आप सिलीगुड़ी के किसी भी बाजार में चले जाइए. हरी मिर्च से लेकर जितनी भी हरी सब्जियां हैं, उनका भाव सुनकर आपका दिमाग हिल जाएगा. खुदरा बाजार में हरी मिर्च 150 से ₹200 किलो बिक रही है तो शिमला मिर्च का भाव ₹200 किलो तक पहुंच गया है. बाजार में कोई भी हरी सब्जी 70-80 रुपए प्रति किलो से कम नहीं बिक रही है.
आखिर हरी सब्जियों की कीमत में आग क्यों लगी हुई है? इसके कई कारण हैं. लेकिन कारण जानने से पहले उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहे दबाव और उपभोक्ताओं की हालत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. उपभोक्ता काफी परेशान हैं. महंगी सब्जियां खरीदना उनके लिए आसान नहीं है. नया बाजार सब्जी मार्केट में सब्जी खरीदने आए एक उपभोक्ता ने बताया कि ₹500 की सब्जी में थैला भी नहीं भरता है. महीने का पूरा बजट बिगड़ रहा है.
एक अन्य उपभोक्ता ने बताया कि एक तो सिलीगुड़ी में वायरल बुखार से लोग पहले से ही परेशान हैं. दवा और डॉक्टर में हजारों लग रहे हैं. ऊपर से डॉक्टर कहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां खाओ. अब सब्जियों की कीमत इतनी ज्यादा हो गई है कि क्या डॉक्टर को दें, क्या दवाई लें और क्या हरी सब्जियां खाएं? समझ में नहीं आता. सच,सब्जियों की महंगाई उन्हें रुलाने लगी है.
दूसरी ओर,सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि सब्जियों की महंगाई कोई नई बात नहीं है. बरसात के दिनों में सब्जियों की कीमत में आग लगी जाती है. क्योंकि बरसात में खेतों में लगी फसल पानी में तबाह हो जाती है. इसके अलावा खेतों से फसल को बाजार तक पहुंचाने में विक्रेता को ज्यादा खर्च करना पड़ता है. इस समय बाहर से भी माल नहीं आता, जिस कारण सब्जियों की बाजार में किल्लत हो जाती है. यह सच है कि बरसात के दिनों में सब्जियां महंगी हो जाती हैं. लेकिन सब्जियों की यह महंगाई रातों-रात नहीं होती, जिस तरह की आज सिलीगुड़ी के बाजारों में देखी जा रही है.
बहुत से लोगों का आरोप है कि सब्जी विक्रेता खासकर खुदरा दुकानदार मनमाना दाम वसूल कर रहे हैं. वे बाजार में सब्जियों की कृत्रिम किल्लत दिखाकर मोटा मुनाफा वसूल कर रहे हैं. लोगों ने यह भी बताया कि सिलीगुड़ी के अलग-अलग बाजारों में हरी सब्जियों की कीमत अलग-अलग है. इस तरह की कई शिकायतें सिलीगुड़ी पुलिस की एनफोर्समेंट ब्रांच को भी मिली है. बंगाल सरकार ने भी पुलिस और खाद्य अधिकारियों को सब्जियों की महंगाई पर नियंत्रण के लिए कार्रवाई करने को कहा है.
इसके बाद पुलिस प्रशासन ने सब्जियों की कीमत में अचानक बढ़ोतरी के कारणों की जांच शुरू कर दी है. सिलीगुड़ी एनफोर्समेंट ब्रांच की टीम ने पिछले दिनों चंपासारी, निवेदिता रोड, विधान मार्केट, बागराकोट आदि बाजारों में सब्जियों के खुदरा मूल्य का जायजा लिया है.अब पुलिस की टीम सिलीगुड़ी की थोक मंडी रेगुलेटेड मार्केट में सब्जियों के थोक भाव से खुदरा मूल्य की समीक्षा करेगी. उसके पश्चात आवश्यक कार्रवाई करने का संकेत दे चुकी है.
सिलीगुड़ी के विभिन्न खुदरा बाजारों में हरी सब्जियों की औसत कीमत कुछ इस तरह से है. भिंडी 80 से ₹90 प्रति किलो, बैंगन ₹80 प्रति किलो, शिमला मिर्च 180 से ₹200 प्रति किलो, एक लौकी 40 से ₹50 ,अदरक ₹250 प्रति किलो, करेला 80 से 90 रुपए प्रति किलो, परवल ₹80 से 90 रुपए प्रति किलो, टमाटर का मूल्य ₹60 से ₹80 प्रति किलो, बंधा गोभी ₹60 प्रति किलो आदि सिलीगुड़ी के खुदरा बाजार में उपलब्ध है.
इन हरी सब्जियों की कीमत एक हफ्ते पहले इतनी ज्यादा नहीं थी. जबकि उस समय भी बरसात हो रही थी. फिलहाल बारिश तो रोज हो रही है लेकिन बाढ वाली स्थिति नहीं है. ऐसी बारिश में खेतों में सब्जियां गल नहीं सकती हैं. इसलिए अधिकारियों और पुलिस टीम को लगता है कि कुछ व्यापारी हरी सब्जियों की जमाखोरी में लिप्त हैं और उन्होंने भारी मुनाफा कमाने के लिए जानबूझकर सब्जियों की किल्लत उत्पन्न कर दी है.
सूत्रों ने बताया कि पहले तो अधिकारी वस्तु स्थिति का पता लगाएंगे. अगर ऐसा लगा कि लोगों के आरोप सही है और जांच में किसी भी व्यापारी की जमाखोरी पकड़ी जाती है तो पुलिस संबंधित व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है. राज्य सरकार के निर्देश के बाद स्थानीय प्रशासन ने भी बाजार पर निगरानी बढा दी है. उधर नक्सलबाड़ी ब्लॉक प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने भी बाजारों में एक विशेष अभियान चलाया और सब्जी, मछली तथा किराना दुकानों का निरीक्षण किया है.
सिलीगुड़ी से लेकर अन्य स्थानों में भी आने वाले एक-दो दिनों में पुलिस और अधिकारियों की कार्रवाई तेज होने वाली है. कालाबाजारी करने वाले तथा अधिक से अधिक मुनाफा करने वाले व्यापारी, छोटे और बड़े दुकानदार पकड़े जा सकते हैं. सिलीगुड़ी प्रशासन ने लोगों की मजबूरी का फायदा उठाने वाले सभी दुकानदारों को चेतावनी दे दी है. अब देखना होगा कि प्रशासनिक अधिकारी आने वाले समय में सब्जियों की महंगाई पर नियंत्रण के लिए और कौन से कदम उठाते हैं.
