सिलीगुड़ी की सड़कों पर रफ्तार का कहर, बस्ती इलाकों में बदमाशों का आतंक, नूतन पाड़ा में खुलेआम ड्रग्स बेचते और नशा करते कुछ सिरफिरे लड़के, राह चलती लड़कियों एवं महिलाओं पर अश्लील कमेंट करते मनचले, माटीगाड़ा में बदमाशों के डर से राह बदलकर चलती महिलाएं एवं लड़कियां, सिलीगुड़ी शहर के ये कुछ ऐसे मुखड़े हैं, जो वर्तमान में सिलीगुड़ी की सुंदर तस्वीर पर बदनुमा दाग बन रहे हैं.
सिलीगुड़ी में रफ्तार का कहर तो ऐसा है कि हाल ही में खबर समय के स्वामी एवं संपादक श्री संजय शर्मा की प्रेस लिखी कार तक को सेवक रोड पर हिट कर दिया गया. हादसे में वे बाल-बाल बच गए. हिट करने वाला आसानी से फरार हो गया. जरा सोचिए, जब एक प्रेस की गाड़ी भी सुरक्षित नहीं है, तो आम लोगों की क्या बात! पिछले 1 साल में सेवक रोड पर छोटे बड़े दर्जनों हादसे हो चुके हैं. सेवक रोड से लेकर हिलकार्ट रोड, वर्धमान रोड या सिलीगुड़ी का कोई भी रोड, सब जगह आपको रफ्तार का कहर देखने को मिलेगा.
लोगों की शिकायत है कि ट्रैफिक पुलिस सिर्फ उतना ही करती है, जितना उसे निर्देश मिला होता है. वर्तमान में ट्रैफिक पुलिस अवैध और अनियमित टोटो की धर पकड़ कर रही है. लेकिन रफ्तार का कहर रोकने पर पुलिस का कोई ध्यान नहीं है. शराब माफिया और ड्रग्स तस्करों का आतंक तो ऐसा है कि हाल ही में सिलीगुड़ी नगर निगम के पांच नंबर वार्ड के अंतर्गत नतूनपाड़ा इलाके में एक व्यक्ति के घर के सामने ही कुछ लड़के ड्रग्स का नशा कर रहे थे. जब उन्हें नशा करने से रोकने की कोशिश की गई तो उन्होंने घर की महिलाओं एवं बहू बेटियों से मारपीट कर डाली और कहा कि सड़क किसी के बाप की नहीं है.
माटीगाड़ा इलाके में तो और भी बुरा हाल है. यहां एक बस्ती है खोलाईबख्तरी. इस बस्ती के लोग खासकर बहन बेटियां बदमाशों के डर से रास्ता चलना छोड़ देती हैं. यहां के लोग बताते हैं कि बदमाशों की गुंडागर्दी के खिलाफ कई बार माटीगाड़ा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई. लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है. पुलिस तभी कार्रवाई करती है, जब घटना घट जाती है.
माटीगाड़ा की इस बस्ती और इसकी जैसी अनेक बस्तियों में अपराध और बदमाशों की कई कहानियां विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आए दिन देखी जाती हैं. यहां के बदमाशों को पुलिस और कानून से कोई खौफ नहीं है. लोग तो यहां तक कहते हैं कि ये बदमाश थाने को अपनी जेब में रखते हैं. इसलिए पुलिस उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती है. सूत्रों ने बताया कि शिव मंदिर, बागडोगरा, फुलबारी से सटे इलाके डाबग्राम, चंपासारी, गुरुंग बस्ती, मल्लागुरी, कुलीपाड़ा, डांगीपाड़ा इत्यादि कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां अपराधियों का ज्यादा आतंक देखा जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार तो बदल गई, लेकिन साधारण पुलिस की मानसिकता और कार्यशैली नहीं बदली है. पिछली सरकार में टीएमसी समर्थित अपराधियों की पौ बारह थी. जब पुलिस से बड़ा पार्टी का अपना कानून होता था. बदली सरकार में प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव तो हुआ है, लेकिन अधिकतर पुलिस वालों के कार्य करने की शैली और मानसिकता नहीं बदली है. इसका लाभ अपराधी उठा रहे हैं. लोगों की शिकायत है कि टीएमसी समर्थित अपराधी आज भी बस्ती इलाकों में सक्रिय हैं.
सिलीगुड़ी में नगर निगम का चुनाव कब होगा, यह तो पता नहीं. लेकिन तब तक कानून एवं व्यवस्था को लेकर लोग सवाल उठाने लगे हैं. सिलीगुड़ी नगर निगम इलाका हो या फिर सिलीगुड़ी संलग्न माटी गाड़ा और फुलवारी का क्षेत्र, बदमाशों एवं अपराधियों का आतंक बढ़ता जा रहा है. वर्तमान में ड्रग्स का धंधा, चोरी- छिनताई, दादागिरी चारों तरफ देखी जा रही है. अपराधों को रोकने में पुलिस की निष्क्रियता के आरोप लग रहे हैं.
ऐसा नहीं है कि सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस अपनी जिम्मेदारियों एवं कर्तव्य का पालन नहीं कर रही है. लेकिन लोगों का कहना है कि पुलिस मौके पर जरूर पहुंचती है, लेकिन आरोपी को दबोचने के बजाय पुलिस का सारा ध्यान मामले को निपटाने तक सीमित रहता है. कुछ गंभीर मामलों में पुलिस आरोपी को दबोचती जरूर है, लेकिन आरोपी के खिलाफ पुलिस जो धारा लगाती है, वह ज्यादातर जमानती धाराएं होती हैं. उसके आधार पर आरोपी को जमानत मिल जाती है. जेल से छूटने के बाद आरोपी एक बार फिर से अपने पुराने धंधे में लौट आता है.
ऐसे में यह कैसे कल्पना की जा सकती है कि सिलीगुड़ी अपराध मुक्त हो जाएगा. सिलीगुड़ी में प्रशासनिक व्यवस्था के बदलाव के साथ ही साधारण पुलिस की मानसिकता और कार्य करने की शैली में भी बदलाव लाने की जरूरत है. बदमाशों एवं अपराधियों के खिलाफ पुलिस को गैर जमानती धाराएं लगाने की जरूरत है. कुछ दिनों में पूजा का बाजार शुरू हो जाएगा. ऐसे में शहर में भीड़भाड़ बढ़ेगी. इसलिए पुलिस प्रशासन को अपने कामों से यह संदेश देने की जरूरत है कि सरकार बदल गई है और पुलिस के काम करने का तरीका भी बदल चुका है अपराध चाहे कोई भी हो, उसको रोकने के लिए पुलिस की रणनीति की प्रभावशीलता जरूरी है.
