अलीपुरद्वार: बीरपाड़ा स्टेट जनरल अस्पताल में इलाज कराने पहुंची एक महिला ने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक पर दुर्व्यवहार और धमकी देने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना के दौरान भाषा और उनकी पहचान को लेकर भी कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई।
ढेकलापाड़ा निवासी दीपिका छेत्री के अनुसार, शुक्रवार को वह अपनी बेटी को इलाज के लिए अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में लेकर पहुंची थीं। उनका आरोप है कि वहां मौजूद चिकित्सक डॉ. शंकर मजूमदार ने बातचीत के दौरान उनसे बंगला भाषा में बात करने को लेकर सवाल किया। दीपिका का कहना है कि उन्होंने बताया कि वह कुछ हद तक बंगला समझ और बोल सकती हैं, लेकिन पूरी तरह बंगला में बातचीत करने में उन्हें कठिनाई होती है।
दीपिका के आरोप के मुताबिक, इसके बाद बातचीत का माहौल तनावपूर्ण हो गया और चिकित्सक की ओर से उनकी भाषाई एवं पहचान संबंधी पृष्ठभूमि को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि उन्हें धमकी भरे लहजे में चुनौती दी गई और कथित तौर पर कहा गया कि वे चाहें तो लोगों को लेकर आएं और जो करना है कर लें।
दीपिका का दावा है कि इस तरह के व्यवहार का सामना उन्हें पहले भी करना पड़ा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
घटना की जानकारी स्थानीय लोगों और कुछ युवाओं तक पहुंचने के बाद मामले को अस्पताल प्रशासन के समक्ष उठाया गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित चिकित्सक से घटना को लेकर पूछताछ भी की गई। उनके अनुसार, बातचीत के दौरान चिकित्सक ने कथित तौर पर अपनी ओर से कही गई किसी बात पर खेद जताते हुए माफी मांगी। हालांकि, इस संबंध में चिकित्सक की ओर से कोई आधिकारिक लिखित बयान सामने नहीं आया है।
मामले को लेकर आगोसस के अध्यक्ष सघन मोक्तान ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि भाषा और पहचान जैसे संवेदनशील विषयों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी सामाजिक तनाव का कारण न बने।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बीरपाड़ा क्षेत्र विभिन्न भाषाओं, समुदायों और संस्कृतियों के लोगों के बीच सामाजिक समन्वय के लिए जाना जाता है। ऐसे में अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों और उनके परिजनों के साथ संवाद और व्यवहार को लेकर उठे किसी भी सवाल की निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है।
फिलहाल डॉ. शंकर मजूमदार या बीरपाड़ा स्टेट जनरल अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज हुई है या नहीं, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल मामला एक शिकायत और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। चिकित्सक और अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आने तथा किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
