अगर खुफिया एजेंसी नहीं होती तो क्या होता? असुरक्षा, अशांति, हिंसा और जान माल का भारी नुकसान होता. किसी भी व्यक्ति के चेहरे पर नहीं लिखा होता है कि वह आतंकवादी है. यह खुफिया विभाग के लोग ही होते हैं जो व्यक्ति की गतिविधियों से एक संभावित अनुमान लगा लेते हैं और फिर उसके पीछे पड़ कर उस व्यक्ति की कुंडली तक मालूम कर लेते हैं.
हावड़ा के पिलखाना में रहने वाले मोहम्मद हामिद को देखकर कोई नहीं बता सकता था कि यह व्यक्ति पाकिस्तान ISI आतंकवादी संगठन का हैंडलर है और जैश- ए -मोहम्मद नामक खतरनाक आतंकवादी संगठन से जुड़ा है. मोहम्मद हामिद के परिवार में उसकी पत्नी, दो बेटे और एक बेटी थी. पूरा परिवार पिलखाना में किराए के मकान में रहता था. दुनिया को दिखाने के लिए मोहम्मद हामिद एक कपड़ा फैक्ट्री में काम कर रहा था.
भारत की खुफिया एजेंसियों के काम करने का तरीका एक आम व्यक्ति की कल्पना से बाहर का होता है. किसी व्यक्ति या आतंकवादी तक पहुंचने के लिए खुफिया एजेंसियां विभिन्न खुफिया स्रोतों का इस्तेमाल करती हैं. जब उन्हें लगता है कि कहीं ना कहीं कुछ गड़बड़ है तब उनका ऑपरेशन शुरू होता है. पिछली कई वारदातों अथवा आतंकवादी घटनाओं में खुफिया एजेंसियों ने अपने तरीके से किसी व्यक्ति या संगठन या आतंकवादी के खिलाफ साक्ष्य एकत्र करके वक्त से पहले ही आतंकवादियों को गिरफ्तार करके वारदात की योजना को विफल कर दिया था.
आज ये बातें इसलिए हो रही है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की जान को खतरा है. खुफिया एजेंसी ने बर्दवान से जिस शख्स को गिरफ्तार किया है, उसके बारे में यहां तक कि उसके पड़ोसियों ने भी नहीं सोचा था कि यह पाकिस्तान के एक कुख्यात आतंकवादी संगठन का आतंकवादी है, जो पाकिस्तान से प्रशिक्षित होकर बंगाल सिर्फ इसलिए भेजा गया था ताकि वह शुभेंदु अधिकारी की हत्या का मार्ग प्रशस्त कर सके. यानी मुख्यमंत्री अधिकारी की हत्या की राह आसान कर सके.
इसके लिए उसने अपने रहने, खाने और अन्य गतिविधियों का जो तौर तरीका अपनाया, उसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे. आप दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे.पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी जैसे आतंकवादियों की हिट लिस्ट में शामिल हो गए हैं. प्रखर हिंदुत्ववादी नेता के रूप में पहचान बना चुके सुबेंदु अधिकारी को पाकिस्तानी आतंकवादियों से खतरा है. खुफिया एजेंसियों ने पहले भी आगाह किया था और अब तो इसके प्रमाण भी मिल गए हैं.वर्धमान में पुलिस ने एक ऐसे आतंकवादी को गिरफ्तार किया है जो जैश ए मोहम्मद से संबंध रखता है. उसका नाम मोहम्मद हामिद है.
मोहम्मद हामिद अनेक वर्षों से बंगाल में रह रहा था. वह अपने आतंकवादी संगठन के आका के इशारे पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की रेकी के साथ ही उनके मर्डर की प्लानिंग कर रहा था. क्योंकि वह बंगाल में दूसरे बंगाली परिवारों की तरह ही गृहस्थ जीवन जी रहा था , इसलिए किसी को भी उस पर संदेह नहीं हो रहा था. किसी भी तरह से उस पर संदेह नहीं किया जा सकता था. ना तो उस पर पहले से कोई आरोप थे और ना ही वह अपने आसपास पड़ोस में किसी से कोई मतलब रखता था.
हामिद हावड़ा के पिलखाना में स्थित एक कपड़ा कारखाने में नौकरी करता था और पिलखाना में ही रहता था. लेकिन उसका एक ही मिशन था चुपचाप बंगाल सरकार की गतिविधियों खासकर मुख्यमंत्री की गतिविधियों पर सतर्क दृष्टि रखना, उनके आने-जाने के रास्ते, यहां तक कि सुवेंदु अधिकारी कब किस गाड़ी में कहां जा रहे हैं, उनका वाहन में बैठने का अंदाज, गाड़ी कहां से कहां जा रही है, गाड़ी का चालक कौन है और वह किन कपड़ों में है, मुख्यमंत्री किन कपड़ों में है, उनकी सुरक्षा व्यवस्था कैसी है, मुख्यमंत्री की गाड़ी को कहां पार्क किया जाता है, इत्यादि बहुत सी बातों को हामिद सीमा पार पाकिस्तान पहुंचाता था.
कोई 10 साल पहले पाकिस्तान से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मोहम्मद हामिद समाज को दिखाने के लिए अपने परिवार और बच्चों के साथ पिलखाना में रहते हुए रोजी-रोटी कमा रहा था. मोहम्मद हामिद के दो बेटे और एक बेटी है जो उसके साथ रहते थे. पांच लोगों का परिवार था. इसलिए किसी को भी उस पर कोई शक नहीं होता था. पास पडोस के लोग मोहम्मद हामिद के परिवार से मिलते जुलते जरूर थे. लेकिन उनपर उन्हें कभी संदेह नहीं हुआ था.
इस बीच भारतीय खुफिया एजेंसियों को भारत में सक्रिय दूसरे आतंकवादी संगठनों के सदस्यों की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद एक संपर्क चैन मिला जो सीधे मोहम्मद हामिद की ओर जाता था. ISI हैंडलर के रूप में काम करने और उसकी गतिविधियों पर संदेह होने के बाद ही भारतीय खुफिया एजेंसियों ने उस पर नजर रखनी शुरू कर दी थी. जैसे ही उसके बारे में खुफिया एजेंसियों ने पता लगाया तो जल्द पता चल गया कि उसका सज्जाद भट्ट समूह नामक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन से सीधा संबंध है.
यह वही सज्जाद भट्ट समूह है, जो सुपारी लेकर हत्या और आतंकवाद जैसी घटनाओं को अंजाम देता है. बहरहाल पुलिस ने मोहम्मद हामिद को सबूत के साथ वर्धमान के रेनेसा॔ हाउसिंग से गिरफ्तार किया है. उसके पास से पुलिस ने क्या-क्या दस्तावेज बरामद किया है, इनके बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है. दावा किया जा रहा है कि पुलिस के हाथ कुछ ऐसी सनसनीखेज जानकारी लगी है, जो अविश्वसनीय सी है. पुलिस सत्यता की पुष्टि कर रही है. खुफिया कारणों से पुलिस इनके बारे में बताने की स्थिति में नहीं है.
