सावधान हो जाइए! सिलीगुड़ी में पूजा का बाजार भले ही फीका हो, लेकिन वाहन चोरी का बाजार काफी गर्म है. पलक झपकते के साथ ही वाहन उठा लिया जाता है. जब तक आप अपने वाहन की तलाश कीजिएगा, पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे, तब तक आपका वाहन आपसे काफी दूर चला जा चुका होगा. उसके बाद इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि पुलिस आपके वाहन को ढूंढ पाएगी!
घर में हों तो वाहन को ताला लगाकर सुरक्षित स्थान पर रखें. सड़क पर वाहन खड़ा करके किसी से बातचीत कर रहे हो, तो एक नजर वाहन पर रखें. ऑफिस में हों तो वाहन की देखभाल की जिम्मेदारी चौकीदार पर डाल दें. अगर बाजार या खरीदारी करने निकले हो तो ₹5 या ₹10 बचाने के चक्कर में अपने वाहन को लावारिस अवस्था में ना रखें. पार्किंग फीस भर कर निश्चिंत हो जाएं. चाहे आपको शॉपिंग करने में आधा घंटा ही क्यों ना लगे ,अपने वाहन को पार्किंग में जरूर रखें.
आज यह बात इसलिए करनी पड़ रही है कि सिलीगुड़ी शहर और आसपास के इलाकों में वाहन चोरी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. सबसे ज्यादा वाहन चोरी के मामले माटीगाड़ा थाना क्षेत्र में देखे जा रहे हैं, जहां एक दिन में वाहन चोरी के दर्जनों मामले सामने आते हैं. प्रधान नगर, सिलीगुड़ी थाना, भक्ति नगर थाना, एनजेपी थाना और इस तरह से सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के लगभग सभी थानों में वाहन चोरी के मामले सर्वाधिक बताए जा रहे हैं.
हालांकि सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के अंतर्गत किस थाने के अंतर्गत कितने वाहनों की चोरी होती है और थाने में डायरी लिखाई जाती है, इसका कोई आधिकारिक विवरण तो नहीं है. परंतु सूत्र बताते हैं कि सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के विभिन्न थानों में दर्ज मामलों में सबसे अधिक वाहन चोरी के ही मामले होते हैं. इन दिनों ये मामले कुछ ज्यादा ही देखे जा रहे हैं. खासकर एनजेपी थाना, माटीगाड़ा व भक्ति नगर थाना क्षेत्र में वाहन चोरी के अधिकतर मामले सामने आ रहे हैं.
माटीगाड़ा थाना क्षेत्र में एक ही दिन में वाहन चोरी की दो घटनाएं सामने आई है. कदमतला इलाके में एक व्यक्ति के घर के सामने ही खड़े वाहन की चोरी हो गई. उसी दिन शाम को माटीगाड़ा इलाके में ही एक अन्य व्यक्ति की बाइक चोरी हो गई. ये दोनों ही मामले माटीगाड़ा थाने में दर्ज कराए गए. इसी तरह से एनजेपी थाना के अंतर्गत पोराझाड़ से घर के अंदर परिसर में रखी गई नयी टोटो की चोरी 2025 में ही हुई थी. लेकिन उसका आज तक पता नहीं चला है.
ऐसा नहीं है कि वाहन चोरी के मामलों में पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस अपराधियों को न केवल गिरफ्तार ही कर रही है, बल्कि चोरी गए वाहनों की बरामदगी भी कर रही है. परंतु सूत्र बताते हैं कि चोरी के 20% वाहनों की ही बरामदगी हो पाती है. जबकि 80% वाहन बरामद ही नहीं हो पाते. हालांकि पुलिस वाहन चोरी के मामले में आरोपियों को पकड़ कर कानूनी कार्रवाई भी करती है. पर ये इतने ढीठ होते हैं कि चुराए गए वाहन का सुराग तक नहीं दे पाते हैं. पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अपराधियों को कुछ दिनों में कोर्ट से जमानत मिल जाती है.
सूत्रों ने बताया कि सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों से वाहनों की चोरी करने वालों का एक नेटवर्क सक्रिय है. वाहन चोर वाहनों की चोरी करके उसे रातों-रात सीमा पार नेपाल पहुंचा देते हैं. वाहन चोर नेटवर्क पानीटंकी पर ज्यादा सक्रिय है. जैसे ही चुराए गए वाहन को पानी टंकी लाया जाता है, वहां से वाहनों के कागजात और पंजीकरण बदलकर कैरियर के द्वारा वाहन को मेची नदी मार्ग से नेपाल पहुंचा दिया जाता है. कुछ लोगों की माने तो नेपाल में चुराए गए वाहनों की बॉडी से लेकर इंजन तक अलग कर दिया जाता है और वाहनो के प्रत्येक parts को अलग-अलग करके बेच दिया जाता है.
जब तक पुलिस के पास वाहन चोरी के मामले सामने आते हैं और पुलिस कार्रवाई करती है, तब तक वाहनों को मेची नदी से होकर नेपाल पहुंचा दिया जाता है. पुलिस तो स्थानीय स्तर पर कार्रवाई करती है और वाहन चोर की तलाश करती है. तब तक अधिकतर चुराए गए वाहनों को नेपाल में इस हाल में ला दिया जाता है कि उनकी पहचान ही ना हो सके. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के अधिकारियों को भी शक है कि सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों से चुराए गए वाहन को नेपाल में ले जाकर बेच दिया जाता होगा.
हालांकि पुलिस अभी इसे यकीन के साथ कहना नहीं चाहती है. पुलिस को संदेह जरूर है. इसलिए पुलिस किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले वाहन चोरी के नेटवर्क तक पहुंचना चाहती है. पुलिस का संदेह इस बात से भी बढ़ जाता है कि इससे पहले भी पुलिस की जांच पड़ताल में कई अपराधी पकड़े जा चुके हैं, जिनका नेपाल से संबंध था. 7 जुलाई 2025 को एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जिसमें प्रधान नगर थाना की पुलिस ने वाहन चोरी से जुड़े एक नेटवर्क का खुलासा किया था. तब पुलिस ने जाकिर हुसैन नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया और उसके कब्जे से चोरी के वाहन बरामद किए थे. पुलिस की जांच में पता चला कि वाहन चोर का संबंध नेपाल से है.
इन सभी बातों,साक्ष्यो, जानकारों तथा गुप्तचरों से मिली जानकारी के आधार पर सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों से चुराए गए वाहनों को नेपाल में पहुंचाया जाता है, जहां उनकी बिक्री कर दी जाती है? वाहन चोरी के बढ़ते मामलों को देखने के बाद पुलिस ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण पाने के लिए एक नई रणनीति बना रही है. नियमित पेट्रोलिंग के अलावा रात के समय नाका चेकिंग और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सलाह और वाहन चोर नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस की योजना है.
