आखिर व्यापारी भरोसा किस पर करें? जब ट्रांसपोर्टर पर शक की उंगली उठने लगे, जब माल ढुलाई करने वाले ट्रक चालक ट्रांसपोर्टर के विश्वास का हनन करने लगे, या दोनों ही व्यापारी का भरोसा तोड़ने लगे, तो भरोसा किस पर करें व्यापारी? व्यापार का अहम पक्ष होता है ट्रांसपोर्टर और ट्रांसपोर्ट करने वाले ट्रक चालक. लेकिन इस घटना के बाद दोनों ही शक और साजिश के दायरे में आ गए हैं.
उन्होंने जो किया है, उसके बाद सिलीगुड़ी के व्यापारी और व्यापार जगत में हड़कंप मचा हुआ है. सिलीगुड़ी के एक जाने माने व्यापारी के साथ जिस तरह का धोखा हुआ है, हाल के दिनों में इस तरह का मामला पहली बार देखा गया है. ट्रांसपोर्ट और ट्रक चालक के खिलाफ व्यापारी द्वारा FIR दर्ज कराई गई है. व्यापारी को लगता है कि एक सोची समझी साजिश के तहत उनका माल गायब किया गया है.
21 लाख से ज्यादा की कीमत का जीरा शिलांग भेजा जा रहा था. लेकिन रास्ते में ही माल गायब हो गया और खाली ट्रक जोडाभाटा से बरामद किया गया. ना तो ड्राइवर का पता है और ना ही ट्रांसपोर्टर की ओर से संतोष जनक जवाब मिल रहा है. आखिर इतना बड़ा खेल किसने किया? क्यों किया और ट्रक में लोडेड जीरा आखिर गया तो कहां गया? इन सब के बारे में पुलिस लगातार छानबीन कर रही है. जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी.
थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी, पीड़ित पक्ष के बयान तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस घटना के पीछे कहीं ना कहीं साजिश नजर आती है. चलिए आपको पूरा मामला बताते हैं. खालपारा में लक्ष्मी नारायण घीसूराम नामक एक फर्म है. फर्म मालिक संदीप कुमार सिंघल हैं. उनकी फर्म से देश के दूर दराज क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट के जरिए माल भेजा जाता रहा है. सिलीगुड़ी के जाने-माने व्यापारी हैं और उनका ज्यादातर कारोबार असम और उत्तर पूर्व के अनेक राज्यों से जुड़ा हुआ है.
21 जुलाई की की घटना है. खालपारा स्थित उनकी फर्म से शिलांग के एक व्यापारी से प्राप्त ऑर्डर के बाद एक ट्रक में लगभग 400 बोरी जीरा, जिसका बाजार मूल्य 21 लाख 42 हजार रुपए था, लोड किया जा रहा था. ट्रक एक जाने माने ट्रांसपोर्ट कंपनी का था. जब पूरा माल ट्रक में लोड कर दिया गया तो बिल्टी तथा दूसरे कागजात तैयार करके ट्रक को शिलांग के लिए रवाना कर दिया गया. आमतौर पर व्यापारी को ट्रक की रवानगी और गंतव्य स्थल तक पहुंचने का अनुमानित समय बता दिया जाता है.
जब निर्धारित समय के भीतर ट्रक शिलांग नहीं पहुंचा तो व्यापारी ने कुछ समय और इंतजार किया. फिर उसने सिलीगुड़ी स्थित फर्म से पूछताछ की. फर्म के मालिक संदीप कुमार सिंघल ने आश्चर्य व्यक्त किया और उसी समय उन्होंने ट्रांसपोर्ट कंपनी को फोन मिलाया. कुछ देर के बाद ट्रांसपोर्ट कंपनी की ओर से जो जवाब मिला, उसके बाद संदीप कुमार सिंघल का माथा चकराने लगा.
ट्रांसपोर्ट कंपनी की ओर से संदीप कुमार को बताया गया कि जिस ट्रक में उनका माल भेजा गया था, वह ट्रक जोडाभाटा के पेट्रोल पंप पर लावारिस हालत में पड़ा है. ट्रांसपोर्ट कंपनी की ओर से कहा गया कि ट्रक चालक से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन उसका मोबाइल स्विच ऑफ है. कुछ देर के बाद यह भी पता चला कि ट्रक चालक फरार है. इसके बाद व्यापारी संदीप कुमार सिंघल तथा ट्रांसपोर्ट कंपनी के अधिकारी के बीच कुछ और बात हुई. अंततः संदीप कुमार सिंघल को एहसास हो गया कि उनके साथ लूट की एक बड़ी साजिश की गई है.
सिलीगुड़ी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 (5) , 303 (2) तथा 61 (2) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. फरार ट्रक चालक की गिरफ्तारी के लिए सिलीगुड़ी पुलिस ने जोड़ा भाटा पुलिस से संपर्क किया है. इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि सिलीगुड़ी से चलने के बाद ट्रक कहां गया और किस रास्ते वह जोड़ा भाटा पहुंच गया.
ट्रक को बीच रास्ते में कहां खाली कराया गया. वे कौन लोग थे जिन्होंने 400 बोरी जीरे को गायब किया है? हालांकि इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है. पहले भी इस तरह के मामले होते रहे हैं. लेकिन हाल के वर्षों में सिलीगुड़ी में यह अपनी तरह का पहला मामला है, जहां सिलीगुड़ी की ही एक ट्रांसपोर्ट कंपनी और ट्रक चालक को न केवल संदेह के दायरे में रखा गया है, बल्कि उन्हें आरोपी भी बनाया गया है. हालांकि सच क्या है, यह तो पुलिस की जांच के बाद ही पता चलेगा.
