October 9, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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रोजी-रोटी की चिंता में डूबे सिलीगुड़ी के साउंड सिस्टम कारोबारी!

कोई भी सांस्कृतिक अथवा रंगारंग कार्यक्रम हो, उसमें साउंड सिस्टम का होना आवश्यक होता है. यह साउंड सिस्टम ही होता है, जिसके जरिए कलाकारों या किरदारों की बात कार्यक्रम में उपस्थित अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती है. लेकिन जब साउंड सिस्टम ही नहीं हो तो ऐसे में कार्यक्रम की सफलता की क्या उम्मीद की जा सकती है!

सिलीगुड़ी शहर में अब तक दुर्गा पूजा के दौरान विसर्जन से लेकर अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक जितने भी आयोजन हुए हैं, उनमें डीजे या साउंड सिस्टम का बजना लाजमी होता है. लेकिन पहली बार राज्य सरकार ने पूजा के दौरान डीजे सिस्टम पर प्रतिबंध लगाया है. डीजे साउंड सिस्टम का ही एक भाग है. इस बार सिलीगुड़ी प्रशासन ने साउंड सिस्टम के कारोबारियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे पूजा के दौरान डीजे नहीं बजाएंगे.

सरकार और स्थानीय प्रशासन के फैसले से साउंड सिस्टम के कारोबारी चिंता में है कि ऐसे में उनकी रोजी-रोटी कैसे चलेगी. सिलीगुड़ी में हजारों साउंड सिस्टम के कारोबारी हैं, जो किराए पर साउंड सिस्टम देते हैं. इस कारोबार में अकेले सिलीगुड़ी शहर में ही एक अनुमान के अनुसार 800 से 1000 लोग जुड़े हुए हैं, जिनकी रोजी-रोटी साउंड सिस्टम से ही चलती है. अब पूजा में उनकी कमाई कैसे होगी, इस बात की उन्हें ज्यादा चिंता सता रही है. यह स्थिति केवल सिलीगुड़ी में ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में है

उनकी चिंता इस बात को लेकर भी है कि अगर पूजा के दौरान डीजे नहीं बजेगा तो फिर अन्य साउंड सिस्टम क्या होगा, इस बारे में प्रशासन ने अब तक कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं दिया है. यही कारण है कि साउंड सिस्टम के कारोबारी दुर्गा पूजा समितियों तथा अन्य संगठनों से बुकिंग ऑर्डर नहीं ले रहे हैं. राज्य सरकार ने सिर्फ इतना कहा है कि पूजा के दौरान डीजे बजाने पर प्रतिबंध होगा. लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि अगर डीजे नहीं बजाया जाएगा तो फिर अन्य साउंड सिस्टम क्या होगा, जिसका इस्तेमाल पूजा के उपलक्ष में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में किया जाएगा.

दुर्गा पूजा के उपलक्ष में अनेक सामाजिक और धार्मिक संगठन विभिन्न सांस्कृतिक और कलात्मक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं. ये संगठन साउंड सिस्टम के कारोबारी से संपर्क करते हैं और उनका साउंड सिस्टम किराए पर लेते हैं. अब जब स्थानीय प्रशासन ने इस संदर्भ में कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं दिया है, तो वह किस प्रकार से और कौन सा साउंड सिस्टम बुक कर सकते हैं. जैसी स्थिति दुर्गा पूजा समितियो या संगठनों की है, वैसी ही असमंजस स्थिति साउंड सिस्टम के कारोबारियों की भी है.

सिलीगुड़ी के साउंड सिस्टम संगठन से लेकर राज्य के विभिन्न जिलों के साउंड संगठनों ने कहा है कि वे राज्य सरकार के निर्देशों का पालन करने के लिए तैयार हैं. लेकिन कम से कम सरकार को यह बताना चाहिए कि अन्य प्रकार के साउंड सिस्टम जैसे माइक्रोफोन का इस्तेमाल, साउंड बॉक्स का इस्तेमाल, साउंड बॉक्स की संख्या, ध्वनि डेसीबल इत्यादि का पैमाना क्या हो, इत्यादि के बारे में प्रशासन के द्वारा कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया गया है. यह तो सभी जानते हैं कि केवल 65 डेसीबल की ध्वनि सीमा में कोई भी सांस्कृतिक कार्यक्रम सफलता पूर्वक आयोजित नहीं किया जा सकता है.

आयोजन या अनुष्ठान जितना बड़ा होगा, उतनी ही बड़ी संख्या में साउंड बॉक्स भी लगाने पड़ते हैं. कई ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं जहां डीजे की धुन कार्यक्रम को सफल बनाती है. उत्सव के दौरान श्रोता झूमना पसंद करते हैं और डीजे इसमें कारगर होती है. सिलीगुड़ी के साउंड सिस्टम के कारोबारी चाहते हैं कि सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से उनका मार्गदर्शन किया जाए और विभिन्न पहलुओं पर विचार करके स्पष्ट दिशा निर्देशिका जारी की जाए. ताकि पूजा के बाजार में उनकी रोजी-रोटी पर ज्यादा असर न पड़े. अब देखना है कि साउंड सिस्टम के कारोबारियों की चिंता का प्रशासन कैसे समाधान करता है!

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