सिलीगुड़ी के ऐसे लोग, जिनका बैंक अकाउंट बैंक ऑफ़ बड़ौदा में है, उन्हें सावधान हो जाने की जरूरत है. क्योंकि मीडिया खबरों तथा सोशल मीडिया में दावा किया जा रहा है कि बैंक ऑफ़ बड़ौदा से 1 टीबी डेटा लीक हो गया है. इसका यह मतलब है कि बैंक के पास आपका जो पर्सनल डिटेल्स होता है, वह गलत हाथ में लग गया है. अगर किसी का व्यक्तिगत पर्सनल डेटा गलत हाथ में लग गया तो आप समझ सकते हैं कि आपके साथ कभी भी साइबर स्कैम हो सकता है.
आज सिलीगुडी पुलिस कमिश्नरेट की ओर से भी एक पोस्ट किया गया है. सिलिगुड़ी पुलिस ने सिलीगुड़ी के लोगों से अपील की है कि सिलीगुड़ी में साइबर ठग सक्रिय हो गए हैं और वह आपके मोबाइल पर फर्जी मैसेज, लिंक, एपीके फाइल आदि भेज रहे हैं, जो एसबीआई केवाईसी अपडेट से जुड़े हैं. इसलिए बैंक खाता धारक कभी भी एपीके फाइल इंस्टॉल नहीं करें और ना ही डाउनलोड करें. खासकर जब वह एसएमएस, ईमेल, व्हाट्सएप, टेलीग्राम या दूसरे प्लेटफार्म से आपके मोबाइल पर भेजा गया हो.
सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट की ओर से सिलीगुड़ी की जनता से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध केवाईसी अपडेट लिंक से बचें. हमेशा बैंक की ऑफिशल वेबसाइट से सच का पता करें या फिर बैंक की ब्रांच में जाकर वास्तविक जानकारी प्राप्त करें. किसी भी तरह का संदेह होने पर तुरंत ही 1930 पर डायल करें या नजदीकी थाना से संपर्क करें.
सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट की ओर से यह खबर बैंक ऑफ़ बडौदा घटनाक्रम को केंद्र कर जारी की गई है या साधारण सतर्कता के लिए यह तो पता नहीं है. हालांकि बैंक ऑफ़ बड़ौदा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. बैंक ने यह नहीं कहा है कि उनके सिस्टम में किसी हैकर्स ने सेंध लगाई है अथवा ग्राहकों का बड़ी मात्रा में डेटा चुराया गया है.
मीडिया खबरों में कहा जा रहा है कि हैकर्स ने दावा किया है कि उसने बैंक ऑफ़ बडौदा तथा दूसरे बैंकों के ग्राहकों के नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, आधार नंबर, बैंक अकाउंट से जुड़ी अन्य जानकारियां हासिल कर ली है. यह खबर तेजी से वायरल हो रही है.
इससे बैंक ऑफ़ बड़ौदा में खाता रखने वाले खातेदारों की चिंता बढ़ गई है. अगर आपका भी खाता बैंक ऑफ़ बड़ौदा में है तो डरने या चिंता करने की जरूरत नहीं है. थोड़ी सावधानी रखना जरूरी है. क्योंकि अगर आपका डेटा किसी गलत हाथ में लग गया तो इसका यह मतलब नहीं है कि साइबर ठग आपका पैसा गायब कर देंगे. साइबर अपराधी क्या कर सकते हैं, वह आपको जानना जरूरी है.
साइबर अपराधी आपका पर्सनल डेटा प्राप्त करने के बाद फिशिंग, फर्जी कॉल, केवाईसी अपडेट के नाम पर दुकानदारी और पहचान की चोरी जैसी वारदातों को अंजाम दे सकते हैं. साइबर ठग बैंक अधिकारी बनकर आपको कॉल कर सकते हैं. वह फर्जी लिंक भेज सकता है अथवा ओटीपी और नेट बैंकिंग की जानकारी लेने की कोशिश कर सकता है. इसलिए ऐसे मामलों में आपको पहले से ज्यादा सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है.
अगर आपका बैंक अकाउंट बैंक ऑफ बड़ौदा में हो अथवा किसी अन्य बैंक में तो घबराएं नहीं. किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंक संबंधी जानकारी ओटीपी, यूपीआई पिन अथवा पासवर्ड शेयर ना करें. नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग का पासवर्ड बदलते रहे. टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें. अकाउंट का लेनदेन हिस्ट्री नियमित रूप से जानते रहे. अगर आपको कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक को सूचित करें या साइबर हेल्पलाइन या सिलीगुड़ी साइबर थाने को सूचित करें.
