प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झालमुड़ी खाई थी. यह काफी चर्चा का विषय बना था. अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर स्थित एक दुकान पर जाकर सब्जी खरीदी. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा का केंद्र बन गया और प्रधानमंत्री के ‘नहले पर दहले’ के रूप में पेश किया जा रहा है. लोगों को इसमें काफी मजा आ रहा है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हम किसी से कम नहीं की राजनीति शुरू से ही देखी जा रही है. एक ने जनता के बीच में जाकर झालमुड़ी खाई तो दूसरे ने लोगों के बीच में सब्जी और फल खरीदे. अगर चुनाव का समय नहीं होता तो ममता बनर्जी के द्वारा सब्जी खरीदने की यह घटना राजनीतिक इवेंट के रूप में नजर नहीं आती.
क्योंकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी तो अक्सर भवानीपुर में अपने घर से निकलकर सब्जी खरीदने दुकान पर जाती रहती है. इसमें कोई नयापन तो है नहीं. लेकिन यह घटना एक पॉलिटिकल इवेंट इसलिए बन गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झालमुड़ी से जनता के बीच पकड़ बनाने की अपनी रणनीति की शुरुआत की. तो भला ममता बनर्जी कैसे पीछे रहती.
राजनीति में नए-नए रंग अच्छे लगते हैं. राजनीतिक दलों के नेता हम किसी से कम नहीं की तर्ज पर जो उदाहरण पेश करते रहे हैं, लोगों को वे पसंद भी आते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में एक रैली के दौरान झालमुड़ी क्या खाई, पूरे चुनाव तक उसकी काफी चर्चा रही. उसे लोगों ने काफी पसंद किया.
नरेंद्र मोदी का झालमुड़ी खाने का अंदाज इस कदर लोकप्रिय हुआ कि टीएमसी को यह अच्छा नहीं लगा. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी चुनाव रैलियों में कई बार झालमुड़ी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यंग्य वाणों की वर्षा की. प्रधानमंत्री ने भी एक अन्य रैली में पलट कर जवाब दिया.
उन्होंने बंगाल में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि झालमुड़ी मैंने खाई लेकिन झाल टीएमसी को लगी है. इसके जवाब में ममता बनर्जी ने कहा कि टीएमसी को झाल क्यों लगेगी. उन्होंने कहा कि यह पूरा नाटक था. यह पूरा वाक्या रविवार की शाम का है जब ममता बनर्जी भवानीपुर में रोड शो करने के बाद घर की ओर लौट रही थी. उन्होंने एक दुकान पर जाकर सब्जी खरीदी.
रविवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हुगली और उत्तर 24 परगना में रोड शो कर रहे थे. ऐसा कोई भी दिन नहीं बीता है जब दोनों ही दलों की रैलियां और रोड शो में एक दूसरे के खिलाफ राजनीतिक कटुता की बात सामने नहीं आई हो. राज्य में भाजपा और टीएमसी के बीच ही मुख्य टक्कर है. दोनों ही राजनेताओं को लोग सुन रहे हैं.
देखा जाए तो ममता बनर्जी पहले भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुकी है. हाल ही में मुख्यमंत्री की पदयात्रा के दौरान कुछ प्रशंसकों ने उनके पैर छूने की कोशिश की तो सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें भगा दिया. लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें ऐसा करने से रोका था. उन दोनों में से किसे जनता ने अधिक पसंद किया, इसका फैसला तो 4 मई को होगा. लेकिन फिलहाल मुख्यमंत्री का सब्जी खरीदने का यह अंदाज प्रधानमंत्री की झालमुड़ी के जवाब के रूप में माना जा रहा है.
