कमर्शियल एलपीजी गैस की जबरदस्त महंगाई और किल्लत ने अच्छे-अच्छे होटल वालों की भी नींद उड़ा दी है. गैस नहीं मिलने के कारण कई होटल बंद होने के कगार पर है. जबकि छोटे होटलों ने लकड़ी के चूल्हे पर ग्राहकों को खाना परोसना शुरू कर दिया है. यह अलग बात है कि नाश्ते से लेकर खाने तक ग्राहकों की जेब कुछ ज्यादा ही ढीली करनी पड़ रही है. होटल में खाना काफी महंगा साबित हो रहा है.
बड़े होटलों में प्रत्येक खाद्य वस्तु का दाम काफी बढ़ गया है. अगर आपको लंच करना है तो पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी. इन बड़े होटलों में या तो बिजली से चलने वाले चूल्हों का प्रयोग हो रहा है, या फिर महंगे गैस सिलेंडर का. बिजली से चलने वाले चूल्हों के कारण बिजली की खपत बढ़ गई है. मजबूरन खाने पीने की चीजों का दाम बढ़ाना पड़ रहा है. जब तक स्थिति स्वाभाविक नहीं हो जाती, ग्राहकों को बढे हुए रेट पर ही खाना नसीब होगा.
एक तो कमर्शियल एलपीजी गैस मिल नहीं रही है. अगर मिलती भी है तो होटल वालों के लिए यह पर्याप्त नहीं है. मजबूरन उन्हें ब्लैक में गैस लेनी पड़ती है. खर्च बढ़ेगा तो होटल वाले ग्राहकों पर ही बोझ डालेंगे. यही कारण है कि ना चाहते हुए भी उन्हें खाने पीने की वस्तुओं का दाम बढ़ाना पड़ रहा है. इनका कहना है कि जब स्थिति स्वाभाविक हो जाएगी तो फिर से पुराने रेट पर ही खाना मिलने लगेगा.
होटलों का यह हाल देशभर में है. देश भर में एलपीजी संकट भयावह हो चला है. अपना घर बार छोड़कर दिल्ली, मुंबई ,गुजरात आदि राज्यों में मेहनत मजदूरी करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा संकट का सामना करना पड़ रहा है. गैस नहीं मिलने से उन्हें दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हो रही है. जबकि होटलों में खाना इतना महंगा हो गया है कि उनकी कमाई भी कम पड रही है.
यही कारण है कि उन्होंने घर लौटना शुरू कर दिया है. रेलगाड़ियो में परदेशियों की भीड़ देखते बनती है. सिलीगुड़ी जंक्शन हो या एनजेपी स्टेशन सब जगह दिल्ली मुंबई गुजरात चेन्नई आदि राज्यों से आने वाली गाड़ियों से गाड़ी से उतरते परदेसी मिल जाएंगे. उनकी एक ही पीड़ा है कि गैस नहीं मिलने से वह काफी परेशान है. भूखे रहकर काम नहीं किया जा सकता है. जब स्थिति ठीक होगी तो वह फिर प्रदेश जाएंगे. फिलहाल घर पर ही रहेंगे.
दिल्ली मुंबई गुजरात के विभिन्न शहरों से लौट रहे परदेसी श्रमिकों ने बताया कि वहां सस्ते होटल में खाना कई गुना बढ़ गया है. खाड़ी युद्ध से पहले ₹60 में उनका पेट भर जाता था. अब उसी खाने के उन्हें 150 रुपए देना पड़ रहा है. घर पर गैस के अभाव में खाना नहीं बना सकते. क्योंकि छोटे सिलेंडर में गैस नहीं मिल रही है. अगर मिलती भी है तो ₹1500 से लेकर ₹2000 तक, जो उनके बस की बात नहीं है. उन्होंने बताया कि कई होटल तो बंद हो चुके हैं.
सिलीगुड़ी में भी छोटे होटल या तो बंद होने के कगार पर हैं या फिर लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल करने लगे हैं. जलपाई मोड, नौकाघाट, तीनबती और अन्य स्थानों पर चल रहे छोटे-छोटे होटल अब लकड़ी या फिर इंडक्शन चूल्हों के भरोसे रह गए हैं. अगर यही स्थिति लगातार बनी रहती है तो यह भी हो सकता है कि कल यहां बिकने वाली हर चीज आपकी जेब पर भारी पड़ने लगेगी.
देश के दूसरे शहरों के होटल की तरह यहां भी खाना महंगा मिल सकता है. गनीमत है कि अभी सब कुछ आपकी जेब के अनुकूल है! यह अलग बात है कि समोसे से लेकर पूड़ी, कचौड़ी, जलेबी, मिठाइयों के साइज छोटे हो गए हैं. कई जगह तो समोसे का दाम ₹15 से बढ़कर ₹20 हो गया है. हालांकि यह बढ़ोतरी प्रत्यक्ष रूप में नहीं है.
