पहले चरण में हिंसा की ज्यादा घटनाएं नहीं घटी थीं. लेकिन अंतिम चरण के चुनाव से पहले उत्तर 24 परगना में हुई हिंसा ने सियासी तापमान को बढ़ा दिया है. चुनाव आयोग के लिए भी यह कड़ी चुनौती बन गई है. चुनाव आयोग शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव के लिए फुल एक्शन में है.
जगदलपुर पुलिस स्टेशन के बाहर टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प में पत्थर बाजी के बाद आज आराम बाग में टीएमसी सांसद मिताली सेन की कार पर हमला हुआ. इस बीच NIA की छापेमारी में 79 देसी बम बरामद किए जा चुके हैं. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैरकपुर में रैली से पहले चुनाव आयोग के निर्देश पर NIA और सुरक्षा जांच एजेंसियों ने रेड डाला.
उत्तर 24 परगना में टीएमसी और बीजेपी के बीच जोरदार झड़प, पत्थर बाजी और बमबाजी की घटनाएं सामने आने से हड़कंप मच गया है. इसमें एक सीआईएसएफ जवान घायल हुआ है. भांगुर इलाके में टीएमसी कार्यकर्ता के घर से 79 देसी बम बरामद होने से इलाके में आतंक मच गया. NIA ने मामले की जांच शुरू कर दी है.
आरोपी को पकड़ा जा चुका है. उसका नाम अहिदुल इस्लाम है. वह दक्षिण 24 परगना जिले के एक बाजार इलाके से पकड़ा गया. सभी बमों को एक जगह पर जमा करके रखा गया था. जिन इलाकों में 29 अप्रैल को मतदान होना है, वहां के कई विधानसभा क्षेत्रों से तनाव और हिंसक झड़पों की खबरें आ रही है. भाटपारा में भी तनाव व्याप्त है. टीएमसी बनाम बीजेपी की लड़ाई चरम पर पहुंच चुकी है.
उधर पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए चुनाव प्रचार थम गया. दूसरे चरण में कुल 1448 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है. आज शाम से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और उम्मीदवारों ने जमकर चुनाव प्रचार किया. भाजपा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई चुनाव रैलियों को संबोधित किया, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, तेजस्वी यादव आदि नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस के लिए धुआंधार प्रचार किया.
29 अप्रैल को जिन क्षेत्रों में मतदान होना है, उनमें पश्चिम बंगाल के सात जिले कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली, नदिया तथा पूर्वी वर्धमान जिले शामिल हैं. यहां 142 सीटों पर मतदान होना है. मतदान केन्द्रों पर केंद्रीय बलों की कुल 2231 कंपनियां तैनात की गई है. सबसे अधिक 237 कंपनियां कोलकाता में तैनात की गई है.
अंतिम चरण का मतदान कराने के लिए पहली बार भारी संख्या में केंद्रीय कर्मियों की नियुक्ति की गई है. केंद्र सरकार के 17276 कर्मचारियों की पीठासीन अधिकारी तथा पोलिंग अधिकारी के तौर पर नियुक्ति की गई है. सबसे अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति दक्षिण 24 परगना जिले में की गई है. उत्तर 24 परगना जिले में 5680 केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है.
अब प्रश्न यह है कि 29 अप्रैल को होने वाले चुनाव से पहले ही विधानसभा क्षेत्रों में जिस तरह का भय व्याप्त हो गया है, ऐसे में मतदाता निर्भीक होकर मतदान कैसे कर सकेंगे. वह अपने घरों से किस तरह से सुरक्षित बाहर निकल सकेंगे. हालांकि चुनाव आयोग ने मतदाताओं के घरों तक सुरक्षा की कड़ी दीवार खड़ी कर दी है. इसके अलावा चुनाव आयोग की ओर से निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव के लिए और भी कई उपाय किए जा रहे हैं. मतदाताओं का भरोसा बढ़ाने के लिए भारी संख्या में केंद्रीय बल के जवान तैनात कर दिए गए हैं.
