हमारे देश में रेप और मर्डर के आरोपी का जब कोर्ट में अपराध साबित हो जाता है, तब दोषी को सश्रम आजीवन कारावास और कुछ मामलों में मृत्युदंड की सजा भी दी जाती है. लेकिन कोर्ट की प्रक्रिया काफी लंबी चलती है. सबूत और गवाह जुटाने पड़ते हैं. तारीख पर तारीख के अलावा जांच अधिकारी को कोर्ट में आरोप साबित करने में पसीने निकलने लगते हैं. अधिकतर मामलों में तो ऐसे आरोपी जमानत भी पा लेते हैं. ऐसे में पीड़ित को इंसाफ नहीं मिल पाता है.
कभी-कभी देखा जाता है कि पीड़ित पक्ष व समर्थक तत्काल इंसाफ की मांग में या तो कोर्ट या पुलिस थानों का घेराव करने लगते हैं या फिर कभी-कभी जब आरोपी को अदालत में पेश किया जाता है, तब उस समय पीड़ित पक्ष अथवा आरोपी के कारनामों से गुस्साए लोग सीधे आरोपी पर हमला कर देते हैं. सिलीगुड़ी कोर्ट में इस तरह के कई मामले पूर्व में घटित हो चुके हैं, जहां आरोपी की जान पर बन आयी थी. स्पष्ट है कि पीड़ित पक्ष तो तुरंत हिसाब चाहता ही है, आम लोग भी यही चाहते हैं.
अगर भारत को छोड़ दे तो दुनिया के कई देशों में tit for tat यानी जैसे को तैसा सजा देने का प्रावधान है. जैसे अरब देशों में हत्या और बलात्कार के मामलों में दोषी को तुरंत फांसी दी जाती है. भारत में कानून सम्मत और संविधान सम्मत कार्रवाई की जाती है. हमारे कानून में कई प्रावधान तथा जटिलताओं के चलते पीड़ित व्यक्ति को इंसाफ मिलने में काफी विलंब होता है. कदाचित इसलिए इंसाफ पीड़ित को इंसाफ और न्याय दिलाने की कोशिश में पुलिस कुछ और तरीका ढूंढ लेती है. पुलिस की कार्यशैली को कहीं ना कहीं सरकार का समर्थन भी प्राप्त होता है.
उत्तर प्रदेश में योगी मॉडल पूरे भारत में प्रसिद्ध है. इस प्रदेश में एनकाउंटर की घटनाएं सर्वाधिक हुई हैं. यानी दोषी को बचाने का कोई मौका दिए बगैर उसे सीधा ठोक दो. मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी संकेत में भी कह चुके हैं कि संगीन मामलों का अपराधी बचना नहीं चाहिए. उत्तर प्रदेश या तो बुलडोजर या फिर एनकाउंटर के लिए जाना जाता है और वहा इसके कारण व्याप्त शांति और अपराधियों में दहशत का उदाहरण भी दिया जाता है.
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी योगी आदित्यनाथ को अपना आदर्श मानते हैं और उनके योगी मॉडल की कई बार प्रशंसा भी कर चुके हैं. ऐसा लगता है कि बंगाल में भी ‘अपराधी’ को तुरंत सजा देने का मॉडल अपनाने की कोशिश की जा रही है. इससे पहला राज्य में अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर मॉडल को अपनाया जा चुका है. सिलीगुड़ी इसका उदाहरण है.
राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद जुलाई से लेकर अक्टूबर 2026 के बीच राज्य में रेप और मर्डर के मामले में अब तक 2 पुलिस एनकाउंटर की पुष्टि हो चुकी है. पहला एनकाउंटर 8 जुलाई 2026 को तब हुआ था, जब दक्षिण 24 परगना के बरूईपुर इलाके में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार और हत्या के आरोपी प्रभास मंडल को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था. पुलिस के अनुसार आरोपी सीन recreate करने के दौरान हथियार छिनकर भागने की कोशिश कर रहा था. तब यह राज्य में चर्चा का विषय बना था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए थे.
ठीक इसी तर्ज पर अब दूसरा एनकाउंटर सामने आया है. 27 अक्टूबर 2026 को घटी घटना ने यह चर्चा छेड़ दी है कि क्या बंगाल एनकाउंटर के मामले में दूसरा उत्तर प्रदेश बनने जा रहा है? इस मामले का आरोपी प्रहलाद दास को पुलिस ने तब एनकाउंटर में मार गिराया, जब वह 11वीं की छात्रा से बलात्कार और हत्या को अंजाम देने के बाद पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश कर रहा था. पुलिस ने उसे तब मार गिराया,जब वह घटनास्थल पर सीन रीक्रिएट करने के दौरान पुलिस का हथियार छिनकर पुलिस पर गोली चलाने की कोशिश कर रहा था. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया.
ऐसा नहीं है कि बंगाल में केवल भाजपा सरकार में ही एनकाउंटर हुआ है पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस की सरकार में भी समय-समय पर विभिन्न अपराधियों अथवा गैंगस्टर के खिलाफ चित्रकूट पुलिस मुठभेड़ हुए हैं जैसे 2000 25 में चोपड़ा में सजग आलम का एनकाउंटर हुआ था न्यू टाउन में पुलिस ने गैंगस्टर का एनकाउंटर किया था पर भाजपा की चर्चा इसलिए हो रही है कि अभी इस सरकार के सत्ता में आए केवल 5 महीने ही हुए हैं और एनकाउंटर की दो घटनाएं घट चुकी है.
