सिलीगुड़ी समेत पूरे बंगाल में नई सरकार आने के बाद अवैध निर्माण या अतिक्रमण आदि के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई चल रही है. सिलीगुड़ी में हर दूसरे तीसरे दिन बुलडोजर का मुंह किसी न किसी बस्ती या मकान की ओर ही होता है. सिलीगुड़ी नगर निगम का बुलडोजर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. कब किस अवैध निर्माण पर गाज गिरेगी, यह किसी को पता नहीं है. बस फरमान आता है और बुलडोजर चल पड़ता है.
पिछले दिनों सिलीगुड़ी के संतोषी नगर इलाके में निगम की बुलडोजर कार्रवाई में एक अवैध बिल्डिंग को ढाह दिया गया. इससे पहले सेवक रोड, हिल कार्ट रोड, गुरुंग बस्ती, प्रधान नगर, चंपा सारी आदि इलाकों में सिलीगुड़ी नगर निगम के बुलडोजर में कई अवैध निर्माणों को जमींदोज कर दिया गया था.
हालांकि बुलडोजर की कार्रवाई तभी होती है, जब कोर्ट का आदेश आता है और सिलीगुड़ी प्रशासन की ओर से अवैध निर्माणकर्ता को नोटिस दिया जाता है. जब अवैध निर्माण कर्ता के द्वारा नोटिस का जवाब नहीं दिया जाता या फिर उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तब बुलडोजर अपनी कार्रवाई शुरू कर देता है.
सिलीगुड़ी में आज जितने भी अवैध निर्माण टूटे हैं, वे सभी कोर्ट के आदेश से ही खंडित हुए हैं.अब उसी कोर्ट ने एक ऐसी बात कह दी है, जिसके बाद सिलीगुड़ी नगर निगम का बुलडोजर किसी भी अवैध निर्माण के खिलाफ पहले की तरह कार्रवाई करेगा, इसमें संदेह ही है. दरअसल कलकत्ता हाई कोर्ट के जज सौगत भट्टाचार्य ने कहा है कि कोई भी अवैध निर्माण हो, निर्माण कर्ता को हटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है. किसी भी व्यक्ति की आजीविका को रातों-रात खत्म नहीं किया जा सकता है.
दरअसल सिलीगुड़ी समेत राज्य में जगह-जगह अवैध निर्माण या अतिक्रमण के खिलाफ चल रही बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट में मामला दर्ज किया गया है. मामले की सुनवाई करते हुए कोलकाता हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की है. अदालत ने कहा है कि अतिक्रमण या अवैध कब्जे का आरोप होने पर किसी भी व्यक्ति को रातों-रात आप बेघर या बेरोजगार नहीं कर सकते. न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि चाहे वह कोई दुकानदार हो या मकान मालिक, अगर वह अवैध कब्जा धारी है तो उसे हटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है.
अगर दुकानदार ने अवैध कब्जा किया है या उसने सरकारी जमीन पर अपनी दुकान बनाई है तो उसकी आजीविका को रातों-रात बुलडोजर चला कर खत्म नहीं किया जा सकता है. न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने पूछा है कि ऐसे मामलों में जेसीबी का इस्तेमाल क्या जरूरी है? उन्होंने टिप्पणी की है कि कोई संगठन या व्यक्ति कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता. अगर किसी जमीन या दुकान पर विवाद है तो उसका समाधान प्रशासन और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से करना होगा.
कोर्ट की यह टिप्पणी सिलीगुड़ी के उन व्यक्तियों के लिए राहत की बात हो सकती है, जिन्होंने सरकारी जमीन पर मकान बनाया है या दुकान बनाकर रोजी-रोटी कमा रहे हैं. प्रशासन के द्वारा उन्हें कुछ और मोहलत दी जा सकती है. कोर्ट की इस टिप्पणी से ऐसे छोटे दुकानदारों को भी राहत मिल सकती है, जिनकी दुकान को हटाने या तोड़ने का प्रशासन ने नोटिस जारी कर दिया है.
सिलीगुड़ी में ऐसे बहुत से अवैध निर्माण हुए हैं, जिनके मालिक इस समय संशय और चिंता में डूबे हुए हैं कि कब उनका निर्माण बुलडोजर की भेंट चढ़ जाएगा! अब ऐसे लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिल सकती है.
बताते चलें कि यह कोर्ट की टिप्पणी है. कोर्ट का फैसला नहीं है. यह जरूरी नहीं है कि सिलीगुड़ी प्रशासन कोर्ट की टिप्पणी से प्रभावित हो. लेकिन एक उम्मीद जरूर बंधी है कि सिलीगुड़ी प्रशासन के बुलडोजर की रफ्तार धीमी पड़ सकती है.
राज्य सरकार भी शायद इस पहलू को अच्छी तरह समझ रही है. तभी तो राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता बी. भट्टाचार्य ने अदालत को बताया है कि ऐसी विभिन्न घटनाओं में प्रशासन ने आवेदकों को उनकी जगह वापस कर दी है. यह संकेत है कि भविष्य में अवैध निर्माण या अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासनिक करवाई धीमी हो सकती है.
