September 3, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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दुर्गा पूजा से पहले सिलीगुड़ी से कोलकाता तक हाहाकार! खाने की थाली में परोसा जा रहा ‘मीठा जहर’!

दुर्गा पूजा से पहले सिलीगुड़ी शहर और आसपास के होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों समेत अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों पर सिलीगुड़ी नगर निगम और खाद्य विभाग के अधिकारियों का गुणवत्ता जांच अभियान जारी है. सेवक रोड, हिल कार्ट रोड, खालपारा, आदि के खाद्य प्रतिष्ठानों पर क्वालिटी जांच के क्रम को आगे बढ़ाते हुए दार्जिलिंग के डीएम हरिशंकर पणिकर, सिलीगुड़ी के महकमा शासक विकास रूहेला, खाद्य सुरक्षा अधिकारी व निगम कर्मी माॅल के रसोई घरों तक पहुंचने लगे हैं.

अधिकारियों की टीम जहां भी जा रही है, रेस्टोरेंट व अन्य खाद्य दुकानों की जांच के क्रम में गंदगी, मिलावट, सड़ा गला बासी खाना, हानिकारक रसायन आदि के अलावा साफ सफाई की तस्वीर नहीं मिल रही है. प्रतिष्ठानों की जांच के क्रम में अधिकारियों का मन खराब हो जाता है. माटीगाड़ा स्थित जैसे बड़े मॉल का हाल तो यह है कि यहां के लगभग 7 से 8 रेस्टोरेंट, फूड स्टाल, पब-बार आदि में स्थित रसोई घरों की जांच की गई तो वहां की हालत देखकर दो संस्थाओं को तो नोटिस ही जारी कर दिया गया. अब तक सिलीगुड़ी और माटीगाड़ा मिलाकर एक दर्जन से ज्यादा मालिकों को नोटिस जारी किया जा चुका है.

सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में अब तक जो स्थिति सामने आई है, उसके अनुसार अस्वच्छ वातावरण में खाद्य वस्तुओं को तैयार करना, खाने की वस्तुओं में कीड़े मकोड़े पाया जाना, इत्यादि यह जताने के लिए काफी है कि खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता के मानकों पर अभी तक कोई भी होटल या रेस्टोरेंट या स्टॉल खरा नहीं उतरा है. यही हाल पूरे प्रदेश में भी दिख रहा है. कोलकाता से लेकर पूरे प्रदेश के सभी जिलों में यह अभियान चलाया जा रहा है. लेकिन कहीं से भी किसी होटल या प्रतिष्ठान की साफ सफाई के बारे में तारीफ की खबर नहीं आ रही है.

कोलकाता के कई रेस्टोरेंट के फ्रिज से सड़ा हुआ मांस और मछली भारी मात्रा में बरामद हुई है. यही ग्राहकों को खिलाया जा रहा था. बदुरिया में सड़ा हुआ मांस मिला तो साल्ट लेक, मध्यमग्राम, पूर्वी मेदिनीपुर, पूर्वी वर्धमान समेत कई मशहूर रेस्टोरेंट में भी हाल कोई अलग नहीं था. कई किलो सड़ा हुआ मांस, फफूंद लगे चिकन, सड़ी हुई मछलियां आदि बदबूदार वातावरण में पाए गए. हद तो तब हो गई, जब शहर का सबसे मशहूर कहे जाने वाले एक रेस्टोरेंट के रसोई से कई किलोग्राम सड़ा हुआ मांस और झिंगा बरामद किया गया.

इस रेस्टोरेंट में खाने के लिए ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है.यहां ग्राहक काफी समय से सड़े हुए मांस और मछलियां खा रहे थे. आप दुकान में जाते हैं तो वस्तु लेते समय एक्सपायरी डेट जरूर चेक करते हैं. लेकिन होटल में आपके खाने की थाली में परोसी जा रही सामग्री की एक्सपायरी डेट तो आप चेक भी नहीं कर सकते हैं. सिलीगुड़ी से लेकर कोलकाता और राज्य के विभिन्न जिलों में निरीक्षण के बाद कई खाद्य सामग्रियों के पैकेट ऐसे मिले हैं, जिन पर कोई तारीख ही नहीं लिखी गई है.

सिलीगुड़ी और कोलकाता को भी छोड़ दीजिए. पश्चिम बंगाल में कई पर्यटक स्थल हैं, जहां देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटक आते हैं.उनमें दीघा का अपना एक अलग स्थान है. दीघा में अधिकारियों के द्वारा चलाए गए अभियान में लगभग 20 होटलों और रेस्टोरेंट में बिकने वाली बिरयानी की गुणवत्ता बहुत ही खराब पाई गई. यहां होटल में खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किये जाने वाले रंग में खतरनाक रसायन पाए गए. जांच में सामने आया कि पहले से पका कर रखे गए मांस को गर्म करके ग्राहकों को परोसा जा रहा था. खाद्य विभाग के अधिकारियों ने कम से कम 12 होटल मालिकों को नोटिस जारी किया है.

बर्दवान शहर में अधिकारियों के चलाए गए अभियान में कई मिठाई दुकानों से बदबूदार बरामद किए गए हैं. एक्सपायर हो चुके पनीर को फेंक देना चाहिए. लेकिन मिठाई दुकानदार दूषित पनीर से खाद्य वस्तुएं तैयार करके ग्राहकों की थाली में परोस रहे थे. केवल पनीर ही नहीं, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, इस तरह से कोई भी खाद्य वस्तु सुरक्षा मानकों की कसौटी पर खरी नहीं पाई गई. अब सवाल यह है कि कोई भी व्यक्ति ज्यादा पैसे खर्च करके होटल या रेस्टोरेंट में खाने जाता है और बदले में उसे क्या मिलता है?

यह कोई पहली बार राज्य स्तर पर अभियान नहीं चलाया गया है. समय-समय पर इस तरह का अभियान खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के द्वारा चलाया जाता रहा है. आपको याद होगा कि 2018 में भी दुर्गा पूजा से पहले सिलीगुड़ी, कोलकाता और राज्य के दूसरे शहरों में भी इस तरह का अभियान चलाया गया था. तब उस समय कई रेस्टोरेंट में मरे हुए जानवरों के मांस को पकाकर ग्राहकों की थाली में परोसा जा रहा था.उस समय कई ढाबे वाले भी पकड़े गए थे, जो ग्राहकों को सस्ता खाना खिला रहे थे. इसके अलावा कई शहरों में रेस्टोरेंट और कैफे में सड़ा हुआ मांस पाया गया और फॉर्मेलिन जैसे रसायन भी जांच में पाए गए.

अगर खाद्य सुरक्षा विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा ऐसे जिम्मेदार रेस्टोरेंट और होटलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती तो इस सिलसिले को काफी पहले ही बंद किया जा सकता था. परंतु ऐसा होता नहीं है. विशेषज्ञ मानते हैं कि एक तो संविधान में ऐसे मामलों में ठोस कानून का अभाव है, दूसरे में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई महज खानापुरी के लिए ही होती है. अगर अच्छी नीयत और जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाती तो इस सिलसिले को आगे बढ़ने से रोका जा सकता था.

आज सिलीगुड़ी के कई होटल, मिठाई दुकानदार और रेस्टोरेंट मालिकों को नोटिस भेजा गया है.वे इसका जवाब भी देंगे. कुछ दिनों तक यह मामला सुर्खियों में रहेगा और फिर सब कुछ भुला दिया जाएगा. कुछ दिनों तक संबंधित प्रतिष्ठान के लोग सावधानीपूर्वक काम करेंगे और उसके बाद फिर से वही पुरानी लीक पकड़ी जाएगी. वही पुराना सिलसिला शुरू हो जाएगा. सिलीगुड़ी में लगभग हर साल यह अभियान चलाया जाता है. ऐसा लगता है कि खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का यह अभियान रूटीन चेकअप के अलावा कुछ नहीं है. अपनी राय और सुझाव से जरूर अवगत कराएं. आखिर ग्राहक करे तो क्या करे? इसके लिए कौन दोषी है?

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