नेपाल की स्थिति अच्छी नहीं है. अगर नेपाल के उद्योग धंधों की बात करें तो नेपाल में स्टील व आयरन का उत्पादन सर्वाधिक होता है. लेकिन अपने कच्चे माल जैसे स्पंज आयरन और बिलेट के लिए वह काफी हद तक भारत पर निर्भर करता है. नेपाल में लगभग 31 से अधिक आयरन और स्टील उद्योग चल रहे हैं. देश की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 36 लाख मैट्रिक टन है. जबकि घरेलू मांग केवल 12 लाख मैट्रिक टन के आसपास है. इसलिए नेपाल को अपने उत्पाद भारत को बेचने पड़ते हैं.
नेपाल में स्टील फैक्टरी बड़ी तादाद में है, जहां हजारों लोग काम करते हैं. इन स्टील फैक्ट्रियों से स्टील का निर्यात भारत और दूसरे देशों में किया जाता है. भारत नेपाल की स्टील का सबसे बड़ा आयातक देश है. लेकिन चाय तथा दूसरे मुद्दों के बाद इन दिनों भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में गर्माहट कम देखी जा रही है.
भारत ने अपनी नई व्यापार नीति के तहत नेपाली स्टील उत्पादन के आयात पर सेफगार्ड ड्यूटी और BIS प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया है. इससे नेपाल सरकार की कमाई काफी घट गई है. आंकडों के अनुसार नेपाल को भारत की नई व्यापार नीति के कारण 10 अरब से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा है. सूत्र बता रहे हैं कि भारत नेपाली स्टील के आयात पर और ज्यादा प्रतिबंध लगा सकता है.यही कारण है कि नेपाल में उद्योगपति और व्यवसायी काफी परेशान हैं और सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह तुरंत भारत सरकार से इस संबंध में बात करे.
भारत और नेपाल के बीच पहले से ही चाय पर तनातनी बनी हुई थी. अब सेफगार्ड ड्यूटी लगाए जाने के बाद वहां स्थिति और खराब हो गई है. नेपाल की स्टील और आयरन कंपनियों का बुरा हाल है. क्योंकि उन्हें बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है. फैक्ट्री में काम करने वाले कारीगरों की नौकरी जा सकती है. अगर नेपाल के प्रधानमंत्री ने तत्काल इस पर पहल नहीं की तो नेपाल में कई उद्योग धंधे बंद हो सकते हैं, जिससे वहां लोगों का रोजगार छीनेगा. इससे देश में बेरोजगारी और गरीबी बढ़ेगी. हालांकि बालेन सरकार स्थिति पर निगरानी बनाए हुए है.
पहले से ही नेपाल मंदी में चल रहा है. नई सरकार ने वहां कई चीजों पर प्रतिबंध लगा दिया है या फिर टैक्स लगा दिया है जिसे सामान्य बोलचाल की भाषा में भंसार शुल्क कहते हैं. भारत नेपाल की सीमा पर रहने वाले दोनों ही देश के लोग इस दंश को झेल रहे हैं. अब यह नया तूफान उठ खड़ा हुआ है, जो सीधे-सीधे नेपाल की अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है. नेपाल की कंपनियों का दावा है कि पिछले 11 महीने में 10 अरब से ज्यादा नेपाली रुपए की उनकी कमाई घटी है.
नेपाली उत्पादों को भारत में निर्यात करने वाले उद्योगपतियों का साफ कहना है कि अगर सरकार ने फौरन कुछ नहीं किया तो उनके यहां काम करने वाले मजदूर और कारीगरों की नौकरी जा सकती है. नेपाल भारत को आयरन और स्टील का निर्यात करके अरबों रुपए की कमाई करता है. लेकिन भारत के द्वारा सेफ गार्ड ड्यूटी लगाए जाने और BIS प्रमाण पत्र अनिवार्य करने के बाद नेपाल की कमाई में 68% से ज्यादा की गिरावट आई है. यानी सीधे-सीधे नेपाल की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है.
नेपाली अखबार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की नई व्यापार नीति नेपाल पर काफी भारी पड़ रही है. इससे नेपाल का उद्योग चौपट हो सकता है. नेपाल में बेरोजगारी बढ़ेगी. ताकि स्थिति और ज्यादा खराब ना हो सके, नेपाल के प्रधानमंत्री को जल्द ही भारत सरकार से बात करनी चाहिए.उधर नेपाल की कंपनियों में भारत सरकार द्वारा सेफगार्ड ड्यूटी लगाए जाने को अनैतिक बताया है.उनका कहना है कि नेपाल अभी विकसित देशों में शामिल नहीं हुआ है, ताकि इस तरह की ड्यूटी वहां लगाई जा सकती है.
आपको बताते चलें कि नेपाल प्रत्येक साल भारत को 145932 टन आयरन और स्टील का निर्यात करता है. इसकी कीमत 16 अरब से ज्यादा नेपाली रुपए होती है. नेपाल की कंपनियों ने मांग की है कि बालेन सरकार तुरंत भारत से बात करे और आयरन तथा स्टील उत्पादों पर से ड्यूटी हटाने के लिए भारत से अनुरोध करे. इससे पहले बालेन सरकार के अनुरोध पर भारत ने चाय विवाद में नेपाल को राहत दी थी.
अब देखना होगा कि चाय की तरह ही भारत स्टील और आयरन आयात मुद्दे पर नेपाल को राहत देता है या नहीं?
