भूत प्रेत होते हैं या नहीं, यह बहस का विषय है. हालांकि विज्ञान भूत प्रेत से जुड़ी कथा कहानियों को बकवास मानता है. विज्ञान के अनुसार भूत प्रेत का कोई वजूद नहीं होता है. लेकिन विज्ञान के इस युग में भी आज भी ऐसे लोगों की तादाद कम नहीं है, जो भूत प्रेत झाड़ फूंक में भी विश्वास करते हैं. सच क्या है, यह तो पता नहीं. परंतु भूत प्रेत की कहानियों से जुड़े बंगाल के एक गांव की दास्तान से आपको रूबरू कराते हैं.
गांव का नाम चालिबाड़िरडिही है. यह गांव बांकुड़ा जिले में पड़ता है. आबादी शून्य इस गांव में महज एक परिवार रहता है. यह परिवार है लक्ष्मण बाउड़ी का. एक समय इस गांव की आबादी देखने लायक थी. बहुत से परिवार यहां बस गए थे. गांव में चहल-पहल रहती थी. लेकिन तभी इस गांव को किसी की नजर लग गई. गांव में महामारी का प्रकोप हुआ. एक-एक कर लोग चलते बसे. अनेक लोगों की मौत हो गई. लगभग पूरा गांव श्मशान में तब्दील हो गया. जो बच गए वह अन्यत्र चले गए.लेकिन जो रह गए, उनका कोई वजूद नहीं बचा.
इस गांव को लेकर कई तरह की कथा कहानियां कही जाती है. आसपास के लोग भुतहा गांव कहते हैं.शाम होते ही यह गांव अंधेरे में डूब जाता है. अजीब अजीब सी आवाज़ आती है. जानवरों के शोर और विचित्र सी आवाज रोगटे खड़े कर देती है. जैसे-जैसे रात गहराती जाती है, एक रहस्यमय शोर बढता जाता है. आवाज कैसे आती है, कहां से आती है, यह कोई नहीं जानता है. लक्ष्मण बावड़ी का परिवार इसी माहौल में जीता है. लेकिन अब उन्हें जैसे इस माहौल में जीने की आदत पड़ चुकी है. इसलिए उन्हें डर नहीं लगता.
एक लोकप्रिय हिंदी दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट के अनुसार 1982 से ही यह गांव भुतहा बना हुआ है. हमेशा कुछ ना कुछ अजीब सी हरकतें होती रहती है. इसी साल लक्ष्मण बावड़ी ने यहां अपना घर बनाया था. उनकी देखा देखी कम से कम 10-15 परिवार भी बस गए. ऐसा लगा कि अब सब ठीक हो जाएगा. लेकिन फिर इस गांव में एक अनहोनी घट गई. एक स्त्री ने अपने ही एक बच्चे की हत्या कर डाली. ऐसा लोगों का कहना है.
यह घटना लगभग 10 वर्ष पहले घटी थी. इस घटना को भूत प्रेत से जोड़कर देखा गया. इसका परिणाम यह हुआ कि एक लक्ष्मण बावड़ी के परिवार को छोड़कर शेष परिवार के लोग गांव छोड़कर चले गए और उसके बाद वापस नहीं लौटे. इस गांव के आसपास में बसे लोग बताते हैं कि इस गांव में जिस तरह का सन्नाटा छा जाता है उससे उन्हें भूत प्रेत का एहसास होता है. हालांकि उन्हें पता नहीं है कि भूत प्रेत भी कुछ होता है.
लोगों में व्याप्त दहशत और भूत प्रेत से जुड़ी धारणा को लेकर विशेषज्ञ बताते हैं कि वास्तव में भूत प्रेत कुछ होता ही नहीं है. प्राचीन काल में जब विज्ञान उन्नत नहीं था, तब हमारे समाज में अंधविश्वास और भूत प्रेत का बोलबाला था.आज यह सब नहीं है. परंतु यह पूरी तरह सच नहीं है. क्योंकि आज भी ग्रामीण इलाकों में भूत प्रेत आदि तत्व मौजूद हैं. इसके प्रमाण है ओझा, जो झाड़फूंक करके ऊपरी मर्ज का इलाज करते हैं.
जो भी हो, विज्ञान के इस युग में भी चालीबाड़िरडिही जैसे गांव शापित हो गए हैं. हमारे देश में ऐसे अनेक गांव हैं. इन शापित गांवों को बचाने की जरूरत है. लोगों के दिलों दिमाग से पुरानी धारणा को निकालने की जरूरत है. इसके लिए आवश्यकता है उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित करने की. तभी गांवों का विकास हो सकेगा. आबादी बढेगी. बहरहाल,आप क्या सोचते हैं, हमें जरूर बताइएगा!
