मेहरुन्निसा काफी खुश थी. क्योंकि उसके खाते में अन्नपूर्णा भंडार की राशि ₹3000 जमा हो गई थी. वह काफी दिनों से इस राशि की प्रतीक्षा कर रही थी. उसने अपना एक बजट बनाया कि उसे ₹3000 में क्या-क्या लेना है. उसने जरूरी सामानों की एक लिस्ट बनाई और नजदीकी बैंक के सीएसपी में पहुंच गई. उसने काउंटर पर बैठे क्लर्क को अपना आधार कार्ड दिखाया और उससे रकम निकालने का आग्रह किया.
सीएसपी के क्लर्क ने मेहरुन्निसा का बायोमेट्रिक लेकर पैसे निकाल कर दे दिए. उसके बाद मेहरुन्निसा ने क्लर्क से उसका बैंक बैलेंस चेक करने के लिए कहा. जब काउंटर क्लर्क मेहरुन्निसा का बैलेंस चेक करने लगा, तो यह देखकर वह उछल पड़ा कि उसके खाते में लगभग 740 करोड़ जमा थे. वह हैरान रह गया. फिर उसने मेहरुन्निसा से कहा कि उसके खाते में 740 करोड रुपए जमा है. इस पर महिला की भी हालत खराब हो गई. यह कैसे हो सकता है! क्योंकि उसके ख्याल से 4000 से लेकर ₹5000 तक ही बैलेंस हो सकता था.
सोशल मीडिया में यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है. इस पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही है. कई तरह के सवाल भी उठाए जा रहे हैं. कुछ लोगों ने साइबर फ्रॉड के मामले से जोड़कर देखना शुरू कर दिया है तो कुछ लोग यह मानने लगे हैं कि किसी ने मेहरुन्निसा के अकाउंट का दुरुपयोग किया है. यह उसी तरह से है जैसे साइबर फ्रॉड किराए के खातों का उपयोग करते हैं. इसी से जुड़ी और इसी तरह की कुछ और घटनाएं भी सामने आई हैं, जहां खाताधारकों के खाते में करोड़ों रुपए जमा कराए गए हैं. यह सभी मामले सिलीगुड़ी के आसपास के जिलों के हैं और हैरान करने वाले हैं. आखिर सच क्या है.
मेहरुन्निसा की समझ में नहीं आ रहा था कि इतनी बड़ी रकम अचानक उसके बैंक खाते में कैसे आ गई! जल्द ही यह खबर चारों तरफ फैल गई. किसी को भी यकीन नहीं आ रहा था. लेकिन सच तो यही था कि मेहरुन्निसा के खाते में 740 करोड़ जमा थे. यह रुपए किसने जमा कराए. क्या सरकार ने गलती से उसके खाते में अन्नपूर्णा भंडार की रकम 740 करोड रुपए जमा कर दी थी या फिर किसी साइबर फ्रॉड ने उसके खाते का इस्तेमाल करके इतनी बड़ी रकम जमा कराई थी? इस तरह की कई चर्चाएं शुरू हो गई. कुछ लोगों ने माना कि बैंक में किसी तकनीकी भूल के कारण ऐसा हुआ होगा. ग्राहक सेवा केंद्र के संचालक ने भी जांच के बाद ऐसा ही माना कि सर्वर में आई तकनीकी गड़बड़ी से ऐसा हो जाता है.
सवाल सिर्फ मेहरुन्निसा का नहीं है. ऐसा कई लोगों के साथ हुआ है, जब वह बैंक से पैसे निकालने गए तो उनके खाते में करोड़ों रुपए जमा थे. जो उनके थे ही नहीं. इसके बावजूद उनके खाते में करोड़ों रुपए जमा कराए गए थे. अलीपुरद्वार जिले के योगेंद्र नगर के 60 साल के खगेश्वर वर्मन एक ऑनलाइन सेवा केंद्र मे॔ पेंशन का पैसा निकालने गए थे. उन्होंने अपने खाते से कुछ पैसे निकाल कर संचालक से खाते का बैलेंस चेक करने के लिए कहा, तो उसके भी होश उड़ गए. क्योंकि उनके खाते में भी करोड़ों की रकम जमा दिख रही थी.
और तो और, अगले दिन इसी खाते में एक बार फिर से 19 करोड रुपए जमा किए गए थे. इसी तरह का एक और मामला दिनहटा का भी है. दसवीं कक्षा के एक छात्र ने अपनी स्कॉलरशिप की राशि बैंक से निकालने के लिए बैंक पहुंचा और उसने कुछ पैसे निकाले. फिर जब उसने अपना बैंक बैलेंस चेक किया तो पता चला कि उसके खाते में 759(उनसठ) करोड, 69(उनहत्तर) लाख, 51(इक्यावन) हजार से ज्यादा रकम जमा करायी गयी थी. इतनी बड़ी रकम अपने खाते में देखकर छात्र काफी डर गया और उसने यह बात अपने पिता को बताई. फिलहाल सभी मामले पुलिस स्टेशन पहुंच चुके हैं और पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है.
पिछले एक हफ्ते में इस तरह की एक से अधिक घटनाओं ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि दावा किया जा रहा है कि बैंक तकनीकी भूल के कारण ऐसा हुआ है. परंतु इस तरह की भूल बैंक से कैसे हो सकती है. कल्पना करिए कि अगर यह रकम किसी जालसाज या साइबर फ्रॉड के हाथ लग जाती तो किसका नुकसान होता! मजे की बात तो यह है कि खाते में रकम काफी दिनों से जमा थी. लेकिन बैंक ने समय रहते उसे सुधार नहीं किया. क्या यह बैंक की लापरवाही है? अगर यह बैंक की लापरवाही है तो मामला और भी गंभीर है.
अभी तक की जांच में यह पता चला है कि खाता धारकों के खातों में कोई असामान्य लेनदेन नहीं हुआ है. मेहरुन्निसा के खाते की जांच की गई है. पता चला है कि उसमें डीबीटी के जरिए अन्नपूर्णा भंडार की केवल ₹3000 की निर्धारित राशि जमा कराई गई है. बैंक के उच्च अधिकारियों ने भी इन मामलों की पड़ताल शुरू कर दी है. बैंक के एक अधिकारी ने बताया जिस पर्ची को दिखाकर बैंक खाते में करोड़ों रुपए होने का दावा किया गया था, वास्तव में वह एक निजी बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र की पर्ची है. महिला के खाते में कोई भी असामान्य लेनदेन नहीं हुआ है.
फिलहाल मेहरुन्निसा के खाते में 4000 से कुछ ज्यादा रकम भी दिख रही है. बैंक अधिकारियों ने भी माना है कि कभी-कभी जो दिखता है, वास्तव में वह होता नहीं है. ऐसा तकनीकी गड़बड़ी से हो जाता है. बहरहाल सच्चाई क्या है, यह तो पुलिस अथवा बैंक उच्च अधिकारियों की जांच के बाद ही पता चलेगा!
