूरा वीडियो देखिए.
गर्मियों के मौसम में देश-विदेश के अधिकतर पर्यटक हिल स्टेशन पर जाते हैं. इन दिनों दार्जिलिंग पहाड़ और सिक्किम में पर्यटकों की भीड़ देखी जा रही है. पहाड़ में अधिकांश पर्यटक स्थलों पर प्रवेश के लिए हालांकि सरकारी तौर पर कोई एंट्री फीस नहीं है, परंतु कुछ पर्यटक स्थलों पर पर्यटकों के प्रवेश के लिए फीस निर्धारित की गई है.GTA के अंतर्गत संचालित विभिन्न कमेटियों के द्वारा पर्यटक स्थलों की साफ सफाई कराई जाती है. इसके एवज में GTA पर्यटकों के लिए एंट्री फीस के नाम पर वसूले गए पैसे को अपने कर्मचारियों में बांट देती है. इसका उद्देश्य एक ही रहता है कि पर्यटक पर्यटक स्थल पर पहुंचे तो उन्हें वहां साफ सफाई नजर आए.
जीटीए एक स्वायत्त संस्था है. जीटीए को अधिकार है कि वह पहाड़ की व्यवस्था को संचालित करने के लिए स्वयं कुछ छोटे-मोटे निर्णय ले सके. इसके लिए सरकार की इजाजत की आवश्यकता नहीं होती है. इस वस्तु स्थिति को समझे बगैर कुछ पर्यटक सरकारी आदेश और नियमों की वकालत करने लगते हैं तथा एंट्री फीस से बचने के लिए जो तर्क देते हैं, उससे पहाड़ और पर्यटक स्थल का माहौल दूषित होता है. आमतौर पर देखा जाता है कि पर्यटक जहां घूमने जाते हैं, वहां गंदगी कर देते हैं. जैसे खाने पीने का पैकेट इधर-उधर डाल देते हैं. इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है.
ताकि पहाड़ का पर्यावरण स्वस्थ रहे और पर्यटकों को पहाड़ में स्वच्छता का आभास हो सके, इसी के लिए जीटीए से अनुमोदन प्राप्त करके स्थानीय कुछ कमेटियां स्वच्छता कार्यक्रम चलाती है. इसके बदले में ही पर्यटकों से पैसे लिए जाते हैं. लेकिन कुछ पर्यटक इसे समझते नहीं है और बेवजह विवाद का विषय बना देते हैं. अब यह वैध है या अवैध, इसको बहस का विषय नहीं बनाकर यह सोचना चाहिए कि यह पर्यटकों और पहाड़ के हित में ही होता है.
अगर पर्यटक गंदगी ना करें, खाने पीने के पैकेट, पानी की खाली बोतल या अन्य दूषित चीज सही स्थान पर डालें तो पहाड़ व पर्यटक स्थल भी स्वच्छ रहता है. लेकिन अमूमन ऐसा होता नहीं है. इस संदर्भ में हाल ही में कालिमपोंग और सिक्किम घूमने आई बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडणेकर ने ठीक ही कहा है कि पर्यटकों को स्वच्छता और स्थानीय संस्कृति का सम्मान करना चाहिए. पर्यावरण को स्वस्थ रखने में पर्यटकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. यह उन्हें अच्छी तरह समझना चाहिए.
जिस तरह से वायरल वीडियो में पर्यटक के द्वारा डेयलो पार्क के महिला कर्मचारियों को धमकाया जाता है, उसे कतई सही नहीं कहा जा सकता है. इसे बेवजह बिना सोचे विचारे तूल दिया जा रहा है. इस संदर्भ में दार्जिलिंग भाजपा सांसद राजू बिष्ट का भी बयान सामने आया है. उन्होंने अपने बयान में कहा है कि भले ही बंगाल में सरकार हमारी है, पर सरकार बदल जाने से जीटीए खत्म नहीं हुआ है. जीटीए की अपनी शक्ति है और GTA इसका इस्तेमाल करती है. राजू बिष्ट ने जोर देकर कहा है कि कुछ लोग बदले माहौल में खुद को भाजपाई बताकर गुंडागर्दी करना चाहते हैं. यह गलत बात है. यहां किसी को भी गुंडागर्दी की छूट नहीं दी जाएगी.
राजू बिष्ट का इशारा पर्यटकों की भाषा शैली और अनावश्यक विवाद को लेकर था. पहाड़ की संस्कृति और स्वच्छता के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है. अगर स्वच्छता के नाम पर स्थानीय कमेटी जो GTA के द्वारा ही निर्धारित की जाती है, 10-20 रुपए ले लेती है तो यह पैसा GTA के द्वारा वापस कर्मचारियों को दिया जाता है, जो उनकी रोजी-रोटी का भी साधन है. पर्यटकों को पर्यटन का तभी मजा आता है, जब परिवेश स्वच्छ हो और वातावरण में शांति और स्वच्छता बनी रहे. पर्यटकों के लिए भी कुछ नियम बनाए गए हैं. उन्हें किसी भी पर्यटक स्थल पर नियमों का जरूर ध्यान रखना चाहिए और मर्यादा में रहना चाहिए.
